नोवामुंडी में सामने आई इंसानियत को झकझोरती तस्वीर, डालसा से जागी मदद की उम्मीद

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 26 May 2026 8:57 PM

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नोवामुंडी के रेलवे ब्रिज का 11 नंबर का पोल, जहां से मौत से जूझती वृद्ध महिला पाई गयी. फोटो: प्रभात खबर

Noamundi News: नोवामुंडी रेलवे ओवरब्रिज के नीचे एक बेसहारा वृद्ध महिला कई दिनों से भूख, प्यास और बीमारी से जूझ रही है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल उठाए हैं. लोगों को उम्मीद है कि डालसा की टीम महिला को इलाज, भोजन और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराएगी. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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नोवामुंडी से सुबोध मिश्रा की रिपोर्ट

Noamundi News: पश्चिमी सिंहभूम जिले के नोवामुंडी से मानवता को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है. नोवामुंडी रेलवे फाटक ओवरब्रिज के पिलर नंबर 11 के नीचे एक बेसहारा वृद्ध महिला कई दिनों से भूख, प्यास और बीमारी की हालत में जिंदगी और मौत से जूझ रही है. भीषण गर्मी और बदहाल हालत में महिला न ठीक से उठ पा रही है और न चल पा रही है. राहगीरों की ओर टकटकी लगाए वह दर्द भरी आंखों से मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन अब तक उसकी सुध लेने वाला कोई सामने नहीं आया. यह दृश्य देखने वाले लोगों का भी दिल दहला दे रहा है.

प्रशासन-जनप्रतिनिधियों की संवेदनहीनता पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का कहना है कि वृद्ध महिला कई दिनों से उसी स्थान पर पड़ी हुई है, लेकिन अब तक न प्रशासन का कोई अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने उसकी मदद की कोशिश की. लोगों ने आरोप लगाया कि समाजसेवा का दावा करने वाले कई संगठन भी इस मामले में पूरी तरह चुप हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक बेसहारा महिला की जान बचाने की जिम्मेदारी कौन लेगा. ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि यदि समय रहते महिला को अस्पताल और सुरक्षित आश्रय नहीं मिला तो उसकी हालत और गंभीर हो सकती है.

पहले भी हो चुकी हैं मौतें

स्थानीय लोगों ने बताया कि इसी ओवरब्रिज के नीचे पहले भी दो लोगों की मौत हो चुकी है. इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई. लोगों का कहना है कि रेलवे फाटक और ओवरब्रिज के आसपास कई बेसहारा लोग रात गुजारते हैं, लेकिन उनके लिए न भोजन, न चिकित्सा और न ही सुरक्षा की कोई व्यवस्था है. अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी और मौत का इंतजार कर रहा है. क्षेत्र के लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है.

डालसा की ओर टकटकी निगाहें

हालांकि, इस मामले में लोगों की उम्मीद अब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी डालसा से जुड़ गई है. इसकी वजह भी एक पुरानी घटना है, जब डालसा की टीम ने इसी तरह एक बेसहारा वृद्ध की मदद कर मानवता की मिसाल पेश की थी. स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ समय पहले नोवामुंडी पचाई साई मुख्य मार्ग के पास एक वृद्ध कई दिनों तक भूख-प्यास से तड़प रहा था. उस समय डालसा के पीएलवी प्रमिला पात्रो और उमर सादिक मौके पर पहुंचे थे. दोनों ने वृद्ध के भोजन, इलाज और देखभाल की व्यवस्था कराई थी. इलाज के बाद वृद्ध को सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचा दिया गया था.

महिला को अस्पताल और आश्रय दिलाने की मांग

इसी घटना को याद करते हुए अब लोग उम्मीद कर रहे हैं कि डालसा एक बार फिर संवेदनशीलता दिखाएगा और पिलर नंबर 11 के नीचे तड़प रही वृद्ध महिला को अस्पताल, भोजन और सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराया जाएगा. स्थानीय लोगों का कहना है कि महिला की हालत बेहद गंभीर है और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत है. उन्होंने प्रशासन और सामाजिक संगठनों से अपील की है कि मानवता के नाते आगे आकर महिला की मदद करें.

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समाज के सामने बड़ा सवाल

यह घटना सिर्फ एक बेसहारा महिला की पीड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है. तेजी से बदलते दौर में क्या इंसानियत और सामाजिक संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं? राह चलते लोग महिला को देखते जरूर हैं, लेकिन मदद के लिए बहुत कम लोग आगे आ रहे हैं. ऐसे में यह तस्वीर समाज की संवेदनहीनता का दर्दनाक चेहरा भी उजागर करती है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि महिला को तत्काल राहत पहुंचाई जाए और भविष्य में ऐसे मामलों के लिए स्थायी व्यवस्था बनाई जाए, ताकि कोई भी बेसहारा व्यक्ति सड़क किनारे तड़पने को मजबूर न हो.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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