अब ग्रामीण इलाकों में भी सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करना अनिवार्य

Published by : AmleshNandan Sinha Updated At : 14 May 2026 9:57 PM

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ठोस कचरा प्रबंधन AI Image

Ranchi News: रांची के ग्रामीण इलाकों में अब सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करना अनिवार्य होगा. प्रशासन ने स्वच्छता और बेहतर कचरा प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्था लागू की है. पूरी रिपोर्ट नीचे पढ़ें...

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बिपिन सिंह
Ranchi News: झारखंड में ठोस कचरा प्रबंधन नियम-2026 को लागू करने की तैयारी की जा रही है. भारत सरकार ने राज्यों को 1 अप्रैल से पूरे देश में इस व्यवस्था को लागू करने के लिए कहा था. इसके तहत कचरा प्रबंधन को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाना है. इसे ध्यान में रखते हुए पंचायतों की जवाबदेही तय करने के साथ ही पंचायत स्तर से कचरा जमा करने, उसका उठाव कर उसे सेग्रीगेशन प्लांट तक पहुंचाने की समुचित व्यवस्था विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है.

गुरुवार को हुई हाई लेवल मीटिंग

गुरुवार को विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में इसकी पहली बैठक हुई. डिटेल एसओपी तैयार करने के लिए यह हाई लेवल बैठक उनके कार्यालय कक्ष में आयोजित की गयी. बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबू इमरान, नगर विकास विभाग के सचिव सुनील कुमार, पर्यावरण विभाग के सचिव अबू बकर सिद्दीकी, झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी, पंचायती राज विभाग की निदेशक राजेश्वरी बी, नगर आयुक्त सुशांत गौरव तथा सूडा के निदेशक सूरज कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों के साथ ही राज्य के सभी जिलों के उपायुक्त भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े.

उपायुक्तों को सौंपी गयी पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी

राज्य भर में उपायुक्तों को पंचायत स्तर पर कचरा प्रबंधन को शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से लागू किया जाना है. इनके जिम्मे प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन की खोज, गारबेज डंप साइट की सफाई, खाली भूमि पर वृक्षारोपण कराने के साथ ही जिलों में इसकी व्यवस्था कायम करने के लिए भूमि उपलब्ध कराना है. प्रत्येक जिले में दो से तीन क्लस्टर विकसित करने की जायेगी, जहां वैज्ञानिक तरीके से कचरे की डंपिंग और प्रोसेसिंग की जा सकेगा.

हाइलाइट्स

  • डोर-टू-डोर कचरा उठाने के लिए थर्ड पार्टी एजेंसी.
  • गांव स्तर पर कचरा संग्रहण के लिए ट्राई-साइकिल के उपयोग.
  • एजेंसी को घरों से कचरा एकत्र कर उसे प्रोसेसिंग प्लांट तक पहुंचाने का जिम्मा.
  • 50 से 60 किलोमीटर के दायरे में सेंटर पॉइंट बनाकर कचरा प्रोसेसिंग की व्यवस्था.
  • घरों और परिसरों से सूखा-गीला कचरा प्रोसेसिंग का दायित्व जिला परिषद को देने की योजना.
  • विभिन्न प्रकार के कचरे को अलग-अलग रखने के लिए एक मानक डिजाइन वाला ई-रिक्शा जिसमें चार अलग-अलग डब्बे.

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अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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