हर वर्ष स्कूल फीस में होता है 15-20 प्रतिशत का इजाफा
Updated at : 16 May 2019 1:00 AM (IST)
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चतरा : जिले के निजी स्कूलों की मनमानी के कारण अभिभावक परेशान हैं. बच्चों का भविष्य बनाने के लिए लोग स्कूल प्रबंधन की मनमानी सहने को मजबूर हैं. निजी स्कूल संचालक प्रति वर्ष 15 से 20 प्रतिशत फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिसके कारण लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. अभिभावकों द्वारा […]
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चतरा : जिले के निजी स्कूलों की मनमानी के कारण अभिभावक परेशान हैं. बच्चों का भविष्य बनाने के लिए लोग स्कूल प्रबंधन की मनमानी सहने को मजबूर हैं. निजी स्कूल संचालक प्रति वर्ष 15 से 20 प्रतिशत फीस में बढ़ोतरी कर रहे हैं, जिसके कारण लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. अभिभावकों द्वारा इसका विरोध करने पर स्कूल से बच्चों को निकाल देने की धमकी दी जाती है.
यही वजह है कि गरीब परिवार अपने बच्चों को निजी स्कूल में नहीं पढ़ा पाते हैं. कई स्कूलों में मासिक फीस के अलावे री-एडमिशन के नाम पर मोटी राशि वसूली जाती है.वहीं कुछ स्कूल री-एडमिशन की जगह विद्यालय विकास, कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लासेस, एनुअल चार्ज, आई कार्ड, डायरी समेत अन्य विकास कार्य के नाम पर पैसों की वसूली की जाती है.
मध्यम वर्ग के लोगों को समय पर फीस जमा करने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. जिला अभिभावक संघ ने पूर्व में कई बार डीसी से इसपर रोक लगाने की मांग कर चुके हैं, इसके बावजूद निजी विद्यालय के प्रबंधकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता हैं. जिले में बिना निबंधन के दर्जनों विद्यालय संचालित हैं. पदाधिकारियों द्वारा नियमित रूप से इन विद्यालयों की जांच नहीं की जाती है, जिसके कारण उनका मनोबल दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है.
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