पलामू के हैदरनगर पहुंचते ही भाग जाते हैं भूत-प्रेत! देवी धाम में एक से बढ़कर एक चमत्कार

Updated at : 22 Mar 2026 5:11 PM (IST)
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Haidernagar Devi Dham

पलामू के हैदरनगर का देवी धाम. फोटो: प्रभात खबर

Haidernagar Devi Dham: पलामू के हैदरनगर देवी धाम में आस्था और चमत्कार की अनोखी मान्यता है. यहां भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति और मनोकामना पूर्ण होने का विश्वास है. नवरात्र में भव्य मेला लगता है. यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता और पर्यटन के रूप में भी खास पहचान बना चुका है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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पलामू से चंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

Haidernagar Devi Dham: झारखंड के पलामू जिले का हैदरनगर देवी धाम आज आस्था और विश्वास का बड़ा केंद्र बन चुका है. यहां चैत्र नवरात्र और शारदीय नवरात्र के दौरान आठ दिनों तक पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. देश के विभिन्न राज्यों से लोग यहां अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं और देवी मां के दरबार में मत्था टेकते हैं. इस धाम की खासियत यह है कि हैदरनगर में प्रवेश करते ही भूत-प्रेत की बाधाएं दूर भाग जाती हैं.

भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति की मान्यता

इस देवी धाम की सबसे खास पहचान यहां होने वाले चमत्कारों और मान्यताओं से जुड़ी है. लोगों का विश्वास है कि यहां पहुंचते ही भूत-प्रेत बाधा से पीड़ित लोगों को राहत मिलती है. इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु शारीरिक और मानसिक परेशानियों से मुक्ति पाने के लिए यहां आते हैं. मंदिर परिसर में हवन कुंड के पास ओझा-गुनी द्वारा झाड़-फूंक और अनुष्ठान किए जाते हैं, जहां कई लोग अपने कष्टों से मुक्ति पाने की उम्मीद में शामिल होते हैं.

देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु

हैदरनगर देवी धाम की लोकप्रियता अब अंतरराज्यीय स्तर पर फैल चुकी है. झारखंड के अलावा बिहार, छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. यह स्थल सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे यहां पहुंचना आसान हो गया है. मेला के दौरान ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं मिलती और सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी जाती हैं.

नवरात्र में लगता है भव्य मेला

चैत्र और शारदीय नवरात्र के समय यहां भव्य मेला लगता है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है. हालांकि कोरोना काल में दो वर्षों तक मेला आयोजित नहीं हो पाया था, लेकिन अब फिर से यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लौट आई है. मेला के दौरान पूजा-अर्चना के साथ-साथ विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जाते हैं.

झोपड़ी से भव्य मंदिर तक का सफर

मंदिर की शुरुआत एक साधारण झोपड़ी से हुई थी, जहां सात पिंडियों के रूप में माता की स्थापना की गई थी. समय के साथ यह स्थान एक भव्य मंदिर के रूप में विकसित हो गया. आज यहां काले पत्थर की मूर्तियां स्थापित हैं, जिन पर चांदी की परत चढ़ी हुई है और ऊपर चांदी की छतरी मंदिर की भव्यता को और बढ़ाती है.

इतिहास और संतों का योगदान

मंदिर के इतिहास की बात करें तो इसे हैदरनगर के कुंडल तिवारी के पूर्वजों ने सैकड़ों वर्ष पहले स्थापित किया था. प्रारंभिक दौर में अयोध्या से आए नागा बाबा ने यहां पूजा-अर्चना और मंदिर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. उनके बाद मुनि बाबा और वर्तमान में सुरेंद्र दास त्यागी इस मंदिर की पूजा व्यवस्था संभाल रहे हैं. मंदिर के विकास में श्रद्धालुओं के दान और प्रबंधन समिति के सहयोग का बड़ा योगदान रहा है.

धार्मिक एकता का अनूठा उदाहरण

हैदरनगर देवी धाम केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि धार्मिक एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है. मंदिर परिसर में स्थित पीपल का पेड़ और जीन बाबा का मजार यहां की खास पहचान है. श्रद्धालु मंदिर में पूजा के बाद जीन बाबा स्थान पर फतेहा करते हैं और फिर भाई बिगहा स्थित कर्बला भी जाते हैं. यह परंपरा यहां धार्मिक सौहार्द का संदेश देती है.

चीनी की मिठाई चढ़ाने की अनोखी परंपरा

इस मंदिर में प्रसाद के रूप में चीनी की मिठाई चढ़ाने की परंपरा बेहद खास है. इसे पूरी तरह शुद्ध माना जाता है और श्रद्धालु बड़ी श्रद्धा से इसे माता को अर्पित करते हैं. बताया जाता है कि बिहार के औरंगाबाद से आए एक हलवाई परिवार ने इस परंपरा को स्थापित किया, जो आज भी मेला में प्रमुख आकर्षण बनी हुई है.

पर्यटन स्थल के रूप में विकास

करीब दो साल पहले इस देवी धाम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है. यहां श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए सौंदर्यीकरण और अन्य विकास कार्य किए गए हैं. इससे न केवल धार्मिक महत्व बढ़ा है, बल्कि पर्यटन के रूप में भी यह स्थान पहचान बना रहा है.

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आस्था और विश्वास का अनोखा संगम

हैदरनगर देवी धाम आज आस्था, परंपरा और विश्वास का अनोखा संगम बन चुका है. जहां एक ओर लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं, वहीं दूसरी ओर यहां की मान्यताएं और अनुष्ठान इसे खास बनाते हैं. हर साल यहां लगने वाला मेला और श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि यह स्थान लोगों के दिलों में गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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