उपचार के नाम मौत बांट रहे फरजी चिकित्सक
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 26 Apr 2016 4:39 AM
सुपौल : जिले के वीरपुर अनुमंडल मुख्यालय में रविवार को एक फरजी चिकित्सक के गिरफ्तार होने से स्वास्थ्य महकमा के प्रति आम लोगों का विश्वास बढ़ा है. वहीं इस फरजी चिकित्सक के गिरफ्तारी के बाद जिला मुख्यालय सहित अन्य इलाकों में फरजी डिग्री का बोर्ड लगा कर धड़ल्ले से अपनी दुकानदारी चला रहे चिकित्सकों के […]
सुपौल : जिले के वीरपुर अनुमंडल मुख्यालय में रविवार को एक फरजी चिकित्सक के गिरफ्तार होने से स्वास्थ्य महकमा के प्रति आम लोगों का विश्वास बढ़ा है. वहीं इस फरजी चिकित्सक के गिरफ्तारी के बाद जिला मुख्यालय सहित अन्य इलाकों में फरजी डिग्री का बोर्ड लगा कर धड़ल्ले से अपनी दुकानदारी चला रहे चिकित्सकों के बीच दहशत व्याप्त है. रविवार को वीरपुर में हुई इस कार्रवाई की खबर जंगल में आग की तरह जिला मुख्यालय तक फैल चुकी थी.
अफवाह यह था कि पटना से पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम फरजी चिकित्सकों के क्लिनिक पर छापेमारी कर रही है. इस अफवाह का असर कुछ ऐसा हुआ कि जिला मुख्यालय में संचालित कई फरजी चिकित्सकों के अवैध नर्सिंग होम के बाहर ताला लटका पड़ा था. कई क्लिनिक के आगे लगाये गये बोर्ड को आनन फानन में उतार कर रख दिया. हालांकि कुछ देर बाद स्थिति स्पष्ट होने पर फिर सभी नर्सिंग होम में पुन: मरीजों की लंबी कतार लगने लगी.
महज कुछ पल पूर्व हटाये गये बोर्ड नर्सिंग होम के ऊपर फिर से चमकने लगे. ज्ञात हो कि जिला मुख्यालय में इन दिनों दर्जनों फरजी चिकित्सक गलत डिग्री का बोर्ड लटका कर खुलेआम मरीजों का उपचार के नाम पर शोषण कर रहे हैं. स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी कहे या फिर लापरवाही. इन चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है. ऐसा नहीं कि इन फरजी चिकित्सकों के उपचार से पीड़ित किसी ने शिकायत नहीं किया हो. कई बार शिकायत होने के बावजूद विभागीय मिली भगत के कारण उक्त फरजी चिकिसत्कों पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी हैं.
सिर्फ इलाज नहीं करते हैं ऑपरेशन भी : प्रशासनिक उदासीनता के कारण जिला मुख्यालय में संचालित दर्जन भर फरजी नर्सिंग होम के कारण मरीजों की जान आफत में फंस रही है. जिला मुख्यालय में संचालित फरजी चिकित्सकों की क्लिनिकों में सिर्फ उपचार ही नहीं तरह – तरह की बीमारियों का ऑपरेशन भी किया जाता है. शहर के उत्तरी व दक्षिणी छोड़ पर स्थित दो फरजी हड्डी चिकित्सक तो अब पैर हाथ का ऑपरेशन कर स्टील रड भी लगाने लगे हैं. इन दोनों चिकित्सकों की मेहरबानी से सैकड़ों मरीज अपने टेढ़े हो चुके हाथ पैर का उपचार करवाने के लिए पटना व दिल्ली का रुख करने को विवश हो रहे हैं. इसी तर्ज पर अन्य फरजी चिकित्सक भी अपना – अपना क्लिनिक खोल कर मरीजों का शारीरिक, आर्थिक व मानसिक शोषण कर रहे हैं.
बोर्ड किसी और के नाम का- उपचार करते कोई और : फरजी चिकित्सकों ने स्वास्थ्य विभाग की मिली भगत से मरीजों को लूटने का नया फंडा इजात किया है. शहर के कई फरजी चिकित्सक के क्लिनिक के बाहर लगे बोर्ड पर ऐसे चिकित्सकों का नाम अंकित है. जो पिपरा, छातापुर या किसी अन्य प्रखंड के पीचएसी में कार्यरत हैं. लेकिन क्लिनिक में आने वाले मरीजों का इलाज बिना लाइसेंस धारी डॉक्टरों द्वारा किया जाता है. वहीं संबंधित डॉक्टर के नाम का बोर्ड लगाने के एवज में फरजी चिकित्सक नामित डाॅक्टरों को प्रतिमाह एक तय राशि का भुगतान करते हैं. शहर के लोहिया चौक स्थित एक हड्डी जोड़ चिकित्सक के क्लिनिक में यह खेल खुलेआम चल रहा है.
बिना रोकटोक खुलेआम किया जा रहा उपचार : जिला मुख्यालय में फरजी चिकित्सकों की मनमानी स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है. फरजी चिकित्सक जो कुछ वर्ष पहले तक शहर के किसी चिकित्सक के यहां मिश्रक का कार्य करते थे. अब वे अपने नाम के पीछे डॉक्टर व सर्जन का लेवल लगाकर खुलेआम मरीजों के जान के साथ खिलबाड़ कर रहे हैं. विगत दो वर्ष पूर्व तक गांधी मैदान के सामने होम्योपैथिक का क्लिनिक चला रहे थे. आज वे शहर के हृदय स्थल पर अपना निजी क्लिनिक खोल कर सर्जन का बोर्ड लगा कर बैठे हुए हैं. इनके क्लिनिक में सभी बीमारियों का ऑपरेशन होता है.
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