बर्थ-डेथ सर्टिफिकेट पर नबान्न का फरमान, जानें क्यों लिया फैसला, क्या होगा असर

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पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल.

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल.

Birth Death Certificate News West Bengal: पश्चिम बंगाल सरकार ने जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के नियमों में बदलाव कर दिया है. अब केवल अधिकृत सरकारी अधिकारी ही ये महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी कर सकेंगे. यह फैसला अनियमितताओं और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए लिया गया है.

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Birth Death Certificate News West Bengal: पश्चिम बंगाल में अब नगर निगम के मेयर, नगरपालिका के चेयरमैन व पंचायत प्रमुख जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं कर सकेंगे. राज्य सचिवालय नबान्न में मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने इसकी घोषणा की. उन्होंने कहा कि अब केवल अधिकृत सरकारी अधिकारी या पंजीकरण अधिकारी ही जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करेंगे. इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग जल्द ही राज्यभर के अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय करते हुए अधिसूचना जारी करेगा.

फैसला क्यों : अनियमितता और फर्जीवाड़ा पर रोक

मुख्य सचिव ने बताया कि यह फैसला जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में सामने आयी व्यापक अनियमितताओं और फर्जीवाड़े को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान सबसे अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र सामने आये. इसके बाद सरकार ने पूरी व्यवस्था में बदलाव का निर्णय लिया. मुख्य सचिव के संवाददाता सम्मेलन में स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम, डीजीपी सिद्धनाथ गुप्ता, गृह सचिव संघमित्रा घोष व कोलकाता पुलिस आयुक्त अजय नंद भी उपस्थित थे.

क्या होगा असर : डिजिटल, पारदर्शी होगी पूरी व्यवस्था

मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और पूरी तरह डिजिटल बनाना है. नयी व्यवस्था के तहत आवेदन, रिकॉर्ड सत्यापन और प्रमाण पत्र जारी करने की पूरी प्रक्रिया निर्धारित मानकों के अनुसार होगी, जिससे फर्जी दस्तावेज तैयार होने की संभावना काफी कम होगी. उन्होंने बताया कि जन्म, मृत्यु, संशोधित व विलंबित पंजीकरण जैसी सभी सेवाएं राज्य के डिजिटल पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध रहेंगी. इससे नागरिकों को तेज, पारदर्शी व सुविधाजनक सेवाएं मिलेंगी और प्रशासनिक जवाबदेही भी बढ़ेगी.

ये भी पढ़ें: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों में मनमाने बदलाव पर रोक का निर्देश

SIR में बड़े पैमाने पर मिले फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र

मुख्य सचिव ने कहा कि जन्म प्रमाण पत्र अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज है. चुनाव के बाद सरकार को इस संबंध में कई शिकायतें मिली थीं. एसआईआर प्रक्रिया के दौरान विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मिलने और उनके आधार पर लाभ उठाने के मामले सामने आये. पुलिस को भी इस संबंध में कई शिकायतें प्राप्त हुईं. उन्होंने कहा कि मौजूदा नियमों के बावजूद गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. अब यदि कोई अधिकारी गैरकानूनी तरीके से प्रमाण पत्र जारी करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी.

आगे क्या : 1997 से जारी सभी प्रमाण पत्रों का सत्यापन

मुख्य सचिव ने बताया कि राज्य सरकार वर्ष 1997 से अब तक जारी सभी जन्म व मृत्यु प्रमाण पत्रों का सत्यापन करेगी. इसका उद्देश्य एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार करना है, जिसे बाद में केंद्र सरकार के पोर्टल से जोड़ा जायेगा. इस प्रक्रिया के तहत घर-घर सर्वे भी कराया जायेगा. जिन लोगों के पास अब तक प्रमाण पत्र नहीं हैं, उन्हें निर्धारित सुनवाई प्रक्रिया के बाद प्रमाण पत्र जारी किये जायेंगे. जांच में फर्जी पाये जाने वाले सभी प्रमाण पत्र तत्काल रद्द कर दिये जायेंगे. इसे जारी करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.

नये नियमों में होंगे ये 5 बदलाव

  1. आवेदन पत्र में नाम का संक्षिप्त (शॉर्ट) रूप स्वीकार नहीं किया जायेगा.
  2. आवेदक को पूरा नाम व पूरा पता दर्ज करना अनिवार्य होगा.
  3. पता दर्ज करते समय राज्य/केंद्र शासित प्रदेश, जिला, शहर या गांव, वार्ड नंबर, मोहल्ला, मकान नंबर और पिन कोड देना होगा.
  4. मृत्यु प्रमाण पत्र के आवेदन में मृत्यु का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज करना होगा.
  5. बीमारी से मृत्यु होने की स्थिति में संबंधित मेडिकल हिस्ट्री भी प्रस्तुत करनी होगी.


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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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