इनसान को दर्शन समझने की है आवश्यकता
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Apr 2016 3:29 AM
सुपौल : भक्ति आंदोलन के दरम्यान श्रम की प्रतिष्ठा सबसे ज्यादा बढ़ी थी. जिस इनसान में सत्य ,अहिंसा, करुणा, दया, प्यार व मोहब्बत में से कोई एक भी गुण नहीं हैं, तो उसे नैतिकता के आधार पर धार्मिक कहलाने का कोई हक नहीं हैं. आज इनसान को दर्शन को समझने की आवश्कता है. साथ ही […]
सुपौल : भक्ति आंदोलन के दरम्यान श्रम की प्रतिष्ठा सबसे ज्यादा बढ़ी थी. जिस इनसान में सत्य ,अहिंसा, करुणा, दया, प्यार व मोहब्बत में से कोई एक भी गुण नहीं हैं, तो उसे नैतिकता के आधार पर धार्मिक कहलाने का कोई हक नहीं हैं. आज इनसान को दर्शन को समझने की आवश्कता है. साथ ही धार्मिक संदेश को अपने अंदर पिरोने की दरकार है. कर्म से ही भाग्य का निर्माण होता है. भाग्य से कर्म नहीं बनता. इनसान अपना भाग्य स्वयं बना सकता है.
उक्त बातें लोहिया यूथ ब्रिगेड के प्रदेश संयोजक डाॅ अमन कुमार के अध्यक्षता में चौघारा में आयोजित कोसी प्रमंडलीय भगैत महासम्मेलन सह विष्णु यज्ञ का विधिवत उद्घाटन करते भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव ने कही
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