अगर आवास खाली नहीं करेंगी राबड़ी देवी तो सम्राट सरकार के पास और क्या-क्या उपाय है, जानिए
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 30 May 2026 3:18 PM
राबड़ी देवी और बिहार सीएम सम्राट चौधरी
Rabri Devi Bunglow Row: बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी को पटना स्थित 10 सर्कुलर रोड वाला आवास खाली करने का आदेश जारी किया गया है. इस आदेश के जारी होने के बाद राबड़ी देवी ने कहा कि सम्राट सरकार चाहे तो फोर्स बुला ले.
Rabri Devi Bunglow Row: बिहार में 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के इस बयान के बाद कि वह किसी भी कीमत पर आवास खाली नहीं करेंगी और जरूरत पड़े तो सरकार फोर्स बुला ले वाला मामला अब सिर्फ सरकारी नोटिस तक सीमित नहीं रह गया है.
आवास खाली कराने को लेकर सरकार के पास क्या हैं विकल्प?
सरकारी नियमों के मुताबिक किसी भी सरकारी आवास का आवंटन समाप्त होने या नए आवंटन की स्थिति में उसे खाली कराना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया होती है. यदि तय समय के बाद भी आवास खाली नहीं किया जाता है तो संबंधित व्यक्ति को अनधिकृत कब्जा करने वाला माना जा सकता है. इसके बाद विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई शुरू होती है.
आमतौर पर पहले नोटिस जारी किया जाता है. इसके बाद जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर बेदखली और जुर्माने जैसी कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि 10 सर्कुलर रोड का मामला अब सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं आगे निकल चुका है, क्योंकि इसमें राज्य की दो प्रमुख पार्टी आमने-सामने है.
बेदखली कानून के तहत हो सकती है कार्रवाई
जानकारों के अनुसार यदि सरकार कानूनी रास्ता अपनाती है तो बिहार सरकारी परिसरों से जुड़े नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है. सबसे पहले संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस दिया जाता है और पूछा जाता है कि उन्हें आवास से बेदखल क्यों न किया जाए. यदि जवाब संतोषजनक नहीं होता है तो सक्षम प्राधिकारी जिला प्रशासन की मदद से आवास खाली कराने का आदेश जारी कर सकता है. इसके अलावा तय समय के बाद सरकारी आवास में रहने की अवधि के लिए जुर्माना भी लगाया जा सकता है. यह राशि बाजार दर के आधार पर तय की जा सकती है.
सरकार के सामने क्या चुनौती
कानूनी पहलू के साथ-साथ इस मामले का राजनीतिक पक्ष भी काफी अहम माना जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सरकार को हर कदम बहुत सोच-समझकर उठाना होगा. अगर सरकार तुरंत सख्त कार्रवाई करती है तो विपक्ष इसे राजनीतिक प्रताड़ना का मुद्दा बना सकता है. ऐसी स्थिति में राबड़ी देवी को सहानुभूति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है. दूसरी ओर यदि सरकार लंबे समय तक कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो विपक्ष इसे सरकार की कमजोरी बताने की कोशिश कर सकता है. ऐसे में सरकार के लिए संतुलन बनाना आसान नहीं होगा.
बातचीत का रास्ता भी खुला
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार चाहे तो बातचीत के जरिए भी समाधान निकालने की कोशिश कर सकती है. किसी वैकल्पिक व्यवस्था या आपसी सहमति के आधार पर विवाद को खत्म करने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है. अब तक दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम नजर आ रहे हैं.
कोर्ट तक पहुंच सकता है मामला
माना जा रहा है कि यदि विवाद और बढ़ता है तो मामला अदालत तक भी पहुंच सकता है. आरजेडी इस मुद्दे पर कानूनी राहत लेने की कोशिश कर सकती है. यदि अदालत से किसी तरह की राहत मिलती है तो राबड़ी देवी को कुछ समय की मोहलत मिल सकती है. अगर अदालत से राहत नहीं मिलती है तो सरकार को कानून के तहत आगे की कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो जाएगा.
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आने वाले दिनों पर टिकी निगाहें
10 सर्कुलर रोड आवास को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन गया है. एक तरफ राबड़ी देवी अपने रुख पर अड़ी हुई हैं, तो दूसरी तरफ सरकार के सामने कानून और राजनीति दोनों का संतुलन बनाए रखने की चुनौती है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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