चंदनकियारी के बेटी ने गढ़ दिया मिसाल, बबीता हेम्ब्रम को मिलेगा बिस्मिलाह खां युवा पुरस्कार 

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चंदनकियारी की बबीता हेंब्रम. फोटो: प्रभात खबर

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Bokaro News: बोकारो के चंदनकियारी प्रखंड की लोक कलाकार बबीता हेम्ब्रम का चयन संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए हुआ है. संथाली लोकनृत्य और लोकसंगीत के संरक्षण में उनके योगदान से झारखंड और आदिवासी समाज को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चंदनकियारी से दीपेंद्र ठाकुर की रिपोर्ट

Bokaro News: झारखंड और विशेष रूप से जनजातीय समाज के लिए गर्व की बात है कि बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड अंतर्गत संथाल लाघला गांव की प्रतिभाशाली लोक कलाकार बबीता हेम्ब्रम का चयन प्रतिष्ठित बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए किया गया है. यह सम्मान संगीत नाटक अकादमी, नई दिल्ली की ओर से प्रदान किया जाता है.

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संथाली लोककला को पहचान दिलाने में अहम भूमिका

बबीता हेम्ब्रम ने संथाली लोकनृत्य और लोकसंगीत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. अपनी निरंतर साधना और समर्पण के बल पर उन्होंने न केवल झारखंड, बल्कि पूरे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है. उनकी उपलब्धि को संथाली लोककला और परंपराओं के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

चंदनकियारी को मिला दूसरा राष्ट्रीय सम्मान

बबीता हेम्ब्रम के चयन के साथ ही चंदनकियारी प्रखंड के नाम एक और राष्ट्रीय उपलब्धि जुड़ गई है. यह क्षेत्र के लिए दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार माना जा रहा है. इस उपलब्धि से स्थानीय कलाकारों और सांस्कृतिक संस्थाओं में खुशी का माहौल है. लोगों का मानना है कि इससे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी तथा लोककलाओं को नई ऊर्जा मिलेगी.

डॉ संजय की अनुशंसा पर हुआ चयन

छऊ केंद्र, चंदनकियारी के समन्वयक डॉ. संजय ने बबीता हेम्ब्रम की प्रतिभा और उनके सांस्कृतिक योगदान को देखते हुए उनके नाम की अनुशंसा की थी. उनके प्रयासों और बबीता की कला साधना को देखते हुए संगीत नाटक अकादमी ने उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना. डॉ संजय ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे झारखंड और विशेष रूप से संथाल समुदाय के लिए गौरव का विषय है.

कलाकारों और सांस्कृतिक प्रेमियों में खुशी

बबीता हेम्ब्रम के चयन की खबर मिलते ही क्षेत्र के कलाकारों, सांस्कृतिक प्रेमियों और समाज के विभिन्न वर्गों में हर्ष का वातावरण है. लोगों ने इसे झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है. कई जनप्रतिनिधियों, सांस्कृतिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों ने उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दी हैं.

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युवा कलाकारों के लिए बनेगी प्रेरणा

बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए चयनित होने के बाद बबीता हेम्ब्रम युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं. उनकी सफलता यह दर्शाती है कि लोककला और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण के माध्यम से भी राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है. आखिर आधुनिकता की तेज दौड़ में जहां कई लोग अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भूलने में व्यस्त हैं, वहीं बबीता हेम्ब्रम जैसी कलाकार यह याद दिलाती हैं कि विरासत केवल संग्रहालयों में नहीं, बल्कि जीवित परंपराओं और उन्हें सहेजने वाले लोगों में बसती है.

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