मधुपुर: चेचाली-बुढ़ैई जंगल में लौटी वन्य जीवों की रौनक, दिखे हिरण-मोर
Published by : BALRAM Updated At : 12 Jun 2026 8:32 PM
चेचाली-बुढ़ैई जंगल में लौटी वन्य जीवों की चहलकदमी
मधुपुर. प्रखंड के चेचाली व बुढ़ैई गांव के जंगल में लंबे अंतराल के बाद एक साथ विभिन्न प्रजाति के वन्य जीवों की मौजूदगी दर्ज की गयी है. इन जंगलों में हिरण, मोर, नीलगाय, जंगली सुअर, साही, हनुमान, बंदर, लोमड़ी, नेवला, अजगर व खरगोश आदि वन्य जीव शामिल हैं. बुढ़ैई जंगल में भी पिछले दिन हिरण नजर आया था. इधर खाना व पानी की तलाश में गांव की तरफ भटक कर पहुंचे एक हिरण को ग्रामीणों ने पकड़ लिया था, जिसे सुरक्षित वन में छोड़ दिया गया. साथ ही जंगल में मोर भी नजर आया है. तीन दिन पूर्व भी बुढ़ैई जंगल में हिरण का झुंड देखा गया था. चेचाली जंगल के संबंध में बताया जाता है कि 1980 के दशक में समाजकर्मी विनय चंद्र सिंह, अरविंद कुमार, घनश्याम, झरी सिंह समेत सैकड़ों ग्रामीणों ने सरकार द्वारा बीट नीलामी के बाद जोरदार आंदोलन कर जंगल को बचाया था. ग्रामीणों के अनुसार पिछले कई वर्षों से फिर जंगल में लगातार पेड़ों की अवैध कटाई हो रही थी. इसके खिलाफ गांव के कुछ जागरूक युवाओं ने लकड़ी माफियाओं से मोर्चा लिया. पेड़ कटाई रोकने और जंगल को बचाने के लिए वे हर हफ्ते गिरोह से भिड़ते रहे. ग्रामीणों का कहना है कि इसी का नतीजा है कि अब जंगल फिर से आबाद होने लगा है और वन्य जीव लौट आये हैं. चेचाली व आसपास के ग्रामीण एतवारी सिंह और शिवलाल किस्कू ने बताया कि वे लोग हर हफ्ते आरा-कुल्हाड़ी लेकर आने वाले गिरोह से लड़ते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि जंगल ही उन्हें हवा, पानी और बारिश देता है. उनका मानना है कि यदि पेड़ कट गए तो खेत सूख जायेंगे. अब जब मोर, हिरण और साही जैसे वन्य जीव फिर से दिखाई देने लगे हैं तो उन्हें लगता है कि उनकी मेहनत सफल हुई है. बताते चलें कि जंगल में दिखने वाले मोर, साही और हिरण वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल हैं. इनका शिकार करना या इन्हें नुकसान पहुंचाना गैरकानूनी है. दोषी पाए जाने पर 3 से 7 वर्ष तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है. ग्रामीणों ने वन विभाग से चेचाली जंगल में गश्ती बढ़ाने की मांग की है. उनका कहना है कि अभी भी रात के अंधेरे में पेड़ काटे जा रहे हैं. यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो वन्य जीव फिर से पलायन कर जायेंगे. ग्राम पंचायत में जल्द ही बैठक बुलाकर जंगल कटाई पर रोक लगाने और दोषियों पर 5000 रुपये जुर्माना लगाने का प्रस्ताव लाया जाएगा. — मोर, हिरण व नीलगाय से लेकर विभिन्न प्रजाति के वन्य जीवों ने बनाया बसेरा ग्रामीणों की पहल से फिर आबाद हो रहा वन अवैध कटाई पर अंकुश का नतीजा, जंगल में फिर गूंजने लगी वन्य जीवन की आहट
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