कांकु में प्रस्तावित पत्थर खदान के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, डीसी कार्यालय पर प्रदर्शन

Published by : ATUL PATHAK Updated At : 13 Jun 2026 12:17 AM

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ग्रामसभा ने सर्वसम्मति से किया खनन परियोजना का विरोध

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पटमदा.

पटमदा प्रखंड की ओड़िया पंचायत अंतर्गत कांकु गांव में प्रस्तावित पत्थर खदान के खिलाफ ग्रामीणों ने पूरी तरह से मोर्चा खोल दिया है. कांकु गांव के सैकड़ों महिला व पुरुषों ने शुक्रवार को ग्राम प्रधान के नेतृत्व में जमशेदपुर स्थित उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर इस खनन परियोजना की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की गुहार लगायी है.

5.90 एकड़ भूमि पर खदान की तैयारी, ग्रामसभा ने कहा- किसी कीमत पर नहीं होने देंगे खनन

उपायुक्त को दिये आवेदन में ग्रामीणों ने बताया कि मौजा कांकु में करीब 5.90 एकड़ भूमि पर पत्थर खदान स्थापित करने की प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है. चूंकि कांकु गांव अनुसूचित क्षेत्र (शेड्यूल एरिया) के अंतर्गत आता है, जहां नियमों के तहत ग्राम सभा की सहमति और निर्णय का विशेष संवैधानिक महत्व है. ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि विगत दिनों आयोजित ग्रामसभा में पूरे गांव ने सर्वसम्मति से इस खनन परियोजना का पुरजोर विरोध किया है और जनहित, पर्यावरण संरक्षण व सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी परिस्थिति में खदान स्थापित नहीं होने देने का संकल्प लिया है.

प्रस्तावित स्थल के पास है अंतरराष्ट्रीय बागीचा और आंगनबाड़ी केंद्र

ग्रामीणों ने खदान से होने वाले गंभीर नुकसानों को रेखांकित करते हुए बताया कि जहां पत्थर खदान का प्रस्ताव है, उसके ठीक पास कई महत्वपूर्ण स्थल हैं. वर्ष 2023 में स्थापित अंतरराष्ट्रीय बागीचा और ग्रामीणों की आस्था का केंद्र ””जाहेरथान”” (धार्मिक स्थल) खदान स्थल के बिल्कुल नजदीक है. पास में ही आंगनबाड़ी केंद्र संचालित है और ग्रामीणों के आवासीय घर भी स्थित हैं.

धूलकण, प्रदूषण और ब्लास्टिंग से मंडराया खतरा

ग्रामीणों ने आशंका जतायी है कि यदि खदान का संचालन शुरू होता है, तो वहां होने वाले भारी विस्फोटों (ब्लास्टिंग), उड़ने वाले धूलकण और वायु-ध्वनि प्रदूषण से बच्चों, महिलाओं तथा बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा. इसके साथ ही पूरे क्षेत्र का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ेगा और प्राकृतिक जल व वन संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचेगा. ग्रामीणों ने उपायुक्त से मांग की है कि जनहित को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्तावित पत्थर खदान की स्वीकृति प्रक्रिया को तुरंत रद्द किया जाए और आगे की सभी प्रशासनिक कार्रवाइयों को स्थगित किया जाए. इस आवेदन की प्रतिलिपि जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ), एसडीओ, बीडीओ, सीओ को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गयी है. इस मौके पर मुख्य रूप से ग्राम प्रधान चूनाराम मुर्मू, श्यामसुंदर बेसरा, सोमनाथ मुर्मू, गुरुपद मुर्मू, सागुन बेसरा, जगदीश मुर्मू, परमेश्वर मुर्मू, सुब्रत महतो, फणि महतो, मृत्युंजय महतो, राम प्रसाद महतो और राजेश कुंभकार सहित भारी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे.

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