Monsoon: अगले 48 से 72 घंटे में मानसून दे सकता है दस्तक, IMD का आया नया अपडेट

Published by : Pritish Sahay Updated At : 01 Jun 2026 8:41 PM

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दो-तीन दिनों में मानसून की हो सकती है एंट्री, फोटो- एएनआई

Monsoon: देश के कई राज्यों में अब भीषण गर्मी से राहत मिल सकती है. भारत मौसम विज्ञान विभाग का अनुमान है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले दो से तीन दिनों में केरल पहुंच सकता है. इसके बाद यह देश के अन्य हिस्सों में भी अगले 15 से 20 दिनों में पहुंच जाएगा.

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Monsoon: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान जाहिर किया है कि अगले 48 से 72 घंटे के अंदर देश में मानसून की दस्तक हो सकती है. मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून के अगले दो से तीन दिनों में केरल पहुंचने की संभावना है. आमतौर पर देश में मानसून का आगमन एक जून के आसपास माना जाता है. आईएमडी के अनुसार- अगले कुछ दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के दक्षिण-पश्चिम और दक्षिण-पूर्व अरब सागर के कुछ और हिस्सों, लक्षद्वीप, केरल तथा तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनी हुई हैं.

बंगाल की खाड़ी के क्षेत्रों में भी बढ़ेगा प्रभाव

मौसम विभाग ने बताया कि इसी अवधि के दौरान मानसून दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम-मध्य, पूर्व-मध्य और उत्तर-पूर्व बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों के साथ-साथ दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के बचे हुए क्षेत्रों में भी आगे बढ़ सकता है.

पहले अनुमान से पहुंचने में हुई देरी

आईएमडी ने पहले केरल में मानसून के आगमन की संभावित तारीख 26 मई बताई थी. हालांकि, मानसून की प्रगति में अनुमान के मुताबिक गति नहीं रहने के कारण इसके आगमन में देरी हुई. विभाग ने 29 मई को अपने लेटेस्ट अपडेट में कहा था कि मानसून अगले सप्ताह केरल पहुंच सकता है.

इस साल सामान्य से कम बारिश का अनुमान

पिछले सप्ताह जारी पूर्वानुमान में आईएमडी ने कहा कि साल 2026 के मानसून सीजन में देश भर में बारिश सामान्य से कम रहने की संभावना है. विभाग के अनुसार, इस साल देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत बारिश होने का अनुमान है.

क्या है दीर्घकालिक औसत एलपीए?

एलपीए किसी क्षेत्र में एक निश्चित अवधि, जैसे एक महीने या पूरे मानसून मौसम के दौरान हुई औसत बारिश को दर्शाता है. इसकी गणना आमतौर पर 30 से 50 सालों के वर्षा आंकड़ों के आधार पर की जाती है. साल 1971 से 2020 के आंकड़ों के अनुसार पूरे भारत के लिए मौसमी बारिश का एलपीए 87 सेंटीमीटर निर्धारित किया गया है. आईएमडी के मानकों के अनुसार, यदि किसी साल मानसून के दौरान होने वाली बारिश एलपीए के 90 प्रतिशत से कम रहती है, तो उसे कम वर्षा वाला मानसून माना जाता है.

अल नीनो बन सकता है प्रमुख कारण

मौसम विभाग ने बताया कि इस साल सामान्य से कम बारिश की आशंका के पीछे अल नीनो बड़ा कारण है. अल नीनो का प्रभाव आमतौर पर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है, जिससे बारिश में कमी आने की संभावना बढ़ जाती है.

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लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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