पलामू के जीएलए कॉलेज में भू-दाता गणेश लाल अग्रवाल की प्रतिमा का सौंदर्यीकरण, अध्यापकों ने किया माल्यार्पण

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :13 Apr 2026 9:12 PM (IST)
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Palamu News

पलामू के जीएलए कॉलेज में गणेश लाल अग्रवाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद अध्यापकगण. फोटो: प्रभात खबर

Palamu News: पलामू के जीएलए कॉलेज में भू-दाता गणेश लाल अग्रवाल की प्रतिमा का सौंदर्यीकरण प्राचार्या डॉ. जसबीर बग्गा ने निजी खर्च से कराया. कार्यक्रम में शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों ने माल्यार्पण कर नमन किया. कॉलेज स्थापना में उनके योगदान को याद करते हुए उनकी विरासत को संजोने का संदेश दिया गया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Palamu News: पलामू के गणेश लाल अग्रवाल (जीएलए) कॉलेज परिसर में स्थापित भू-दाता स्वर्गीय गणेश लाल अग्रवाल की प्रतिमा का सौंदर्यीकरण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी गई. इस पहल को कॉलेज की प्राचार्या डॉ. जसबीर बग्गा ने अपने निजी खर्च से पूरा कराया, जो शिक्षा और संस्थान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है.

प्राचार्या की पहल बनी प्रेरणा

कॉलेज की प्राचार्या डॉ. जसबीर बग्गा ने प्रतिमा के जीर्णोद्धार का जिम्मा खुद उठाते हुए इसे नया स्वरूप दिया. वर्षों से रंग-रोगन के अभाव में प्रतिमा फीकी पड़ गई थी, जिससे उसकी भव्यता प्रभावित हो रही थी. सौंदर्यीकरण के बाद अब प्रतिमा पहले से अधिक आकर्षक और प्रेरणादायक दिख रही है. इस कार्य ने कॉलेज परिवार के बीच एक सकारात्मक संदेश भी दिया है कि अपने इतिहास और विरासत का सम्मान करना कितना जरूरी है.

माल्यार्पण कर दी गई श्रद्धांजलि

सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में कॉलेज के प्राचार्य, सभी विभागों के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और छात्र-छात्राओं ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर भू-दाता को नमन किया. इस दौरान पूरा परिसर श्रद्धा और सम्मान के भाव से सराबोर नजर आया. उपस्थित लोगों ने गणेश लाल अग्रवाल के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प भी लिया.

84 एकड़ भूमिदान से हुई थी कॉलेज की स्थापना

कार्यक्रम के दौरान डॉ. बग्गा ने कहा कि स्वर्गीय गणेश लाल अग्रवाल ने 15 अगस्त 1954 को 84 एकड़ भूमि दान कर इस महाविद्यालय की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उनकी दूरदर्शी सोच के कारण आज पलामू प्रमंडल के हजारों छात्र-छात्राएं उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश और राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं. उनका यह योगदान शिक्षा के क्षेत्र में अमूल्य और प्रेरणादायक माना जाता है.

शिक्षा जगत में अमूल्य योगदान

गणेश लाल अग्रवाल का नाम क्षेत्र में शिक्षा के अग्रदूत के रूप में लिया जाता है. उन्होंने न सिर्फ कॉलेज की नींव रखी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए शिक्षा के द्वार भी खोल दिए. आज भी उनके योगदान को सम्मान के साथ याद किया जाता है और उनकी प्रतिमा कॉलेज परिसर में प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है.

नियमित देखरेख की भी व्यवस्था

प्रतिमा के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ उसकी नियमित साफ-सफाई और देखरेख की जिम्मेदारी भी तय की गई है. महाविद्यालय प्रशासन ने कर्मी श्वेता को प्रतिमा की दैनिक सफाई का दायित्व सौंपा है, ताकि भविष्य में इसकी सुंदरता बनी रहे. यह कदम संस्थान की सजगता और जिम्मेदारी को दर्शाता है.

कार्यक्रम में कई गणमान्य रहे मौजूद

इस अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. ऋचा सिंह, डॉ. शैलेश मिश्रा, खुर्शीद आलम, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. विभा शंकर, डॉ. सुनीता सिंह, डॉ. कुंदन कुमार, डॉ. नीतू कुमारी, डॉ. लीना कुमारी, डॉ. संजय बाड़ा, डॉ. वीरेंद्र कुमार, डॉ. दीपक पंडित, आयना एमएस, विकास टोपनो, राजीव मुखर्जी, नवाज, बंशीधर गोप, विकास तिवारी, रंजन कुमार यादव, श्वेता कुमारी, अभिषेक कुमार, संजू और बाबू लाल सहित कई शिक्षक, कर्मचारी और विद्यार्थी मौजूद रहे.

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विरासत को संजोने का संदेश

यह आयोजन सिर्फ एक प्रतिमा के सौंदर्यीकरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को यह संदेश भी दिया कि अपने इतिहास और महान व्यक्तित्वों की विरासत को सहेजना हम सभी की जिम्मेदारी है. ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे और शिक्षा के महत्व को और मजबूत करेंगे.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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