रांची के बड़गाईं जमीन मामले में सीएम हेमंत सोरेन को राहत, 14 आरोपियों पर आरोप तय

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन. फाइल फोटो
रांची की बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अहम फैसला आया है. विशेष अदालत ने 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी.
रांची से राजेश कुमार की रिपोर्ट
Bargain Land Scam: झारखंड की राजधानी रांची के चर्चित बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन फर्जीवाड़ा और मनी लाउंड्रिंग मामले में लगभग तीन वर्ष बाद पीएमएलए की विशेष अदालत से महत्वपूर्ण फैसला आया है. विशेष न्यायाधीश योगेश कुमार की अदालत ने गुरुवार को मामले के 17 आरोपियों में से 14 के खिलाफ आरोप गठित कर दिए. वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिनोद कुमार सिंह और राजकुमार पाहन के खिलाफ फिलहाल आरोप तय नहीं हो सके, क्योंकि उनकी ओर से समय की मांग की गई थी. अदालत ने इन तीनों के मामले की सुनवाई 11 अगस्त के लिए निर्धारित की है.
ईडी की जांच के बाद अदालत पहुंचा मामला
यह मामला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा 26 फरवरी 2023 को दर्ज ईसीआईआर संख्या 06/2023 से जुड़ा है. ईडी ने सदर थाना कांड संख्या 272/2023 तथा पहले से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर जांच शुरू की थी. लंबे समय तक चली जांच, पूछताछ और पूरक अभियोजन शिकायतें दाखिल किए जाने के बाद अब अदालत ने आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी की है. ईडी का दावा है कि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले में मनी लाउंड्रिंग और अवैध जमीन कारोबार के पर्याप्त प्रमाण मिले हैं.
गैर-हस्तांतरणीय जमीन की अवैध खरीद-बिक्री का आरोप
प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार सभी आरोपी एक संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे थे. जांच एजेंसी का आरोप है कि बरियातू-बड़गाईं क्षेत्र की गैर-हस्तांतरणीय भुईंहरी जमीन का अवैध तरीके से सौदा किया गया. इस दौरान फर्जी दस्तावेज तैयार कर करोड़ों रुपये के लेन-देन को अंजाम दिया गया. ईडी का कहना है कि जमीन की खरीद-बिक्री की पूरी प्रक्रिया में कई लोगों की भूमिका सामने आई है और आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सुनियोजित तरीके से कार्य किया गया.
डायरी, बैंक खाते और सीडीआर बने अहम साक्ष्य
जांच के दौरान ईडी ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाने का दावा किया है. एजेंसी के अनुसार छापेमारी के दौरान बरामद डायरियों से करोड़ों रुपये के नकद लेन-देन की जानकारी मिली. इसके अलावा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर), बैंक खातों के लेन-देन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच में आरोपियों के बीच आर्थिक संबंध और आपसी साठगांठ के संकेत मिले हैं. इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने अदालत में आरोप गठन की मांग की थी, जिसे अदालत ने 14 आरोपियों के संबंध में स्वीकार कर लिया.
इन 14 आरोपियों पर आरोप हुए गठित
विशेष अदालत ने पूर्व राजस्व उप निरीक्षक भानु प्रताप प्रसाद, तपस घोष, शेखर कुशवाहा, मोहम्मद सद्दाम हुसैन, आनंद तिर्की उर्फ अंतु तिर्की, अफसर अली, मोहम्मद इरशाद अख्तर, कुमार राजश्री, मनोज कुमार यादव, प्रिया रंजन सहाय, बिपिन सिंह, बिजेंद्र सिंह, संजीत कुमार और मोहम्मद इरशाद के खिलाफ आरोप गठित किए हैं.
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11 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बिनोद कुमार सिंह और राजकुमार पाहन की ओर से समय मांगे जाने के कारण उनके खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया फिलहाल स्थगित कर दी गई है. अदालत ने इस संबंध में अगली सुनवाई की तारीख 11 अगस्त तय की है. अब इस मामले की अगली न्यायिक कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह झारखंड के चर्चित जमीन फर्जीवाड़ा और मनी लाउंड्रिंग मामलों में से एक माना जाता है.
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लेखक के बारे में
By कुमार विश्वत सेन
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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