बंगाल में खत्म होगा 70 साल पुराना ‘लैंड सीलिंग’ कानून? जानें शुभेंदु सरकार के बड़े दांव से क्या होगा बदलाव

Published by : Mithilesh Jha Updated At : 14 May 2026 9:40 PM

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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी.

BJP Govt Repealing Old Land Law: पश्चिम बंगाल सरकार राज्य में उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए लैंड सीलिंग एक्ट को खत्म करने या उसमें बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रही है. शुभेंदु सरकार का यह कदम बंगाल को फिर से औद्योगिक शक्ति बनाने की दिशा में एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है.

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BJP Govt Repealing Old Land Law: पश्चिम बंगाल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए एक ऐतिहासिक और साहसी फैसला लेने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार दशकों पुराने ‘लैंड सीलिंग’ (भूमि सीमा) कानून को खत्म करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. इस कानून के खत्म होने से राज्य में उद्योगों और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए बड़े पैमाने पर जमीन उपलब्ध हो सकेगी. माना जा रहा है कि यह कदम बंगाल को ‘इंडस्ट्रियल हब’ बनाने की दिशा में सबसे बड़ा ‘गेमचेंजर’ साबित होगा.

क्या है 1950 का कानून, जो बना है विकास में बाधा?

पश्चिम बंगाल में वर्तमान में ‘वेस्ट बंगाल लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1955’ प्रभावी है. इस कानून के तहत किसी भी व्यक्ति या संस्था के पास कृषि योग्य और गैर-कृषि जमीन रखने की एक निश्चित सीमा तय है. इस पुराने कानून की वजह से बड़ी कंपनियां बंगाल में आने से कतराती रही हैं, क्योंकि उन्हें फैक्ट्री लगाने के लिए जरूरी एकमुश्त जमीन नहीं मिल पाती.

औद्योगिक दौड़ में पिछड़ता गया बंगाल

वामपंथी और टीएमसी सरकारों ने वोट बैंक की राजनीति के कारण इस कानून को हाथ नहीं लगाया. इसकी वजह से बंगाल औद्योगिक दौड़ में पिछड़ता गया. भाजपा सरकार का मानना है कि जब तक लैंड सीलिंग एक्ट में बदलाव नहीं होगा, तब तक टाटा या रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियां राज्य में निवेश नहीं करेंगी.

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लैंड बैंक बनाने की तैयारी, बड़े पैमाने पर होगा निवेश

नबान्न (सचिवालय) में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई बैठकों में इस बात पर सहमति बनी है कि विकास के लिए पुराने नियमों की बलि देनी होगी. सरकार इस कानून की धारा 14Y में ढील दे सकती है, जिससे टाउनशिप, लॉजिस्टिक हब और भारी उद्योगों के लिए जमीन अधिग्रहण आसान हो जायेगा.

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सिलीगुड़ी, खड़गपुर और दुर्गापुर जैसे इलाकों में नयी औद्योगिक इकाइयां लगाने के लिए जमीन का ‘लॉक’ खोल दिया जायेगा. सरकार का तर्क है कि अगर जमीन मिलेगी, तभी उद्योग आयेंगे और तभी बंगाल के युवाओं को राज्य के भीतर नौकरियां मिलेंगी.

BJP Govt Repealing Old Land Law: विपक्ष की आशंका और सरकार का मास्टरस्ट्रोक

हालांकि, इस कानून को निरस्त करना इतना आसान नहीं होगा. विपक्षी दल इसे ‘किसानों के खिलाफ’ बताकर मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकते हैं. लेकिन शुभेंदु सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वे किसानों के हितों की रक्षा करते हुए केवल उन्हीं जमीनों को ‘अनलॉक’ करेंगे, जो औद्योगिक विकास के लिए चिह्नित की गयी हैं.

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मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 30 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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