रांची: पढ़ाई के साथ Part-Time Job कर रहे 23 साल के छात्र की मौत, HC ने बढ़ाया मुआवजा; अब मिलेंगे 10.98 लाख रुपये

Updated:
विज्ञापन

झारखंड हाईकोर्ट

झारखंड हाइकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मारे गए 23 वर्षीय छात्र के परिजनों को मिलने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाकर ₹10.98 लाख कर दी है. अदालत ने आय के दस्तावेजों की कमी के बावजूद मृतक की आय का आकलन करते हुए यह फैसला सुनाया.

विज्ञापन

रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने सड़क दुर्घटना में मारे गये 23 वर्षीय छात्र के परिजनों को मिलनेवाले मुआवजे की राशि बढ़ाकर 10.98 लाख रुपये कर दी है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक की अदालत ने कहा कि पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम और ट्यूशन करनेवाले युवा की आय का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि उसकी पूरी आय से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं.

आपके शहर में

विज्ञापन

अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों को देखते हुए मृतक की मासिक आय 6,000 रुपये निर्धारित करना उचित माना. इससे पहले बोकारो क्लेम ट्रिब्यूनल ने 15 दिसंबर 2016 को मृतक के परिजनों को 7.07 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था. हाइकोर्ट के आदेश के बाद अब यह राशि बढ़कर 10.98 लाख रुपये हो गयी है.

आय प्रमाण-पत्र और मेकॉन का गेट पास अहम साक्ष्य

अदालत ने सुनवाई के दौरान रिकॉर्ड में मौजूद आय प्रमाण-पत्र का भी उल्लेख किया. इसमें मृतक को टेक्निकल एंड इंजीनियरिंग सेंटर में ड्राफ्ट्समैन के रूप में 4,500 रुपये मासिक भुगतान किये जाने की बात दर्ज थी. बीमा कंपनी की ओर से संस्था के पंजीकृत नहीं होने का आधार लेकर इस दस्तावेज पर सवाल उठाया गया था, लेकिन अदालत ने केवल इसी आधार पर आय प्रमाण-पत्र को खारिज करने से इनकार कर दिया.

मृतक के पास मेकॉन लिमिटेड, रांची का गेट पास भी था. अदालत ने इसे भी उसके वहां से जुड़े होने का संकेत माना. शैक्षणिक दस्तावेजों से भी यह स्पष्ट होता था कि वह पढ़ाई के साथ पार्ट टाइम काम कर रहा था.

यह भी पढ़ें: Dam Alert: मैथन-पंचेत में तेजी से बढ़ा जलस्तर, 10 गेट खोले गए; नदी किनारे रहने वालों को चेतावनी

ट्यूशन और पार्ट टाइम काम से भी होती थी आय

मामले में पेश गवाहों ने मृतक को ट्यूशन और पार्ट टाइम काम से करीब 4,500-4,500 रुपये मासिक आय होने की जानकारी दी थी. हालांकि अदालत ने पूरी मौखिक गवाही को ज्यों का त्यों स्वीकार नहीं किया. सभी उपलब्ध दस्तावेजों, परिस्थितियों और मौखिक साक्ष्यों को देखते हुए मृतक की मासिक आय 6,000 रुपये तय की गयी.

बीमा कंपनी की अपील खारिज

बीमा कंपनी ने मुआवजे के आकलन और 11 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज के प्रावधान को चुनौती दी थी. हाइकोर्ट ने बीमा कंपनी की अपील खारिज करते हुए बढ़ी हुई मुआवजा राशि देने का आदेश दिया.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि उचित मुआवजा सुनिश्चित करने के लिए अपीलीय अदालत के पास पर्याप्त अधिकार हैं. इसके लिए पीड़ित पक्ष की ओर से अलग से क्रॉस अपील या आपत्ति दायर किया जाना अनिवार्य नहीं है.

आठ सप्ताह में जमा करनी होगी बढ़ी हुई राशि

ट्रिब्यूनल द्वारा निर्धारित नौ प्रतिशत सालाना ब्याज की व्यवस्था को हाइकोर्ट ने बरकरार रखा है. निर्धारित समय पर भुगतान नहीं होने की स्थिति में 11 प्रतिशत ब्याज का प्रावधान भी लागू रहेगा.

बीमा कंपनी को बढ़ी हुई मुआवजा राशि आठ सप्ताह के भीतर ट्रिब्यूनल में जमा करने का निर्देश दिया गया है. इसके बाद कुल मुआवजा राशि चारों दावेदारों के बीच बराबर बांटी जायेगी.

उल्लेखनीय है कि बोकारो क्लेम ट्रिब्यूनल ने 15 दिसंबर 2016 को 7.07 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था. इसमें छह अगस्त 2015 से भुगतान होने तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज और निर्धारित समय पर भुगतान नहीं करने पर 11 प्रतिशत दंडात्मक ब्याज का प्रावधान किया गया था.

यह भी पढ़ें: Ranchi में 5 Coaching Centres सील, कहीं आपका बच्चा भी तो नहीं पढ़ रहा? जानें क्यों हुई कार्रवाई और क्या हैं नियम

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola