गोपालगंज के किसानों के लिए खुशखबरी: 75% अनुदान पर मिलेगा नारियल का पौधा, पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर मिलेगा लाभ

Published by : Vivek Pandey Updated At : 13 Jun 2026 10:21 AM

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किसान को नारियल का पौधा देते उद्यान पदाधिकारी आकाश कुमार

Gopalganj News: गोपालगंज के किसानों के लिए नारियल पौधा वितरण योजना शुरू. 75% सरकारी अनुदान पर उन्नत पौधे मिलेंगे. बिहार कृषि ऐप से ऑनलाइन आवेदन कर किसान पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर योजना का लाभ उठा सकते हैं.

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Gopalganj News: (विकाश दुबे) गोपालगंज में खेती को लाभकारी बनाने और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार बागवानी फसलों को बढ़ावा दे रही है. इसी कड़ी में वर्ष 2026-27 के लिए नारियल पौधा वितरण योजना शुरू की गई है. योजना के तहत किसानों को उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण नारियल के पौधे 75 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराए जाएंगे. गोपालगंज जिले के लिए फिलहाल 1000 पौधों के वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. खास बात यह है कि योजना का लाभ पहले आओ-पहले पाओ के आधार पर दिया जाएगा. ऐसे में उद्यान विभाग ने इच्छुक किसानों से जल्द आवेदन करने की अपील की है.

जिला उद्यान पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया कि नारियल एक ऐसी बागवानी फसल है, जिससे किसानों को लंबे समय तक आर्थिक लाभ मिल सकता है. राज्य सरकार का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी आधारित खेती की ओर भी प्रेरित करना है, ताकि उनकी आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित हो सकें. उन्होंने कहा कि नारियल के पौधे नारियल विकास बोर्ड, बिहार, पटना द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे मिल सकें.

सरकार देगी 75 प्रतिशत अनुदान, किसानों को देना होगा मात्र 21.25 रुपये

योजना के तहत एक नारियल पौधे की कुल लागत 85 रुपये निर्धारित की गई है. इसमें 70 रुपये उत्पादन व्यय और 15 रुपये परिवहन व्यय शामिल है. इस राशि पर सरकार की ओर से 75 प्रतिशत यानी 63.75 रुपये का अनुदान दिया जाएगा. इसके बाद किसान को प्रति पौधा मात्र 21.25 रुपये का अंशदान देना होगा. कम लागत और अधिक अनुदान की वजह से यह योजना किसानों के लिए काफी लाभकारी मानी जा रही है. विभाग का मानना है कि इससे अधिक से अधिक किसान नारियल की खेती के प्रति आकर्षित होंगे और जिले में बागवानी फसलों का रकबा बढ़ेगा.

एक किसान को मिल सकते हैं अधिकतम 712 पौधे

योजना के तहत एक किसान को न्यूनतम पांच और अधिकतम 712 पौधे दिए जा सकते हैं. विभागीय मानक के अनुसार एक हेक्टेयर भूमि में 178 पौधों का रोपण किया जा सकता है. छोटे किसानों से लेकर बड़े स्तर पर बागवानी करने वाले किसान भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं. अधिकारियों ने बताया कि किसान अपने घर के आसपास की खाली जमीन, बाड़ी, किचेन गार्डन या खेत में नारियल के पौधे लगा सकते हैं. एक बार पौधे विकसित हो जाने के बाद लंबे समय तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय में स्थायी बढ़ोतरी की संभावना रहती है.

आवेदन के लिए किसान पंजीकरण और जमीन का दस्तावेज है जरूरी

योजना का लाभ लेने के लिए किसान का बिहार का निवासी होना अनिवार्य है. साथ ही किसान पंजीकरण (डीबीटी आईडी) होना भी जरूरी है. किसान के पास नारियल पौधारोपण के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध होनी चाहिए तथा भूमि की अद्यतन रसीद भी जमा करनी होगी. आवेदन के दौरान आधार कार्ड, किसान पंजीकरण संख्या, भूमि संबंधी दस्तावेज, बैंक पासबुक की प्रति और पासपोर्ट साइज फोटो की आवश्यकता होगी. दस्तावेजों की जांच के बाद पात्र किसानों को योजना का लाभ दिया जाएगा.

बिहार कृषि ऐप से होगा ऑनलाइन आवेदन

उद्यान विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के लिए आवेदन केवल बिहार कृषि ऐप के माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे. किसान अपने मोबाइल फोन से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन की स्वीकृति उपलब्ध लक्ष्य और निर्धारित मानकों के आधार पर की जाएगी. जिला उद्यान पदाधिकारी आकाश कुमार ने बताया कि जिले में पौधों की संख्या सीमित है. इसलिए पात्र किसान जल्द से जल्द आवेदन करें, ताकि उन्हें योजना का लाभ मिल सके. उन्होंने कहा कि योजना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए किसान अपने संबंधित प्रखंड के प्रखंड उद्यान पदाधिकारी से संपर्क कर सकते हैं.

किसानों की आय बढ़ाने और बागवानी को बढ़ावा देने की है पहल


विशेषज्ञों का मानना है कि नारियल एक बहुउपयोगी और बाजार में हमेशा मांग वाली फसल है. इसके फल के अलावा इसके कई अन्य उत्पाद भी आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में सरकार की यह पहल किसानों को पारंपरिक खेती के साथ-साथ बागवानी आधारित खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेगी. इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि जिले में बागवानी फसलों के विस्तार को भी नई गति मिलेगी. सीमित लक्ष्य और आकर्षक अनुदान को देखते हुए योजना को लेकर किसानों में भी उत्साह देखा जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By Vivek Pandey

विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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