विक्रम शर्मा हत्याकांड में 40 दिनों के बाद भी खाली हाथ दून पुलिस, 13 फरवरी को हुई थी हत्या

कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा.
Jamshedpur News: विक्रम शर्मा हत्याकांड में 40 दिन बाद भी देहरादून पुलिस शूटरों को पकड़ नहीं सकी है. 13 फरवरी को हुई हत्या के पीछे की साजिश अब तक साफ नहीं हो पाई है. छह आरोपियों पर इनाम घोषित है, जबकि कारोबारी जगत में भी उनके पैसों को लेकर चिंता बढ़ गई है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
Jamshedpur News: जमशेदपुर के गैंगस्टर अखिलेश सिंह के गुरु बताये जाने वाले विक्रम शर्मा की हत्या के 40 दिन गुजर चुके हैं. लेकिन, अबतक पुलिस शूटरों को गिरफ्तार नहीं कर सकी है. इससे देहरादून पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठने लगे हैं.
किसने कराई विक्रम शर्मा की हत्या
पुलिस अबतक इस बात का भी खुलासा नहीं कर सकी है कि विक्रम शर्मा की हत्या किसने और क्यों करायी थी? मालूम हो कि गत 13 फरवरी को देहरादून के सिल्वर सिटी मॉल परिसर में विक्रम शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
इन अपराधियों पर इनाम घोषित
देहरादून पुलिस की ओर से विक्रम शर्मा की हत्या में फरार आरोपी बागबेड़ा गाढ़ाबासा निवासी विशाल सिंह, जुगसलाई आरपी पटेल स्कूल रोड निवासी आशुतोष सिंह, बागबेड़ा बजरंग टेकरी रोड निवासी आकाश प्रसाद, बागबेड़ा गाढ़ाबासा निवासी यशराज सिंह, उलीडीह टैंक रोड निवासी जितेंद्र कुमार साहू और लोहरदगा टंगराटोली निवासी अंकित वर्मा के खिलाफ 50-50 हजार रुपये इनाम की घोषणा की गई है. सभी के खिलाफ कोर्ट से वारंट निर्गत है.
जमशेदपुर में डेरा डाले हुई है देहरादून पुलिस
जानकारी के अनुसार देहरादून पुलिस की एक टीम लगातार जमशेदपुर में रहकर आरोपियों की टोह लेने में जुटी है. लेकिन अबतक फरार आरोपियों का सुराग पुलिस को नहीं मिल सका है.
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कौन देखेगा विक्रम शर्मा का साम्राज्य?
जानकारी के अनुसार विक्रम शर्मा की हत्या के बाद इस बात को लेकर चर्चा है कि विक्रम शर्मा के साम्राज्य की देखभाल कौन करेगा. विक्रम शर्मा ने शहर के कई कारोबारी के साथ मिलकर कारोबार में पैसा फंसाया था. उनकी हत्या के बाद कारोबार और पैसे का हिसाब -किताब कौन लेगा? इसके अलावा, कई कारोबारी का पैसा विक्रम शर्मा के कारोबार में लगा था. अब वे सकते में हैं कि उनका पैसा वापस कैसे होगा? वैसे कारोबारी अपना दर्द किसे सुनाये ? इसे लेकर लोगों के बीच चर्चा का बाजार गरम है.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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