अनदेखी. नहीं कराया जा रहा मरम्मत का कार्य

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 18 Apr 2016 3:28 AM

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पुल का दक्षिणी हिस्सा जर्जर सरकार द्वारा क्षेत्र के विकास को लेकर कई योजनाएं संचालित करायी जा रही है. लेकिन समुचित तरीके से रख रखाव व मरम्मती कार्य को नजरअंदाज किये जाने से लोगों को भारी परेशानी हो रही है. इस पथ से आवागमन करने वाले लोग जान को हथेली पर रख यात्रा कर रहे […]

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पुल का दक्षिणी हिस्सा जर्जर

सरकार द्वारा क्षेत्र के विकास को लेकर कई योजनाएं संचालित करायी जा रही है. लेकिन समुचित तरीके से रख रखाव व मरम्मती कार्य को नजरअंदाज किये जाने से लोगों को भारी परेशानी हो रही है. इस पथ से आवागमन करने वाले लोग जान को हथेली पर रख यात्रा कर रहे हैं.

कुनौली : सरकार द्वारा क्षेत्र के विकास को लेकर कई योजनाएं संचालित करायी जा रही है. साथ ही संबंधित विभाग द्वारा योजनाओं के मद से कराये गये निर्माण कार्य के समुचित तरीके से रख रखाव व मरम्मती कार्य को नजरअंदाज किये जाने से लोगों को भारी परेशानी हो रही है. इसका जीता जागता एक उदाहरण निर्मली अनुमंडल से 32 किलोमीटर की दूरी पर बसे सीमावर्ती क्षेत्र कुनौली – कमलपुर पथ बयां कर रहा है.

ज्ञात हो कि यह मार्ग सीधे इंडो – नेपाल के मार्ग को जोड़ती है. कुनौली बाजार के शीतल चौक के समीप बना लोहे पुल के दक्षिणी हिस्सा काफी जर्जर हो चुका है. खारो नदी के ऊपर बना इस पुल का सड़क मार्ग से संपर्क बिल्कुल टुटता जा रहा है. यहां तक कि इस पथ से आवागमन करने वाले लोग जान को हथेली पर रख पारगमन कर रहे हैं. बावजूद इसके संबंधित विभाग द्वारा किसी प्रकार का पहल नहीं किया जा रहा है.

जर्जर पथ पर हो रहा वाहनों का परिचालन : गौरतलब हो कि कुछ समय पश्चात मानसून का समय आने ही वाला है. मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से अधिक बारिश होने का भी अनुमान लगाया जा रहा है. अधिक बारिश होने के साथ ही खारो नदी में पानी का बहाव काफी तेज हो जायेगा.

वर्तमान स्थिति यह है कि इस पुल के दक्षिणी हिस्से में सड़क के किनारे फ्लेंक नहीं है. जिस कारण सड़क की स्थिति काफी जर्जर है. उक्त पथ काफी खराब रहने के साथ ही पुल व सड़क के बीच का ढलान तकरीबन दस फीट का बना है. जहां कभी भी एक बड़ी दुर्घटना घटित होने की आशंका बनी रहती है. बावजूद इसके इस मार्ग में दैनिकी छोटे बड़े सैकड़ों वाहनों का परिचालन हो रहा है.

ग्रामीणों को सता रहा खतरे की आशंका : स्थानीय ग्रामीण गुलाब, सत्य नारायण रजक, गणेश साफी, जयनाथ, दुर्गा सिंह ,किशोर, सुमित झा, राघव झा, राम सेवक कामत, डॉ विशुनदेव, दिनेश कुमार, संतोष कुमार सहित अन्य ने बताया कि कुछ वर्ष पूर्व ही लाखों की लागत से इस सड़क का निर्माण कार्य पूर्ण कराया गया. लेकिन समय समय पर मरम्मती का कार्य नहीं कराये जाने से सड़क टूटता गया. साथ ही सड़क पर अधिक दबाव होने के कारण पुल व सड़क के बीच गहरा ढलान हो चुका है. जिस कारण खतरे की आशंका बनी हुई है.

बताया कि इस नदी के भीतर व बाहर दर्जनों गांवों के लाखों की आबादी जीवन निर्वाह कर रहे हैं. साथ ही लाखों की आबादी के आवागमन को लेकर यह एक मुख्य मार्ग है. बताया कि स्थिति को गंभीर देख कुछ दिन पूर्व क्षति ग्रस्त पुल के समीप स्थानीय प्रशासन द्वारा बेरियर लगा कर आवाजाही पर रोक लगाया गया था. पर कुछ दिन के बाद स्थिति पुनः जस की तस हो गई. बताया कि इस मार्ग से सभी पदाधिकारियों का आना जाना भी लगा रहता है. पर किसी का इस ओर ध्यान आकर्षित नहीं हो रहा है. सड़क की यह वर्तमान स्थिति यह है कि किसी भी वक्त दुर्घटना को अंजाम दे सकती है.

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