सरायकेला में 'छऊ' की सतरंगी छटा: राजकीय चैत्र पर्व का भव्य समापन, कलाकारों ने बिखेरा अपनी कला का जादू
Published by : Sameer Oraon Updated At : 13 Apr 2026 10:31 PM
कार्यक्रम के दौरान अपनी प्रस्तुति देते कलाकार
Seraikela Chhau Festival: सरायकेला की सांस्कृतिक विरासत 'छऊ' का जादू एक बार फिर बिरसा मुंडा स्टेडियम में देखने को मिला. राजकीय चैत्र पर्व के समापन समारोह में सरायकेला, खरसावां और मानभूम शैली के कलाकारों ने रात भर अपनी प्रस्तुतियों से समां बांध दिया. विजेताओं को पुरस्कृत करने के साथ-साथ इस कला को संजोने वाले गुरुओं को भी सम्मानित किया गया. देखिए सरायकेला के इस ऐतिहासिक महोत्सव की झलक.
Seraikela Chhau Festival, सरायकेला (शचींद्र कुमार दाश/प्रताप मिश्रा): सरायकेला के स्थानीय बिरसा मुंडा स्टेडियम में कला संस्कृति एवं पर्यटन विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित चैत्र पर्व का रंगारंग समापन हो गया. समापन समारोह का मुख्य आकर्षण रात्रि जागरण के दौरान प्रस्तुत किया गया सरायकेला शैली का छऊ नृत्य रहा. कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण के साथ हुई, जिसके बाद राजकीय छऊ कला केंद्र, केदार आर्ट सेंटर और कुश कारवा छऊ केंद्र के कलाकारों ने रात भर अपनी कला की सतरंगी छटा बिखेरी. छऊ की अद्भुत प्रस्तुतियों को देखने के लिए स्टेडियम में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी रही.

छऊ हमारी सांस्कृतिक धरोहर: जिला परिषद अध्यक्ष
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में फैमिली जज वीरेश कुमार, जिप अध्यक्ष सोनाराम बोदरा और नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी उपस्थित थे. मौके पर सोनाराम बोदरा ने कहा कि सरायकेला-खरसावां झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी है, जहां छऊ की तीनों शैलियां (सरायकेला, खरसावां और मानभूम) जीवित हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि यहां के कलाकारों ने विदेशों में भी भारत का मान बढ़ाया है और इस धरोहर को संजोना हम सभी का दायित्व है. नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज चौधरी ने भी प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त करते हुए कलाकारों को उचित मंच प्रदान करने की प्रतिबद्धता दोहराई.

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विजेता दलों और गुरुओं का सम्मान
महोत्सव के समापन पर विभिन्न शैलियों के विजेता ग्रामीण छऊ दलों को पुरस्कृत किया गया. सरायकेला शैली में ‘नवयुवक संघ छऊ नृत्य क्लब, भंडारीसाई’ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि मानभूम शैली में ‘झारखंड विकास परिषद, उदाटांड’ और खरसावां शैली में ‘छऊ नृत्य कला केंद्र, खरसावां’ पहले स्थान पर रहे. इसके साथ ही छऊ कला के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गुरुओं और वरिष्ठ कलाकारों को भी अंग वस्त्र व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया.

धार्मिक अनुष्ठान और कालिका घट
चैत्र पर्व के धार्मिक पक्ष के तहत अंतिम दिन ‘कालिका घट’ निकाला गया. स्थानीय खरकई नदी के तट पर पूजा-अर्चना के पश्चात घट को गुदड़ी बाजार स्थित शिव मंदिर में स्थापित किया गया. इस धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही चैत्र पर्व का आध्यात्मिक पक्ष भी पूर्णता की ओर बढ़ा. मंगलवार को पाट संक्रांति घट के साथ इस ऐतिहासिक पर्व का विधिवत समापन होगा. इस अवसर पर एडीसी कुमार जयवर्धन, एसडीओ अभिनव प्रकाश और कला केंद्र की निदेशक यशमिता सिंह सहित कई आला अधिकारी मौजूद थे.


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