चिकित्सकों की लेटलतीफी से मरीज हो रहे और बीमार

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Mar 2018 5:46 AM

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कटिहार : सदर अस्पताल में कुव्यवस्था का आलम बरकरार है. लाखों खर्च के बावजूद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल रही है. ओपीडी में समय पर चिकित्सक नहीं आते हैं. मरीजों को घंटों जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है. भरती मरीजों का भी इलाज राम भरोसे है. विभिन्न तरह की जांच, एक्स-रे एवं […]

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कटिहार : सदर अस्पताल में कुव्यवस्था का आलम बरकरार है. लाखों खर्च के बावजूद मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवा नहीं मिल रही है. ओपीडी में समय पर चिकित्सक नहीं आते हैं. मरीजों को घंटों जांच के लिए इंतजार करना पड़ता है. भरती मरीजों का भी इलाज राम भरोसे है. विभिन्न तरह की जांच, एक्स-रे एवं अल्ट्रासाउंड जांच कराने में मरीज के पसीने छूट जाते हैं. शुक्रवार को प्रभात खबर की टीम ने सदर अस्पताल का जायजा लिया. सुबह 9:20 सदर अस्पताल के ओपीडी में अधिकांश चिकित्सक गायब थे.

कमरा संख्या 8 में शिशु बाह्य विभाग, कमरा संख्या सात महिला बाह्य विभाग में चिकित्सक नहीं थे. यहां बड़ी संख्या में मरीज चिकित्सक के आने का इंतजार कर रहे थे. कमरा संख्या पांच जांच घर में कोई कर्मी नहीं था.कमरा संख्या तीन ड्रेसिंग रूम में एक भी कर्मी नहीं था. मरीज ड्रेसिंग के लिए इधर-उधर भटक रहे थे. सुबह 10:25 गहन चिकित्सा केंद्र में सफाई कर्मी आराम करता मिला. पिछले आठ माह से सदर अस्पताल के एक्सरे की पुरानी मशीन खराब पड़ी हुई है.

शोपीस बना है यक्ष्मा विभाग : शुक्रवार को 10:00 बजे तक यक्ष्मा विभाग में चिकित्सक नहीं पहुंचने के कारण मरीजों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा. मरीज हाजीपुर निवासी शान मोहम्मद, नया टोला निवासी लक्ष्मीप्रसाद मंडल, लालगंज निवासी मोहम्मद रजा, कुरसेला निवासी सोनेलाल पोद्दार, हाजीपुर निवासी हबीबुर्रहमान, आबादपुर निवासी मो वाहिद ने बताया कि 8:00 बजे सुबह अस्पताल पहुंच गये हैं. अभी 10:00 बज रहा है. चिकित्सक के नहीं आने के कारण काफी कठिनाई हो रही है. चिकित्सक नियमित रूप से नहीं आते हैं. जिसके कारण समय पर मरीजों का इलाज नहीं हो पाता है.
एक जीएनएम के भरोसे नशामुक्ति केंद्र : सदर अस्पताल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में शुक्रवार को 10:00 बजे एक मात्र जीएनएम पूर्वी दास उपस्थित पायी गयी. शेष कर्मी नदारद थे. जबकि नशा मुक्ति केंद्र में तीन मरीज भरती थे. तीन मरीज का दायित्व तथा उनके परिजनों का दायित्व एकमात्र जीएनएम पूर्वी दास संभाल रही थी. जबकि नशा मुक्ति केंद्र में एक दर्जन से अधिक स्वास्थ्य कर्मी की प्रतिनियुक्ति है. इसके बावजूद भी नशा मुक्ति केंद्र में नियमित रूप से चिकित्सक एवं संबंधित स्वास्थ्य कर्मी नहीं आते हैं.
नर्स के भरोसे चल रहा प्रसव गृह : सदर अस्पताल स्थित प्रसव गृह एक नर्स के भरोसे संचालित किया जा रहा है. शुक्रवार को 10:55 जायजा लेने पहुंचे तो जीएनएम सोनी कुमारी ड्यूटी पर उपस्थित थी. सोनी कुमारी से पूछे जाने पर बताया कि महिला चिकित्सक डॉ कनक रंजन ओपीडी में है. शेष कर्मचारी के बारे में सही रुप से नहीं बता सकी. उन्होंने कहा कि आज 21 मरीज प्रसव गृह भरती है. जिसमें 18 मरीज पुरानी है. तीन महिला मरीज का प्रसव होना है. प्रसव गृह में विटामिन के इंजेक्शन पिछले तीन-चार दिनों से उपलब्ध नहीं है. अधिकांश दवा व जरूरी समान बाहर से खरीदनी पड़ रही है.
मलेरिया विभाग में नहीं थे पदाधिकारी व कर्मी : मलेरिया विभाग में नियमित रूप से अधिकारी व कर्मचारी नहीं आते हैं. जिसके कारण मलेरिया विभाग खुद बीमार पड़ता जा रहा है. मलेरिया विभाग का भवन अति जर्जर हो चुका है. शुक्रवार को 10:16 बजे मलेरिया कार्यालय में क्षेत्रीय कार्यकर्ता संजय सिंह एवं आदेशपाल भरत लाल पोद्दार उपस्थित थे. अन्य पदाधिकारी व कर्मचारी कार्यालय नहीं पहुंचे थे. आदेशपाल भरत लाल पोद्दार ने बताया कि मार्च क्लोजिंग के कार्य में पदाधिकारी व कर्मचारी काफी व्यस्त हैं.
ओपीडी में चिकित्सकों की दिलचस्पी नहीं
सदर अस्पताल के ओपीडी की स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है. चिकित्सक ओपीडी में समय देने से कतराते हैं. शुक्रवार को ओपीडी में अधिकांश चिकित्सक गायब थे. सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक ओपीडी का संचालन होता है. लेकिन 9.30 बजे तक चिकित्सक गायब थे. ओपीडी कमरा संख्या आठ शिशु बाह्य विभाग में चिकित्सक नहीं पहुंचने से मरीज काफी परेशान रहे. कमरा संख्या सात महिला बाह्य विभाग में महिला चिकित्सक 10:00 बजे पहुंची. मरीज सुबह 8:00 बजे से 10:00 बजे तक कमरा संख्या सात के दरवाजे के समक्ष कतारबद्ध होकर इंतजार करते रहे. कमरा संख्या पांच जांच घर के दरवाजे खुले हुए थे. दरवाजे के सामने दर्जनों मरीज जांच कराने के लिए खड़े थे, लेकिन जांच घर में एक भी स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित नहीं देखा गया. कमरा संख्या तीन ड्रेसिंग रूम के दरवाजे खुले हुए थे. लेकिन एक भी स्वास्थ्य कर्मी ड्रेसिंग रूम में उपस्थित नहीं थे.
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