Chatra News: उधार का पोषाहार खा रहे चतरा के 219 आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे, नौ महीने से नहीं मिला है पैसा

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 01 Jun 2026 8:46 PM

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बच्चों को पोषाहार खिलातीं आंगबाड़ी सेविकाएं.

Chatra News: चतरा के सिमरिया और लावालौंग प्रखंड के 219 आंगनबाड़ी केंद्रों में नौ महीने से पोषाहार राशि नहीं मिलने से संकट गहरा गया है. सेविकाएं कर्ज और उधार लेकर बच्चों को भोजन उपलब्ध करा रही हैं. भुगतान नहीं होने पर 5 जून से पोषाहार वितरण बंद करने की चेतावनी दी गई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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चतरा से दीनबंधू और धर्मेंद्र कुमार की रिपोर्ट

Chatra News: झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया और लावालौंग प्रखंड में करीब 219 आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे उधार का पोषाहार खा रहे हैं. इसका कारण यह है कि इन दोनों प्रखंडों के इन आंगबाड़ी केंद्रों की सेविकाओं को पिछले नौ महीने यानी सितंबर 2025 से पोषाहार का पैसा नहीं मिला है. आलम यह है कि पैसों के अभाव में इन केंद्रों की सेविकाओं को कर्ज लेकर बच्चों को पोषाहार खिलाना पड़ रहा है. दुख की बात तो यह है कि केंद्र चलाने के लिए लोग कर्ज देने के नाम पर भी कतराने लगे हैं, जिससे सेविकाओं को केंद्र का संचालन करने में परेशानी हो रही है.

कर्ज लेकर बच्चों को खिलाया जा रहा पोषाहार

आंगनबाड़ी सेविकाओं का कहना है कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य को देखते हुए उन्होंने किसी तरह केंद्रों में पोषाहार वितरण बंद नहीं होने दिया. इसके लिए कई सेविकाओं ने निजी स्तर पर कर्ज लिया, जबकि कई ने स्थानीय दुकानदारों से उधार में खाद्य सामग्री खरीदकर बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया. हालांकि अब स्थिति पहले से अधिक गंभीर हो गई है. लगातार बकाया बढ़ने के कारण दुकानदार भी उधारी देने से इनकार करने लगे हैं. ऐसे में सेविकाओं के लिए केंद्रों का संचालन करना और बच्चों को नियमित पोषाहार उपलब्ध कराना बेहद मुश्किल हो गया है.

चावल, दाल, सूजी और अंडे की खरीदारी पर संकट

आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुसार चावल, दाल, सूजी, चीनी और अंडा दिया जाता है. इन सामग्रियों की खरीदारी के लिए विभाग की ओर से हर महीने लगभग ढाई हजार से तीन हजार रुपये तक की राशि भेजी जाती थी. इसी राशि के आधार पर सेविकाएं पोषाहार सामग्री खरीदकर बच्चों को उपलब्ध कराती थीं. लेकिन सितंबर 2025 से मई 2026 तक पोषाहार मद की राशि जारी नहीं होने से पूरी व्यवस्था प्रभावित हो गई है. कई केंद्रों में खाद्य सामग्री की उपलब्धता भी प्रभावित होने लगी है.

कई बार की मांग के बावजूद नहीं हुआ भुगतान

आंगनबाड़ी सेविकाओं का आरोप है कि उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों के समक्ष भुगतान की मांग उठाई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई. लगातार मांग और पत्राचार के बावजूद राशि जारी नहीं होने से सेविकाओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है. सेविकाओं का कहना है कि सरकार बच्चों के पोषण और कुपोषण दूर करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर काम करने वाली सेविकाओं की समस्याओं की अनदेखी की जा रही है. इससे बच्चों की पोषण योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है.

सेविका संघ ने जताई नाराजगी

आंगनबाड़ी सेविका संघ की जिला अध्यक्ष प्रतिमा देवी ने कहा कि पिछले नौ महीनों से लगातार विभाग से पोषाहार राशि के भुगतान की मांग की जा रही है. इसके बावजूद अब तक कोई भुगतान नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि सेविकाएं आर्थिक संकट के बावजूद बच्चों की सुविधा को ध्यान में रखकर केंद्र चला रही थीं, लेकिन अब यह संभव नहीं रह गया है. दुकानदारों ने उधारी देना बंद कर दिया है और सेविकाओं पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है.

5 जून से पोषाहार वितरण बंद करने की चेतावनी

सेविका संघ ने विभाग को चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं किया गया तो पोषाहार वितरण पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. प्रतिमा देवी ने बताया कि चतरा, टंडवा और इटखोरी प्रखंड के कई आंगनबाड़ी केंद्रों में पहले ही पोषाहार वितरण प्रभावित हो चुका है. उन्होंने घोषणा की कि 5 जून से सिमरिया और लावालौंग प्रखंड के सभी 219 आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार वितरण पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा. यह निर्णय तब तक लागू रहेगा, जब तक विभाग बकाया राशि का भुगतान नहीं कर देता.

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बच्चों के पोषण पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार वितरण बंद होने का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं पर पड़ेगा. ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार अपने बच्चों के पोषण के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो बच्चों के पोषण कार्यक्रम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. अब सभी की निगाहें विभागीय कार्रवाई पर टिकी हैं कि आखिर लंबित राशि का भुगतान कब तक किया जाता है और आंगनबाड़ी केंद्रों में पोषाहार व्यवस्था कब तक सामान्य हो पाती है.

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लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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