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झारखंड में क्यों खतरे में है आदिवासी समाज? रघुवर दास ने बतायी वजह, पेसा कानून पर हेमंत सरकार को घेरा

Updated at : 30 May 2025 10:33 PM (IST)
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Raghubar Das in gumla

पत्रकारों को संबोधित करते रघुवर दास

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा कि घुसपैठियों के कारण आदिवासी समाज खतरे में है. हेमंत सोरेन सरकार को डर है कि कहीं उनकी सरकार ना गिर जाए. इसलिए राज्य सरकार पेसा कानून लागू नहीं कर रही है. गुमला सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता कर उन्होंने ये बातें कहीं.

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गुमला, दुर्जय पासवान-झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास शुक्रवार को गुमला पहुंचे. सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता कर राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर बरसे. उन्होंने कहा है कि हेमंत सोरेन सरकार पेसा कानून लागू करने से डर रही है. हेमंत सरकार को डर है कि कहीं उनकी सरकार ना गिर जाए, जबकि भाजपा शुरू से ही पेसा कानून लागू करने के पक्ष में रही है. उन्होंने कहा है कि घुसपैठियों और धर्मांतरण के कारण आज आदिवासी समाज खतरे में है. गुमला पहुंचने पर भाजपा नेताओं ने उनका भव्य स्वागत किया.

घुसपैठियों के कारण झारखंड की संस्कृति पर हमला हो रहा-रघुवर


झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि घुसपैठियों के कारण झारखंड की संस्कृति पर हमला हो रहा है. पूर्वजों की परंपरा, संस्कृति, वेशभूषा, रहन सहन को खत्म करने की योजना चल रही है. उन्होंने कहा है कि जब आदिवासी ही नहीं रहेंगे तो फिर पेसा कानून किसके लिए बनेगी. इसलिए झारखंड सरकार की जिम्मेवारी बनती है. पेसा कानून लागू करें. इसाई व इस्लाम से राज्य के आदिवासियों को जो खतरा है. उसे बचाये.

पेसा कानून लागू नहीं होने से 14 सौ करोड़ रुपये रुका-रघुवर दास


झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि पेसा कानून झारखंड राज्य व जनजाति समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है. पेसा कानून लागू नहीं होने के कारण भारत सरकार द्वारा 2024-2025 का 15वीं वित्त आयोग की जो 14 सौ करोड़ रुपये की राशि है. उसे केंद्र सरकार ने रोक दी है. जबतक पेसा कानून लागू नहीं होता. यह पैसा मिलना मुश्किल लग रहा है. इसलिए हेमंत सोरेन सरकार से अनुरोध है. पेसा कानून को लागू करें. ताकि हमारे जनजाति समुदाय के लोगों के विकास के लिए केंद्र सरकार से 14 सौ करोड़ रुपये मिल सके.

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Guru Swarup Mishra

लेखक के बारे में

By Guru Swarup Mishra

मैं गुरुस्वरूप मिश्रा. फिलवक्त डिजिटल मीडिया में कार्यरत. वर्ष 2008 से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पत्रकारिता की शुरुआत. आकाशवाणी रांची में आकस्मिक समाचार वाचक रहा. प्रिंट मीडिया (हिन्दुस्तान और पंचायतनामा) में फील्ड रिपोर्टिंग की. दैनिक भास्कर के लिए फ्रीलांसिंग. पत्रकारिता में डेढ़ दशक से अधिक का अनुभव. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एमए. 2020 और 2022 में लाडली मीडिया अवार्ड.

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