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गंगा नदी की निर्मलता पर पहल हो, लेकिन अविरलता बनी रहे : नीतीश कुमार

Updated at : 13 Apr 2015 4:57 AM (IST)
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गंगा नदी की निर्मलता पर पहल हो, लेकिन अविरलता बनी रहे : नीतीश कुमार

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि गंगा नदी की निर्मलता पर पहल होनी चाहिये लेकिन गंगा नदी की अविरलता को बनाए रखने के लिए उसकी गाद को बंगाल की खाडी में जाने से नहीं रोका जाना चाहिए. पटना में आज एक समाचार पत्र के नए भवन के उद्घाटन के अवसर […]

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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने आज कहा कि गंगा नदी की निर्मलता पर पहल होनी चाहिये लेकिन गंगा नदी की अविरलता को बनाए रखने के लिए उसकी गाद को बंगाल की खाडी में जाने से नहीं रोका जाना चाहिए. पटना में आज एक समाचार पत्र के नए भवन के उद्घाटन के अवसर पर नीतीश ने कहा कि गंगा नदी की निर्मलता पर पहल होनी चाहिये लेकिन गंगा नदी की अविरलता भी बनी रहे.

उन्होंने कहा कि आज गंगा का जल शहर के किनारे से दूर होता जा रहा है. नदी छिछली होती जा रही है तथा गंगा नदी में गाद जमा हो रहा है. थोडा भी पानी बढने से बाढ की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. इसका मुख्य कारण है फरक्का बराज, जिसके कारण सिल्ट जमा हो जाता है, जो डिस्चार्ज नहीं होता. उन्होंने कहा कि पहले गंगा नदी का जल प्रवाह सिल्ट के साथ बंगाल की खाडी में जाता था, जो अब अवरुद्ध हो गया है.

नीतीश ने कहा कि गंगोत्री से निकलनेवाली गंगा का एक बूंद पानी भी बिहार में प्रवेश नहीं करता. जब गंगा बिहार में प्रवेश करती है तो 400 क्यूसेक पानी अपने साथ बिहार में लाती है. जब बिहार छोडती है तो 1800 क्यूसेक पानी साथ लेकर जाती है. बिहार गंगा की बाढ को भी झेलता है. नीतीश कुमार ने कहा कि गत 26 मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण की बैठक हुई थी, जिसमें उन्होंने अपनी ओर से सुझाव दिये थे.

उन्होंने कहा कि अधिकांश योजनायें गंगा में निर्मलता सुनिश्चित करने के लिये ही ली गयी हैं. अविरलता के लिये नहीं. गंगा की अविरलता के मुद्दे पर भी यथोचित ध्यान देने की आवश्यकता है. प्रधानमंत्री ने भी कहा कि इस विषय पर अध्ययन जरुरी है. नीतीश ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय गाद प्रबंधन नीति बनाने का मुद्दा उठाया जाता रहा है. एक तरफ गंगा के जलग्रहण क्षेत्र में वनों की कटाई के कारण आने वाले गाद की मात्रा में वृद्धि हुई है वहीं दूसरी तरफ फरक्का बराज के कुप्रभाव के कारण गंगा के तल का उपर उठना, इसकी जल वाहक क्षमता में कमी होना. मिनडेरिंग एवं ब्रिडिंग प्रवृत्ति उत्पन्न होने के कारण बालू का ढेर बनना बढ गया है.

उन्होंने कहा कि हमें फरक्का बराज की उपयोगिता का पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है. इलाहाबाद से फरक्का तक उत्तर प्रदेश एवं बिहार में जलस्तर को ऊंचा कर सिंचाई के लिये डैम बनाना, उनके विचार से गंगा को विशाल पोखर के रूप में परिवर्तित करना होगा.

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