पटना हाईकोर्ट ने कहा- महिला की छाती दबाना और सलवार हटाने की कोशिश दुष्कर्म का प्रयास नहीं, बल्कि लज्जा भंग का अपराध

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पटना हाई कोर्ट की तस्वीर

पटना हाई कोर्ट की तस्वीर

Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि महिला की छाती दबाना या सलवार हटाने का प्रयास हर मामले में दुष्कर्म के प्रयास का अपराध नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में अपराध का फैसला उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा.

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Patna High Court: पटना हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि किसी महिला की छाती दबाना और उसकी सलवार हटाने का प्रयास करना हर मामले में दुष्कर्म के प्रयास के अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा.

अदालत ने कहा कि अगर उपलब्ध साक्ष्यों से दुष्कर्म के प्रयास के लिए जरूरी कानूनी तत्व संदेह से परे साबित नहीं होते हैं, तो ऐसे कृत्य को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के तहत महिला की लज्जा भंग करने का अपराध माना जाएगा.

हिमांशु कुमार पाठक की अपील पर आया फैसला

यह फैसला न्यायमूर्ति पूर्णेंदु सिंह की एकलपीठ ने हिमांशु कुमार पाठक उर्फ मिठाईया पाठक की ओर से दायर आपराधिक अपील पर सुनवाई करते हुए दिया. हाईकोर्ट ने इस मामले में ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें आरोपी को दोषी ठहराया गया था.

दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित नहीं हुआ: कोर्ट

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों से यह जरूर सामने आता है कि आरोपी ने महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया, उसकी छाती दबाई और सलवार हटाने का प्रयास किया.

हालांकि, अदालत ने कहा कि यह संदेह से परे साबित नहीं हो सका कि आरोपी ने दुष्कर्म करने की दिशा में ऐसा कोई प्रत्यक्ष और निर्णायक कदम उठाया था, जिससे IPC की धारा 376/511 के तहत दुष्कर्म के प्रयास का अपराध बनता हो.

ट्रायल कोर्ट का फैसला और सजा आदेश रद्द

हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट के 31 अक्टूबर 2013 के दोषसिद्धि आदेश और 1 नवंबर 2013 को सुनाए गए सजा आदेश को रद्द कर दिया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी को सभी आरोपों से बरी किया जाता है.

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि आरोपी जमानत पर है, इसलिए उसे जमानत बंधपत्र की जिम्मेदारी से मुक्त किया जाए. अगर आरोपी ने कोई जुर्माना जमा किया है तो उसे वापस किया जाए.

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दुष्कर्म का प्रयास और लज्जा भंग के अपराध में अंतर

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि दुष्कर्म का प्रयास और महिला की लज्जा भंग करना दो अलग-अलग अपराध हैं. अदालत ने कहा कि किसी भी मामले में अपराध का निर्धारण उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर किया जाता है.

कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि महिला की छाती दबाना या सलवार हटाने का प्रयास अपराध नहीं है, ऐसा नहीं कहा गया है. बल्कि इस मामले में यह माना गया कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर दुष्कर्म के प्रयास का अपराध साबित नहीं हुआ.

कानूनी मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा फैसला

पटना हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में धारा 376/511 (दुष्कर्म का प्रयास) और धारा 354 (महिला की लज्जा भंग) के बीच कानूनी अंतर को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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