उत्पादन बढ़ा पर नहीं सुधरी आर्थिक सेहत: HEC को इस साल 350 करोड़ का नुकसान, मशीनों की खराबी बनी बाधा

Published by :Sameer Oraon
Published at :13 Apr 2026 10:08 PM (IST)
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HEC Ranchi News

एचइसी रांची

HEC Ranchi News: रांची की एचइसी लिमिटेड में उत्पादन की रफ्तार तो बढ़ी है, लेकिन कंपनी की आर्थिक स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में 172 करोड़ का कुल उत्पादन होने के बावजूद कंपनी 350 करोड़ से अधिक के सालाना घाटे में है. पढ़ें एचइसी की ताजा हालत पर यह विशेष रिपोर्ट.

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रांची, (राजेश झा की रिपोर्ट): रांची के एचइसी में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान उत्पादन में सकारात्मक बढ़ोतरी दर्ज की गयी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एचइसी के तीनों प्लांटों ने मिलकर इस वर्ष करीब 57 करोड़ रुपये का उत्पादन किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के 39 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी बेहतर है. वहीं, यदि प्रोजेक्ट डिवीजन को भी जोड़ दिया जाए, तो एचइसी का कुल उत्पादन लगभग 172 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. हालांकि, उत्पादन में यह वृद्धि कंपनी की बिगड़ती आर्थिक सेहत को सुधारने के लिए नाकाफी साबित हो रही है.

घाटे का बोझ और वित्तीय संकट

उत्पादन में वृद्धि के सुखद संकेत के बावजूद एचइसी लगातार घाटे के दलदल में धंसता जा रहा है. मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में कंपनी को अब तक 350 करोड़ रुपये से अधिक का घाटा हो चुका है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि एचइसी का पिछले वर्षों का कुल घाटा अब 2500 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया है. पिछले सात वर्षों से लगातार घाटे में रहने के कारण कंपनी की कार्यशील पूंजी (Working Capital) पूरी तरह समाप्त हो चुकी है, जिससे इसकी वित्तीय स्थिति दिन-प्रतिदिन और अधिक कमजोर होती जा रही है.

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पुरानी मशीनें और गिरती साख

एचइसी की बदहाली का एक बड़ा कारण यहां की पुरानी मशीनों का बार-बार खराब होना भी है. मशीनों के लगातार ठप होने से वर्क ऑर्डर का समय पर निष्पादन नहीं हो पा रहा है, जिससे न केवल उत्पादन प्रभावित हो रहा है बल्कि बाजार में कंपनी की साख पर भी बुरा असर पड़ रहा है. पर्याप्त संसाधनों की कमी के चलते तैयार उत्पादों की बिक्री भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रही है. इस गंभीर वित्तीय संकट का सीधा असर औद्योगिक संबंधों पर भी पड़ा है, जिससे कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच चुनौतीपूर्ण स्थिति बनी हुई है.

भविष्य की बड़ी चुनौतियां

विशेषज्ञों का मानना है कि एचइसी को इस संकट से उबारने के लिए बड़े वित्तीय पैकेज और आधुनिक मशीनीकरण की तत्काल आवश्यकता है. बिना सरकारी सहयोग और संसाधनों के अभाव में केवल उत्पादन बढ़ाकर कंपनी को 2500 करोड़ रुपये के संचित घाटे से बाहर निकालना लगभग असंभव नजर आ रहा है. यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कंपनी का अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा.

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पिछले सात वर्षों से घाटे का आंकड़ा

  • 2018-19 में 93.67 करोड़
    2019-20 में 405.37 करोड़
  • 2020-21 में 175.78 करोड़
    2021-22 में 256.07 करोड़
  • 2022-23 में 230.85 करोड़
    2023-24 में 275.19 करोड़
  • 2024-25 में 226.99 करोड़
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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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