वट सावित्री पूजा को लेकर बाजार में बढ़ी रौनक
Published by : RAJEEV KUMAR JHA Updated At : 14 May 2026 6:36 PM
श्री आचार्य ने कहा कि इस बार शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने से शनि अमावस्या का संयोग बन रहा है
फोटो – 15 कैप्सन- बैना की खरीददारी करती महिला प्रतापगंज वट सावित्री व्रत को लेकर बाजार में रौनक देखने को मिल रहा है. व्रती फल, मिठाई, कपड़ा, लहठी सहित पूजा के लिए खरीदारी में लगे हुए हैं. पंडित धर्मेंद्र आचार्य ने बताया कि वट सावित्री व्रत 16 मई शनिवार को अमावस्या के दिन सुबह 5:11 बजे शुरू होकर 17 मई रात 1:30 बजे तक है. जबकि पूजा का शुभ समय 16 मई को सुबह 7:12 से 8:24 तक एवं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:50 से दोपहर 12:45 तक रहेगा. श्री आचार्य ने कहा कि इस बार शनिवार के दिन अमावस्या पड़ने से शनि अमावस्या का संयोग बन रहा है, जो बहुत शुभ माना जाता है. साथ ही शनि जयंती भी है. पंडित श्री आचार्य के अनुसार अखंड सौभाग्य सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए ये व्रत रखती हैं. कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और पतिव्रत धर्म से यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लिए थे. तभी से ये व्रत अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने बताया कि बरगद के पेड़ की जड़ में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में शिव का वास माना जाता है. सावित्री ने इसी पेड़ के नीचे सत्यवान को पुनर्जीवित कराया था. बताया कि उस दिन सुबह स्नान करके शृंगार करें, लाल या पीले वस्त्र पहनें, काले कपड़े न पहनें. बरगद के पेड़ के पास जाकर जल, कच्चा दूध, रोली, चावल, फूल, फल, मिठाई चढ़ाएं. कच्चे सूत को वट वृक्ष के तने पर 7 या 11 बार लपेटते हुए परिक्रमा करें. कम से कम 7 परिक्रमा करें. इसके साथ ही सावित्री- सत्यवान की कथा सुनें या पढ़ें. पूजा के बाद सास या किसी वरिष्ठ सुहागिन को सुहाग सामग्री, वस्त्र, फल, बायना देकर आशीर्वाद लें. कई महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, लेकिन सेहत के अनुसार ही व्रत रखें.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










