फर्जी कंपनी बनाकर साइबर ठगों ने की 21.21 लाख की ठगी, पटना में फर्जी नाम-पते पर खुलवाया बैंक खाता

Author Nitish kumar|Edited by Nikhil Anurag
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सांकेतिक तस्वीर

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पटना में साइबर ठगों ने एक नई चाल चली है. उन्होंने फर्जी कंपनी बनाकर और खुद को डायरेक्टर बताकर एक व्यक्ति से 21.21 लाख रुपये की ठगी कर ली. यह चौंकाने वाला मामला अब जांच के दायरे में है.

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Patna cyber fraud: साइबर ठग अब ठगी के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं. पटना में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें साइबर बदमाशों ने कंपनी बनाकर उसका डायरेक्टर होने का झांसा दिया और फर्जी व्हाट्सएप अकाउंट के जरिए संपर्क कर 21.21 लाख रुपये की ठगी कर ली. मामले का खुलासा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद हुई जांच में हुआ है.

जांच के दौरान पता चला कि ठगी की गई 21.21 लाख रुपये की राशि पटना के सब्जीबाग स्थित एक बैंक में मौजूद एक संदिग्ध खाते में ट्रांसफर की गई थी. इसके बाद मामले की जानकारी संबंधित बैंक प्रशासन को दी गई, जिसके बाद खाते की जांच शुरू की गई.

फर्जी नाम और पते पर खुलवाया गया था म्यूल खाता

बैंक प्रशासन की जांच में सामने आया कि संदिग्ध म्यूल खाता मोहम्मद नासिर के नाम पर खोला गया था. खाते के प्रोफाइल सत्यापन के दौरान उसमें दर्ज पता शाह की इमली, कब्रिस्तान के पास, पटना सिटी का बताया गया था. जब बैंक अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की तो पता चला कि उस नाम का कोई व्यक्ति वहां नहीं रहता है.

इसके अलावा खाते में दर्ज मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वह नंबर भी गलत पाया गया. इससे स्पष्ट हो गया कि साइबर ठगों ने फर्जी नाम, पता और मोबाइल नंबर का इस्तेमाल कर बैंक खाता खुलवाया था. इतना ही नहीं, उन्होंने उस खाते का एटीएम कार्ड भी हासिल कर लिया था और साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए उसी खाते का इस्तेमाल किया गया.

छह माह में 42.48 लाख रुपये का हुआ ट्रांजेक्शन

बैंक अधिकारियों ने जब संदिग्ध खाते के पिछले छह महीनों के ट्रांजेक्शन की जांच की तो उसमें 42.48 लाख रुपये के लेन-देन का खुलासा हुआ. खाते के संबंध में विस्तृत जांच के बावजूद बैंक को खाताधारक की वास्तविक पहचान से जुड़ी कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी.

साइबर थाने में दर्ज हुआ केस

मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक प्रबंधन ने साइबर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है. साइबर पुलिस अब बैंक खाते के विवरण, पैन नंबर और मोबाइल नंबर समेत अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है.

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि साइबर ठगों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाता खुलवाया और उसी का इस्तेमाल ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया. पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच में जुटी हुई है.

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