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East Singhbhum News : डुमकाकोचा में बेहोश मिले हाथी के बच्चे की मौत, मुंह में घाव के कारण कई दिनों से खा-पी नहीं रहा था, कमजोर हो गया था

Updated at : 07 Jan 2025 11:57 PM (IST)
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East Singhbhum News : डुमकाकोचा में बेहोश मिले हाथी के बच्चे की मौत, मुंह में घाव के कारण कई दिनों से खा-पी नहीं रहा था, कमजोर हो गया था

वन विभाग ने दो दिनों तक टाटा जू में बच्चे का इलाज किया, लेकिन नहीं बचा सका, रेंजर बोले, मुंह का घाव कैंसर सा प्रतीत हुआ, कमजोरी के कारण बेहोश हुआ था, सोमवार रात में तोड़ा दम, पोस्टमार्टम के बाद मंगलवार शाम को टाटा जू में दफनाया

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गालूडीह. गालूडीह थाना क्षेत्र की बाघुड़िया पंचायत स्थित डुमकाकोचा में बीते पांच जनवरी को बेहोश मिला हाथी के बच्चे की सोमवार की रात मौत हो गयी. हालांकि, वन विभाग की टीम जान जोखिम में डालकर बेहोश बच्चे को इलाज के लिए टाटा जू लाया था. यहां इलाज के दौरान हाथी के बच्चे ने दम दोड़ दिया. दरअसल, हाथी के बच्चे के मुंह में घाव था. वह कई दिनों से खा-पी नहीं पा रहा था. इस बीच नदी पार करने के दौरान ठंड लगने से बेहोश हो गया था. घाटशिला के रेंजर विमद कुमार ने बताया कि मंगलवार की सुबह से दोपहर तक टाटा जू में पोस्टमार्टम कराया गया. वहीं, शाम में टाटा जू में गड्ढा खोदकर दफनाया गया.

बिसरा यूपी के बरेली भेजा, मौत का असली कारण का पता चलेगा

घाटशिला के रेंजर विमद कुमार ने बताया कि हाथी के बच्चे के बिसरा को जांच के लिए उत्तर प्रदेश के बरेली भेजा गया है. जांच रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही कारणों की पुष्टि होगी. रेंजर ने बताया कि हाथी के बच्चे के मुंह में घाव था, जो कैंसर जैसा प्रतीत हो रहा था.

बेहोश बच्चे को हाथियों ने मिट्टी व पत्ता से ढंक दिया था

दूसरी ओर, बच्चे से दूर हुए हाथी कई दिनों से उग्र हैं. बंगाल सीमावर्ती इलाकों में उत्पात मचा रहे हैं. ग्रामीण कहते हैं कि पांच जनवरी को बेहोश बच्चे को दो हाथियों ने काफी देर तक कान और पूंछ हिलाया. नहीं उठने पर ऊपर मिट्टी और पत्ता डाल कर ढंक दिया. बच्चा हाथी का मुंह खुला था. शायद हाथियों ने अपने बच्चे को ठंड से बचाव के लिए उक्त तरीका अपनाया था.

जहां हाथी मरते हैं, वहां सप्ताह भर तक आता है झुंड

ग्रामीण कहते हैं कि अक्सर देखा जाता है कि जहां हाथी मरते हैं, वहां सप्ताह भर तक हाथियों का झुंड आता है. उक्त स्थल पर शोक मनाता है. इससे ग्रामीण डरे हुए हैं. डुमकाकोचा पुलिया के बगल में हाथी का बच्चा बेहोश पड़ा था. उक्त रास्ता गांव जाने का मुख्य मार्ग है. अगर हाथी आता रहा, तो आवागमन ठप हो जायेगा. यह मार्ग बंगाल जाने के मुख्य रास्ता है. हालांकि वन विभाग ने आस पास के गांवों के ग्रामीणों को अलर्ट कर दिया है.

घाटशिला वन क्षेत्र में अबतक हाथी के पांच बच्चों की हुई मौत

घाटशिला वन क्षेत्र में अबतक हाथी के पांच बच्चों की मौत हुई है. हाथी के बच्चों के लिए क्षेत्र अभिशाप साबित हो रहा है. माकुली जंगल के पास हाथी का एख बच्चा मारा गया था. इसके बाद झाटीझरना जंगल में जन्म के कुछ दिन बाद बच्चा मर गया. बुरुडीह के निकट पाना झरना पहाड़ पर एक बच्चे की मौत हो चुकी है. माकड़ा- कालापाथर के निकट ललमटिया पहाड़ के नीचे एक बच्चे का मौत हो चुकी है. अब डुमकाकोचा में बेहोश हाथी के बच्चे की मौत हो गयी है. ग्रामीण कहते हैं कि क्षेत्र में गर्मी में प्यास से तो जाड़े में ठंड से हाथी के बच्चे ज्यादा प्रभावित होते हैं.

साथी व बच्चे से बिछड़ा हाथी पहुंचा लेदा गांव, किसान के आंगन में घुसकर उत्पात मचाया

अपने साथी व बच्चे से बिछड़ा हाथी मंगलवार अहले सुबह घाटशिला रेंज के टिकरी होते हुए चाकुलिया रेंज की बांकी पंचायत स्थित लेदा गांव पहुंचा. हाथी ने गांव में बादल मुर्मू के घर में मकर पर्व के लिए हंडी और डेगची में उबाल कर रखे धान को खा लिया. अल्युमिनियम की डेगची को पांव से रौंद डाला. बादल मुर्मू ने बताया कि भोर 3 बजे हाथी आंगन में घुस गया. धान खा गया और बर्तन रौंद दिया. कितने का नुकसान हुआ, यह अभी नहीं बता सकते हैं. सुबह मुखिया फागू सोरेन उसके घर पहुंचे. उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि चाकुलिया रेंज के पदाधिकारी को लिखित दें.

बुरुडीह वन समिति अध्यक्ष जोसेफ मुर्मू ने बताया कि घाटशिला रेंज के टिकरी गांव के आसपास 6 जनवरी (सोमवार) की रात लगभग 8 से 9 बजे एक हाथी को देखा गया. देर रात में हाथी किधर गया, इसकी जानकारी नहीं मिली. हाथी चाकुलिया रेंज में प्रवेश कर गया. वन विभाग के पदाधिकारी हाथी पर नजर रखे हुए हैं.

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