िचंता. कैसे मिले गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा, पढ़ाई करने के लिए जगह नहीं
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 10 Apr 2016 5:45 AM
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भवन के लिए तरस रहे नौनिहाल केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ कराये जाने को लेकर प्रयास कर रही है. साथ ही नौनिहालों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध करायी जा सके. इसे लेकर कई प्रकार की योजनाओं को संचालित कर करोड़ों अरबों की राशि खर्च की जा रही है. इसके बावजूद […]
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भवन के लिए तरस रहे नौनिहाल
केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ कराये जाने को लेकर प्रयास कर रही है. साथ ही नौनिहालों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध करायी जा सके. इसे लेकर कई प्रकार की योजनाओं को संचालित कर करोड़ों अरबों की राशि खर्च की जा रही है. इसके बावजूद बच्चों को पढ़ने के लिए अपना भवन नहीं मिल पा रहा है.
सुपौल : शिक्षा के बिना जीवन को अधूरा माना जाता है. सरकार भी शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ कराये जाने को लेकर प्रयास कर रही है. साथ ही नौनिहालों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा उपलब्ध करायी जा सके. इसे लेकर कई प्रकार की योजनाओं को संचालित कर करोड़ों अरबों की राशि खर्च की जा रही है. छात्रवृति हो या पोशाक या फिर खेल कूद का आयोजन. यहां तक कि नौनिहालों के ठहराव को लेकर विद्यालयों में गुणवत्ता युक्त मध्याह्न भोजन भी उपलब्ध कराया जा रहा है. बावजूद इसके विभागीय उदासीनता के कारण कई विद्यालय भूमिहीन व भवनहीन है.
जिसका खामियाजा ऐसे विद्यालयों में नामांकित छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. कुछ ऐसा ही हाल बना है सदर प्रखंड के गोपालपुर सिरे पंचायत स्थित संचालित राधिका कन्या प्राथमिक विद्यालय चंदैल का. यह विद्यालय बीते तीन वर्षों से चंदैल गांव स्थित निजी दरवाजे व आंगन में संचालित हो रहा है. जिस कारण बच्चों के पठन- पाठन सहित अन्य योजनाओं को संचालन में विद्यालय प्रबंधन व बच्चों को भारी परेशानी हो रही है.
संचालन में हो रही परेशानी
ज्ञात हो कि उक्त विद्यालय को पूर्व में भूमि व भवन उपलब्ध था. लेकिन तीन वर्ष पूर्व यह विद्यालय कोसी नदी में आयी उफान व कटाव का भेंट चढ़ गया. जहां नौनिहालों के भविष्य को देखते हुए स्थानीय ग्रामीणों ने विद्यालय संचालन को लेकर एक निजी दरवाजा विद्यालय प्रबंधन को उपलब्ध करवाया.
जहां कई वर्षों से पदस्थापित शिक्षकों द्वारा पठन-पाठन का कार्य कराया जा रहा है. साथ ही विद्यालय प्रबंधन द्वारा नामांकित बच्चों को मध्याह्न भोजन सहित अन्य योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है. विद्यालय में 98 बच्चे नामांकित है. लेकिन इस विद्यालय के भूमि व भवनहीन हो जाने से विद्यालय के संचालन में भारी परेशानी हो रही है.
जुगाड़ से कब तक चलेगा विद्यालय
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय भवन कोसी नदी के कटाव की भेंट चढ़ने के उपरांत विद्यालय के संचालन को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था के तहत एक निजी दरवाजा उपलब्ध कराया गया. लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा विद्यालय के भवन निर्माण की दिशा में किसी प्रकार का पहल नहीं किया जा रहा है. जो समझ से परे है. लोगों ने बताया कि निजी दरवाजा व आंगन में इस विद्यालय के संचालन होने की जानकारी विभाग को है. साथ ही तीन वर्ष के दौरान कई पदाधिकारियों द्वारा विद्यालय का निरीक्षण भी किया गया. लेकिन जुगाड़ टेक्नोलोजी पर संचालित विद्यालय में नामांकित बच्चों को पदाधिकारियों के शिथिलता का कोपभाजन बनना पड़ रहा है.
कहते हैं पदाधिकारी
इस बाबत पूछे जाने पर डीपीओ एसएसए गिरीश कुमार ने बताया कि उक्त विद्यालय के भवन निर्माण को लेकर भूमि उपलब्ध कराये जाने की दिशा में प्रयास जारी है. भूमि का निबंधन होते ही इस वित्तीय वर्ष में भवन निर्माण कार्य करा लिया जायेगा.
विभाग नहीं कर रहा पहल
विद्यालय के नामांकित नौनिहालों का कहना है कि गरमी का मौसम आ चुका है. अप्रैल माह से स्कूलों में पठन – पाठन का कार्य सुबह के सत्र में होता रहा है. लेकिन विभाग द्वारा विद्यालय का संचालन पूर्ववत ही रखा गया है. जिस कारण खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने में भारी परेशानी होती है. बच्चों ने बताया कि इस मौसम में हवाओं के झोंके का भी उन सबों को सामना करना पड़ रहा है. बावजूद इसके विभाग द्वारा किसी प्रकार की सुधि नहीं ली जा रही है.
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