यूरोप ट्रिप से लेकर महंगे गिफ्ट तक, टेंडर घोटाला मामले में एक्शन, IAS योगेश और अभिलाषा सस्पेंड

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 30 May 2026 2:11 PM

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आईएएस अभिलाषा शर्मा और आईएएस योगेश कुमार सागर

Bihar Tender Scam: बिहार सरकार ने टेंडर घोटाले में कार्रवाई करते हुए आईएएस योगेश कुमार सागर और आईएएस अभिलाषा शर्मा को सस्पेंड कर दिया है. ईडी की जांच में ठेकेदार रिशु श्री द्वारा इन अफसरों को यूरोप, गोवा की सैर कराने और महंगे गिफ्ट देने का भंडाफोड़ हुआ है.

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Bihar Tender Scam: बिहार सरकार ने टेंडर घोटाला मामले में आईएएस अधिकारी योगेश सागर और आईएएस अभिलाषा शर्मा को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. इस पूरे मामले की शुरुआत ठेकेदार रिशु श्री के ठिकानों पर हुई छापेमारी के बाद हुई थी. इसे गिरफ्तार करके पहले ही जेल भेजा जा चुका है. ईडी की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि टेंडर मैनेज करने के लिए रिशु श्री अलग-अलग सरकारी विभागों में सचिव से लेकर नगर आयुक्त तक की मनचाही पोस्टिंग मैनेज कराता था. रिशु श्री राज्य के बड़े आईएएस अधिकारियों को अपनी उंगलियों पर नचाता था.

आईएएस योगेश सागर को ठेकेदार ने कराई यूरोप की सैर

ईडी की जांच में सामने आया है कि ठेकेदार रिशु श्री ने आईएएस योगेश कुमार सागर और उनके 8 रिश्तेदारों को विदेश यात्रा कराई थी. 22 जून 2024 से 30 जून 2024 तक हुई इस यात्रा के दौरान योगेश कुमार सागर और उनके परिवार के लोग ऑस्ट्रिया के वियाना, साल्जबर्ग और वॉल्फगैंग में घूमे थे. वे वहां के बेहद महंगे और आलीशान होटलों में ठहरे थे. इस पूरी हवाई यात्रा और विदेशी होटलों में रुकने पर कुल 21.92 लाख रुपए खर्च हुए थे. इसका पूरा भुगतान ठेकेदार रिशु श्री ने अपनी जेब से किया था.

चटनी-रोटी खाकर बचपन बीता, फिर बने आईएएस

आईएएस योगेश कुमार सागर 2017 बैच के अधिकारी हैं और निलंबन से पहले समाज कल्याण विभाग में तैनात थे. योगेश मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने साल 2012 में लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से एमबीबीएस की पढ़ाई की थी. एक वक्त ऐसा भी था जब योगेश कुमार सागर के परिवार के लिए ठीक से पेट भरना तक मुश्किल होता था. उनका बचपन बेहद तंगहाली और कठिन परिस्थितियों में बीता था. योगेश का जन्म 15 अप्रैल 1988 को हुआ था और उनके पिता कस्टम एंड सेंट्रल एक्साइज विभाग में एक कॉन्स्टेबल थे.

आईएएस अभिलाषा शर्मा पर भी लगे गंभीर आरोप

इस घोटाले में सस्पेंड होने वाली दूसरी अधिकारी अभिलाषा शर्मा हैं. अभिलाषा ग्रामीण विकास विभाग में जीविका की सीईओ के पद पर कार्यरत थीं. बिहार कैडर की 2014 बैच की आईएएस अधिकारी अभिलाषा ने पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की डिग्री ली है. उनका जन्म 26 जनवरी 1989 को हुआ. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्रालय से की थी और वह बिहार सरकार में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुकी हैं. वह सीतामढ़ी की डीएम रहने के साथ-साथ वित्त विभाग में संयुक्त सचिव भी रह चुकी हैं.

आईएएस अभिलाषा शर्मा के खिलाफ आरोपों की बात करें तो उनके घर की छत पर एक रूफटॉप गार्डन लगवाया गया था. इस बगीचे को बनवाने में जो 9 लाख रुपए का खर्च आया था. इसका पूरा पैसा ठेकेदार रिशु ने दिया था. इसके अलावा रिशु ने इस महिला आईएएस अधिकारी के रिश्तेदारों को गोवा, दिल्ली और हैदराबाद की हवाई सैर कराई और यात्रा का पूरा खर्च उठाया. इतना ही नहीं, रिशु ने अभिलाषा शर्मा को आईफोन समेत कई अन्य बेहद महंगे गिफ्ट भी दिए थे.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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