रांची में 12 जून को महाधरना देंगे वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक, नियमावली-2026 के ड्राफ्ट का विरोध तेज

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नियमावली-2026 के विरोध में प्रदर्शन करते वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक. फोटो: प्रभात खबर

Ranchi News: झारखंड के वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के शिक्षक प्रस्तावित नियमावली-2026 के विरोध में 12 जून को रांची में महाधरना देंगे. मोर्चा ने ड्राफ्ट को अव्यावहारिक बताते हुए संशोधन की मांग की है. शिक्षकों ने 2 जून को ड्राफ्ट की प्रतियां जलाने और आंदोलन तेज करने की घोषणा की है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Ranchi News: झारखंड में वित्तरहित शिक्षण संस्थानों के लिए प्रस्तावित झारखंड माध्यमिक विद्यालय सेकेंडरी क्लास 9-12 स्थापना अनुमति एवं प्रस्वीकृति शर्त व बंधेज नियमावली-2026 के ड्राफ्ट का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है. राज्य के वित्तरहित हाई स्कूल, इंटर कॉलेज, संस्कृत विद्यालय और मदरसों के शिक्षक एवं कर्मचारी इस नियमावली को अव्यावहारिक बताते हुए आंदोलन के मूड में हैं. झारखंड वित्तरहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने 2 जून को राज्यभर के संस्थानों के मुख्य द्वार पर ड्राफ्ट की प्रतियां जलाने और 12 जून को रांची स्थित लोकभवन के समक्ष महाधरना देने की घोषणा की है.

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नई शिक्षा नीति के तहत बनाई जा रही है नियमावली

नई शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप झारखंड में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई एक ही परिसर में संचालित करने के लिए नई नियमावली तैयार की जा रही है. इसके लिए गठित समिति ने 22 मई को अपनी अनुशंसाएं शिक्षा विभाग को सौंप दी हैं. हालांकि संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि समिति की अनुशंसाओं में कई ऐसी शर्तें शामिल की गई हैं, जिन्हें राज्य के अधिकांश वित्तरहित शिक्षण संस्थान पूरा नहीं कर पाएंगे. मोर्चा का कहना है कि नियमावली का वर्तमान प्रारूप संस्थानों की वास्तविक परिस्थितियों से मेल नहीं खाता और इसे लागू करने से बड़ी संख्या में शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व पर संकट खड़ा हो सकता है.

भवन और जमीन की शर्तों पर सबसे अधिक आपत्ति

संघर्ष मोर्चा के नेताओं ने कहा कि प्रस्तावित नियमावली में वित्तरहित संस्थानों के लिए दो एकड़ भूमि की अनिवार्यता रखी गई है, जबकि सरकारी विद्यालयों के लिए मात्र एक एकड़ भूमि का प्रावधान है. इसे भेदभावपूर्ण बताया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब वर्षों से संचालित और मान्यता प्राप्त संस्थान सीमित संसाधनों में शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, तो उनके लिए अचानक इतनी बड़ी भूमि की शर्त लागू करना व्यावहारिक नहीं है. इससे अनेक संस्थानों की मान्यता प्रभावित हो सकती है.

प्रयोगशाला और कंप्यूटर कक्ष की शर्तों पर भी विरोध

मोर्चा का कहना है कि नियमावली में चार प्रयोगशालाओं की अनिवार्यता रखी गई है, जिनमें प्रत्येक का क्षेत्रफल 1000 वर्ग फीट निर्धारित किया गया है. इसके अलावा कंप्यूटर कक्ष के लिए भी 1000 वर्ग फीट भवन की शर्त जोड़ी गई है. शिक्षकों का तर्क है कि राज्य के अधिकांश सरकारी प्लस टू विद्यालयों में भी इतनी बड़ी प्रयोगशालाएं उपलब्ध नहीं हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रयोगशाला कक्ष का क्षेत्रफल 600 वर्ग फीट तथा छात्र-छात्राओं के कॉमन रूम का क्षेत्रफल 300 वर्ग फीट निर्धारित किया जाना चाहिए.

सुरक्षा कोष की राशि को बताया अव्यावहारिक

संघर्ष मोर्चा ने सुरक्षा कोष की निर्धारित राशि पर भी आपत्ति जताई है. प्रस्तावित नियमावली में जनजातीय क्षेत्रों के संस्थानों के लिए चार लाख रुपये तथा सामान्य क्षेत्रों के लिए छह लाख रुपये सुरक्षा कोष का प्रावधान किया गया है. मोर्चा का कहना है कि यह राशि अधिकांश वित्तरहित संस्थानों की आर्थिक क्षमता से कहीं अधिक है. उन्होंने मांग की कि जनजातीय क्षेत्रों के लिए 75 हजार रुपये और सामान्य क्षेत्रों के लिए 1.50 लाख रुपये सुरक्षा कोष निर्धारित किया जाए.

पुराने नियमों के आधार पर मिली है मान्यता

शिक्षकों का कहना है कि राज्य के इंटरमीडिएट कॉलेजों को वर्ष 2005 की नियमावली तथा हाई स्कूलों को वर्ष 2008 की नियमावली के तहत मान्यता प्रदान की गई थी. वर्तमान में राज्य में लगभग 200 प्रस्वीकृत इंटरमीडिएट कॉलेज, 200 प्रस्वीकृत हाई स्कूल तथा 134 स्थापना अनुमति प्राप्त हाई स्कूल संचालित हैं. मोर्चा का कहना है कि इन संस्थानों ने पूर्व नियमों के अनुरूप आवश्यक व्यवस्थाएं विकसित की हैं. ऐसे में नई नियमावली लागू करने से पहले उनकी व्यावहारिक समस्याओं और सुझावों पर विचार किया जाना चाहिए.

सरकार से संवाद और संशोधन की मांग

संघर्ष मोर्चा ने शिक्षा सचिव से आग्रह किया है कि नियमावली को अंतिम रूप देने से पहले सभी स्टेक होल्डर्स के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाए. मोर्चा का कहना है कि बिना संवाद के बनाई गई नियमावली शिक्षा व्यवस्था में नई समस्याएं पैदा कर सकती है. मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि जब तक ड्राफ्ट में आवश्यक संशोधन नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. जरूरत पड़ने पर मामले को झारखंड हाईकोर्ट तक भी ले जाया जाएगा.

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12 जून का महाधरना होगा निर्णायक

संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष मंडल की बैठक में आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया गया है. 2 जून को ड्राफ्ट की प्रतियां जलाकर विरोध दर्ज कराया जाएगा, जबकि 12 जून को लोकभवन के सामने आयोजित महाधरना में राज्यभर के शिक्षक और कर्मचारी शामिल होंगे. बैठक में रघुनाथ सिंह, गणेश महतो, संजय कुमार, अरविंद सिंह, रघु विश्वकर्मा, नरोत्तम सिंह, फजलुल कादरी अहमद, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, रणजीत मिश्रा सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे. सभी ने एक स्वर में कहा कि शिक्षण संस्थानों के हितों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा और सरकार से नियमावली में व्यावहारिक संशोधन की मांग की जाएगी.

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