झारखंड हाईकोर्ट में झूठा शपथ पत्र देना पड़ा भारी: रांची के सुखदेव नगर जमीन विवाद में महादेव उरांव को अवमानना नोटिस

Published by :Sameer Oraon
Published at :08 May 2026 10:11 PM (IST)
विज्ञापन
Jharkhand High Court

झारखंड हाईकोर्ट की तस्वीर

Jharkhand High Court: रांची के सुखदेव नगर में आदिवासी जमीन पर दशकों से रह रहे परिवारों को बेदखल करने के मामले में हाईकोर्ट ने प्रार्थी महादेव उरांव को अवमानना नोटिस जारी किया है. कोर्ट ने पाया कि प्रार्थी ने जमीन के बदले पैसे लेने की बात छिपाई और झूठा शपथ पत्र दिया. अदालत ने पीड़ितों के मकान तोड़ने पर लगी रोक को अगले आदेश तक बढ़ा दिया है.

विज्ञापन

Jharkhand High Court, रांची, (राणा प्रताप की रिपोर्ट): झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी के सुखदेव नगर (रातू रोड) स्थित आदिवासी जमीन विवाद मामले में प्रार्थी महादेव उरांव के खिलाफ कड़ा संज्ञान लिया है. जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान पाया कि प्रार्थी ने अदालत से महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए और गलत जानकारी देकर गुमराह करने का प्रयास किया. इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने महादेव उरांव को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उनके खिलाफ आपराधिक कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए.

पैसों के लेन-देन की बात छिपाने पर कोर्ट सख्त

सुनवाई के दौरान अदालत ने प्रार्थी द्वारा दाखिल जवाब को अपर्याप्त और असंतोषजनक पाया. अदालत ने टिप्पणी की कि प्रार्थी ने हस्तक्षेपकर्ताओं (वहां रह रहे पीड़ितों) के साथ किए गए एग्रीमेंट और उनसे मोटी रकम लेने के तथ्य को शपथ पत्र में जानबूझकर छुपाया. पीड़ितों का दावा है कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये के हिसाब से कुल 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया है. प्रार्थी द्वारा इस लेन-देन को स्वीकार न करना अदालत की नजर में ‘सफेद झूठ’ और न्यायिक प्रक्रिया का अपमान माना गया है.

Also Read: विष्णुगढ़ बच्ची हत्या मामले में हाईकोर्ट में पेश हुई एफएसएल रिपोर्ट, 11 मई को अगली सुनवाई

पीड़ितों को मिली राहत, 19 जून तक रोक बरकरार

अदालत ने रातू रोड के खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित उन 12 घरों के निवासियों को बड़ी राहत दी है, जिन पर जिला प्रशासन ने बुलडोजर चलाने का आदेश दिया था. 13 फरवरी 2026 को दी गई अंतरिम राहत (पीड़क कार्रवाई पर रोक) को कोर्ट ने अगले आदेश तक के लिए बरकरार रखा है. मामले की अगली सुनवाई अब 19 जून को निर्धारित की गई है. पीड़ितों की ओर से अधिवक्ता गौरव राज ने मजबूती से पक्ष रखते हुए बताया कि वे लोग यहाँ पिछले 5-6 दशकों से रह रहे हैं.

प्रशासन की कार्यशैली पर भी उठे सवाल

इससे पूर्व की सुनवाई में हेहल अंचलाधिकारी (CO) के स्पष्टीकरण पर भी कोर्ट ने नाराजगी जताई थी. सीओ ने दलील दी थी कि दस्तावेज उपलब्ध न कराने के कारण मकान तोड़ने की कार्रवाई शुरू की गई थी. इस पर अदालत ने सवाल उठाया था कि यदि मामला केवल ‘कब्जा हटाने’ का था, तो प्रशासन ने बने हुए निर्माण को तोड़ने की पहल क्यों की.

क्या है पूरा मामला?

उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन ने 38.25 डिसमिल मुंडारी प्रकृति की जमीन से अतिक्रमण हटाने के नाम पर बुलडोजर की कार्रवाई शुरू की थी. स्थानीय निवासियों का पुरजोर विरोध था कि उन्होंने विधिवत भुगतान कर जमीन ली है और वे दशकों से वहां काबिज हैं. अब हाईकोर्ट की सख्ती के बाद इस मामले में धोखाधड़ी और प्रशासनिक जल्दबाजी के कोण से भी जांच की संभावना बढ़ गई है.

Also Read: ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल में बोले प्रभात खबर के प्रधान संपादक अंकित शुक्ला – संवाद का तरीका ही निर्णायक

विज्ञापन
Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola