अनदेखी. नाला है जाम, सड़ांध से वार्डवासी परेशान, नहीं हो रही सफाई
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Apr 2016 5:13 AM
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नाक ढंक कर गुजरना बनी विवशता कई दशकों से परेशानी झेलते आ रहे हैं नगर परिषद क्षेत्र के 25 नंबर के वार्डवासी. इस वार्ड के बीचोबीच गुजरने वाली सड़क के दोनों किनारे कई दशक पूर्व नाला निर्माण कार्य कराया गया था. इसकी समुचित साफ-सफाई नहीं कराये जाने के कारण लोगों का सड़ांध के कारण यहां […]
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नाक ढंक कर गुजरना बनी विवशता
कई दशकों से परेशानी झेलते आ रहे हैं नगर परिषद क्षेत्र के 25 नंबर के वार्डवासी. इस वार्ड के बीचोबीच गुजरने वाली सड़क के दोनों किनारे कई दशक पूर्व नाला निर्माण कार्य कराया गया था. इसकी समुचित साफ-सफाई नहीं कराये जाने के कारण लोगों का सड़ांध के कारण यहां से गुजरना कठिन हो रहा है.
सुपौल : समस्या अगर किसी एक व्यक्ति का हो तो स्थानीय स्तर पर उसे सुलझाया जा सकता है. लेकिन समस्या जब सामूहिक बन जाये तब लोगों में आक्रोश पनपना लाजिमी ही है. कुछ ऐसा ही मामला कई दशकों से झेलते आ रहे हैं नगर परिषद क्षेत्र के 25 नंबर वार्डवासी. इस वार्ड के बीचोबीच गुजरने वाली सड़क के दोनों किनारे कई दशक पूर्व नाला निर्माण कार्य कराया गया था.
जिसकी समुचित साफ सफाई नहीं कराये जाने के कारण जहां लोगों को सड़ांध का सामना करना पड़ रहा है. वहीं सरकारी भूमि को अतिक्रमित कर लिये जाने से वाहनों के परिचालन में भी भारी परेशानी हो रही है. जबकि नाला में कचड़ा का जमाव रहने से इन दिनों स्थानीय लोगों को मच्छरों के प्रकोप से भी जूझने की विवशता बनी हुई. स्थानीय लोगों का कहना है कि नाला के साफ- सफाई को लेकर कई बार स्थानीय जन प्रतिनिधि व विभाग से अनुरोध किया गया.
लेकिन विभाग द्वारा किसी प्रकार का पहल नहीं किया गया है. जिस कारण वार्ड वासी समेत उक्त सड़क से आवाजाही करने वाले राहगीरों को जहां कठिनाई हो रही है. वहीं हर समय एक बड़ी दुर्घटना घटित होने की भी आशंका बनी हुई है.
अबतक नहीं बदली सूरत व सीरत
सरकार द्वारा शहर सहित आस पड़ोस के क्षेत्रों को हाइटेक कराये जाने की कवायद जारी है. कई योजनाओं को संचालित कर चकाचक सड़कें, बिजली का उत्तम प्रबंध, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, पर्यटन स्थल, पार्क सहित अन्य सुविधाओं से लैस कर सूरत व सीरत बदलने का कार्य भी जारी है. लेकिन जिला मुख्यालय का हजारों की आबादी वाले सबसे पुराना वार्ड अब तक उपेक्षा का दंश झेलने को विवश हो रहे हैं.
ऐसी बात नहीं है कि जिला प्रशासन के पास राशि की कमी हो रही है. लेकिन जब तक सरकारी महकमा का नजरिया व सकारात्मक सोच प्रदर्शित नहीं होगा. तब तक जन कल्याणकारी योजनाओं का प्रतिफल लोगों को नहीं मिल सकेगा. गौरतलब हो कि सदर प्रखंड के बीणा एकमा से आने वाली यह पथ कीर्तन भवन के समीप सुपौल – सहरसा मार्ग को जोड़ती है. कई दशक पूर्व इस सड़क के किनारे बनाये गये नाले की पानी का बहाव खुली चाप व चाचर भूमि में होता था. लेकिन सघन आबादी व जगह- जगह घर बनने के साथ ही पानी की निकासी अवरुद्ध हो चुका है. जल की निकासी नहीं होने के कारण लोगों को गंदगी व सड़ांध का सामना करना पड़ रहा है.
