मुजफ्फरपुर : गंदगी देख डीएम ने कहा, रेलवे पर होगी कार्रवाई

Updated at : 12 Feb 2019 7:02 AM (IST)
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मुजफ्फरपुर :  गंदगी देख डीएम ने कहा, रेलवे पर होगी कार्रवाई

मुजफ्फरपुर : कार्यभार संभालने के साथ ही स्टेशन रोड की नारकीय स्थिति को लेकर डीएम आलोक रंजन घोष ने पहल शुरू कर दी है. सालों से ओपेन नाले में रेलवे के शौचालय का मल-मूत्र बहने के कारण स्टेशन रोड की बदसूरती के लिए डीएम ने रेलवे को जिम्मेवार ठहराया है. उन्होंने अविलंब नगर निगम को […]

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मुजफ्फरपुर : कार्यभार संभालने के साथ ही स्टेशन रोड की नारकीय स्थिति को लेकर डीएम आलोक रंजन घोष ने पहल शुरू कर दी है. सालों से ओपेन नाले में रेलवे के शौचालय का मल-मूत्र बहने के कारण स्टेशन रोड की बदसूरती के लिए डीएम ने रेलवे को जिम्मेवार ठहराया है. उन्होंने अविलंब नगर निगम को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 133 के तहत नोटिस कर कानूनी कार्रवाई के आदेश दिये हैं. इसके बाद निगम प्रशासन आनन-फानन में कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

नगर आयुक्त संजय दूबे ने सिटी मैनेजर ओम प्रकाश को अधिवक्ता से राय-मशविरा कर संचिका के साथ कानूनी कार्रवाई के लिए नोटिस भेजने व प्राथमिकी दर्ज कराने को कहा है. बताया जाता है कि स्थानीय एरिया मैनेजर व स्टेशन अधीक्षक को नामजद करते हुए नगर निगम कानूनी कार्रवाई करेगा.

क्षेत्रीय अधिकारी ने सात दिनों में कार्रवाई का दिया था भरोसा : नगर आयुक्त ने बताया कि शहरी क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे वायु प्रदूषण के रोकथाम को लेकर आठ जनवरी को प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय के सभागार में बैठक हुई थी. मंत्री सुरेश शर्मा इसकी अध्यक्षता कर रहे थे. प्रमंडलीय आयुक्त नर्मदेश्वर लाल के अलावा डीएम समेत तमाम अधिकारी मौजूद थे.
रेलवे के एरिया मैनेजर मनोज कुमार भी मौजूद थे. डीएम ने सात दिनों के अंदर शौचालय का मल-मूत्र ओपेन नाले में बहने पर रोक लगाने का निर्देश दिया था. बावजूद अबतक रेलवे की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हुई. एक माह से अधिक का समय भी बीत चुका है. रेलवे को नाले पर हुए अतिक्रमण व चहारदीवारी निर्माण को लेकर भी निर्देश दिया गया था.
हर महीने सशक्त स्थायी समिति से खर्च पर लगेगी मुहर. अभी दिन में दो पाली में शहर की सफाई होती है. रात्रि में दिन में काम करने वाले मजदूर से ही काम लिया जाता है. रोज 50-60 हजार रुपये डीजल पर खर्च होता है. रात्रि में सफाई होने पर डीजल का खर्च एक लाख तक पहुंच रहा है. वहीं दिन में काम करने वाले मजदूरों से रात में ड्यूटी कराने पर नाराजगी भी होती है.
ऐसे में 30-40 मजदूर के साथ दस ट्रैक्टर व दो बॉबकट मशीन पर खर्च होनेवाली राशि का बजट प्रतिमाह के हिसाब से तैयार कर हर महीने निगम सशक्त स्थायी समिति से पास कराया जायेगा.
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