रंका सीएचसी को अनुमंडलीय अस्पताल बनाने की मांग तेज, स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 26 May 2026 6:55 PM

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स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी को ज्ञापन सौंपते रंका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी. फोटो: प्रभात खबर

Garhwa News: गढ़वा के रंका सीएचसी को अनुमंडलीय अस्पताल में अपग्रेड करने की मांग तेज हो गई है. प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ असजद अंसारी ने स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी को ज्ञापन सौंपा. मंत्री ने सकारात्मक आश्वासन देते हुए जल्द कार्रवाई और अस्पताल के निरीक्षण की बात कही है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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गढ़वा से अविनाश सिंह की रिपोर्ट

Garhwa News: झारखंड के गढ़वा जिले के रंका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को अनुमंडलीय अस्पताल में अपग्रेड करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है. रंका के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. असजद अंसारी ने झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी से मुलाकात कर इस संबंध में एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा. मुलाकात के दौरान डॉ असजद अंसारी ने स्वास्थ्य मंत्री को रंका अनुमंडल की जमीनी हकीकत, भौगोलिक कठिनाइयों और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी से जूझ रहे लोगों की समस्याओं से विस्तार से अवगत कराया. उन्होंने बताया कि क्षेत्र के लोगों को गंभीर बीमारी और आपातकालीन स्थिति में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

3.5 लाख आबादी को पर्याप्त सुविधाएं नहीं

ज्ञापन में बताया गया कि रंका अनुमंडल के अंतर्गत कुल पांच प्रखंड आते हैं, जिनकी कुल आबादी करीब 3.5 लाख है. यह पूरा इलाका घने जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम रास्तों से घिरा हुआ आदिवासी बहुल क्षेत्र है. डॉ. असजद अंसारी ने कहा कि सरूअत पहाड़ और बूढ़ा पहाड़ जैसे इलाकों से मरीजों को गढ़वा सदर अस्पताल तक पहुंचाने में पूरा दिन लग जाता है. सड़क और परिवहन सुविधाएं बेहतर नहीं होने के कारण कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं. उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सबसे ज्यादा असर गरीब और ग्रामीण परिवारों पर पड़ता है. आर्थिक रूप से कमजोर लोग समय पर इलाज नहीं करा पाते और गंभीर बीमारियां जानलेवा साबित हो जाती हैं.

शिक्षा और जागरूकता की कमी भी बड़ी चुनौती

डॉ. असजद अंसारी ने स्वास्थ्य मंत्री को बताया कि क्षेत्र में शिक्षा का स्तर काफी नीचे है और लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी कम है. इसके कारण कई लोग बीमारी बढ़ने के बाद ही अस्पताल पहुंचते हैं. उन्होंने कहा कि यदि रंका सीएचसी को अनुमंडलीय अस्पताल में अपग्रेड कर दिया जाता है तो लोगों को घर के पास ही विशेषज्ञ डॉक्टर, बेहतर इलाज और ऑपरेशन जैसी सुविधाएं मिल सकेंगी. इससे मरीजों को बड़े शहरों की दौड़ लगाने से राहत मिलेगी.

स्वास्थ्य मंत्री ने दिया सकारात्मक आश्वासन

रंका अनुमंडल की समस्याओं को सुनने के बाद स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने मामले में सकारात्मक रुख अपनाया. उन्होंने आश्वासन दिया कि रंका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को जल्द ही अनुमंडलीय अस्पताल के रूप में अपग्रेड करने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि साढ़े तीन लाख की आबादी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है.

सीमित संसाधनों में बेहतर कार्य की सराहना

स्वास्थ्य मंत्री ने वर्तमान में रंका सीएचसी द्वारा सीमित संसाधनों के बीच दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की भी सराहना की. उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी अस्पताल के डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लोगों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने जानकारी दी कि अपने आगामी गढ़वा दौरे के दौरान वे स्वयं रंका सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का औचक निरीक्षण करेंगे और वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे. निरीक्षण के दौरान अस्पताल की जरूरतों और कमियों का भी आकलन किया जाएगा.

प्रशासनिक दर्जा मिला, लेकिन सुविधाएं अब भी अधूरी

रंका को प्रशासनिक स्तर पर अनुमंडल का दर्जा तो मिल चुका है, लेकिन स्वास्थ्य सुविधाएं अब भी उसी पुराने ढांचे पर निर्भर हैं. क्षेत्र के लोगों का कहना है कि अनुमंडल बनने के बाद भी अस्पताल को अपग्रेड नहीं किया गया, जिससे लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है. विशेषकर भंडरिया, चिनिया और रमकंडा जैसे सुदूर प्रखंडों के लोगों को छोटी-बड़ी सर्जरी और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों या उच्च स्वास्थ्य संस्थानों का सहारा लेना पड़ता है.

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लोगों को अब फैसले का इंतजार

रंका क्षेत्र के लोगों को अब स्वास्थ्य मंत्री के आश्वासन के बाद जल्द निर्णय होने की उम्मीद है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि सीएचसी को अनुमंडलीय अस्पताल में अपग्रेड कर दिया जाता है तो हजारों गरीब परिवारों को राहत मिलेगी और इलाज के लिए दूर-दराज नहीं जाना पड़ेगा. स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी लंबे समय से इस क्षेत्र की बड़ी समस्या रही है. ऐसे में सरकार के स्तर पर सकारात्मक पहल को ग्रामीणों ने राहत भरा कदम बताया है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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