कहते हैं वार्ड वासी
शिवेंद्र लाल ने कहा कि यह वार्ड सबसे पुराना है. बताया कि वर्ष 1977 में इस मुहल्ले को वार्ड नंबर पांच का दर्जा प्राप्त था. जन संख्या में वृद्धि व सीमांकन के बाद इसे 19 नंबर कर दिया गया. लेकिन क्षेत्र का समुचित विकास हो इसके लिए जनसंख्या व सरकारी मानदंड अनुरूप वर्तमान में इस मुहल्ले को 25 नंबर वार्ड में शामिल किया गया है. उन्होंने सोचा था कि अब इस क्षेत्र का समुचित विकास होगा.
लेकिन काफी समय गुजर जाने के बाद भी इस समस्या से मुहल्लेवासियों को निजात नहीं मिल पाया है.
शैलेंद्र लाल दास ने बताया कि वीणा एकमा पथ काफी व्यस्त मार्ग है. इस समस्या से निजात दिलाये जाने को लेकर स्थानीय विधायक भी अपने तरीके से कार्य करवा सकते हैं. या फिर जिला प्रशासन सम विकास योजना के माध्यम से भी कार्य को पूर्ण कर सकते हैं. लेकिन महत्वपूर्ण पथ होने के बाद भी किसी प्रकार का ध्यान नहीं दिया जा रहा है.
उत्पला कुमारी ने बताया कि इस पथ को चकाचक करा दिया गया. लेकिन सड़क के दोनों किनारे खुला नाला की कई महीनों से साफ सफाई नहीं करायी गयी है. जिस कारण संध्या होते ही लोगों को मच्छरों के प्रकोप का सामना करना पड़ता है.
शिक्षिका तिथि कुमारी ने बताया उनके जन्म से पूर्व ही खुला नाला का निर्माण कराया गया. कई वार मुहल्लेवासियों द्वारा नाला की सफाई व ढक्कन युक्त नाला बनाये जाने का अनुरोध किया गया. लेकिन संबंधितों द्वारा किसी प्रकार का पहल नहीं किया गया है.
तिथि ने यह भी बताया कि सड़क निर्माण कार्य में संवेदक द्वारा लापरवाही भी बरती गयी है. बताया कि इस सड़क में फ्लैंक नहीं बनाये जाने से कई बार दुर्घटनाएं भी घटित हुई हैं.
समस्या से जूझ रहे हैं वार्ड वासी
स्थानीय कुमोद कामत, अशोक पासवान, पप्पू साह आदि ने बताया कि यहां के लोग इस सड़क में कई दशकों से नाला की समस्या से जूझ रहे हैं. बताया कि यह पथ सदर प्रखंड के कई पंचायतों को जोड़ती है. साथ ही इस सड़क के किनारे निजी चिकित्सालय, मंदिर, छोटे – छोटे कुटीर उद्योग, ट्रांसपोर्ट, विद्यालय सहित अन्य कार्यालय भी संचालित है. जिस कारण दैनिकी सैकड़ों वाहन व राहगीरों का आवाजाही बना रहता है.
सरकारी भूमि का अतिक्रमित कर लिये जाने व खुली नाला रहने के कारण कई बार घटनायें भी घटित हुई है. बावजूद इसके प्रशासन का इस समस्या के बाबत किसी प्रकार का पहल नहीं किया जा रहा है. बताया कि मौसम के एकाएक करवट लेने से जिले भर में मच्छरों के प्रकोप से कालाजार जैसे रोग का भी मामला सामने आ रहा है. इसे लेकर कई स्थानों पर डीडीटी का भी छिड़काव कराया जा रहा है. लेकिन इस पथ के नाले की साफ – सफाई तो दूर, कई वर्षों से डीडीटी का भी छिड़काव नहीं कराया गया है. जिस कारण विभागीय उदासीनता से हतप्रभ हैं.
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