किसानों को आजतक नहीं मिला डीजल अनुदान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 22 Nov 2015 6:52 PM

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किसानों को आजतक नहीं मिला डीजल अनुदानमजदूरी चुकाने में भी हो रही परेशानीसदर, दरभंगा. किसानों की बदहाली बढ़ती जा रही है. उसे समय पर खेती के लिए डीजल अनुदान की राशि नहीं मिलती. पटवन के लिय भी कहीं कोई सुविधा नहीं है. उपर से मजदूरी चुकाने में भी जेब ढीला करना पड़ता है. समय समय […]

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किसानों को आजतक नहीं मिला डीजल अनुदानमजदूरी चुकाने में भी हो रही परेशानीसदर, दरभंगा. किसानों की बदहाली बढ़ती जा रही है. उसे समय पर खेती के लिए डीजल अनुदान की राशि नहीं मिलती. पटवन के लिय भी कहीं कोई सुविधा नहीं है. उपर से मजदूरी चुकाने में भी जेब ढीला करना पड़ता है. समय समय पर वे अपना फसल उगाने के लिए महाजन से कर्ज लेकर पूंजी लगाते हैं, लेकिन अच्छी फसल नहीं होने पर उन्हें कर्ज के बोझ तले दबना पड़ता है. इस वर्ष बारिश नहीं होने को लेकर खरीफ फसल की उपज क ाफी कम हुई है. इसे लेकर किसानों में काफी तबाही झेलने पड़ रही है. अधिकांश किसान अपनी पुश्तैनी किसानी छोड़ने को मजबूर हैं. उनलोगों ने इसे छोड़ने का मन बना लिया है. एक ओर सरकार किसानों की हालात सुधारने के लिए समय समय पर कई लाभकारी योजनाओ की घोषणा करती रही है. लेकिन सही समय पर उसका संचालन नहीं होने से किसानों को लाभ से वंचित होना पड़ता है. इससे किसान दिन प्रतिदिन कर्ज के तले दबते हुए महाजन के चंगुल में फंसते जा रहे हैं. हालांकि वे विभागीय लापरवाही रहने की भी बात कहते हैं. मजदूरी के लिए जेब ढीला करना पड़ रहा है : किसानों को अपना फसल उगाने के लिए जेब ढीला करना पड़ रहा है. इस साल कम बारिश होने क ो लेकर उन्हें धान की फसल के लिए पटवन में अधिक पूंजी लगाना पड़ा. उपर से कटनी एवं तैयार कर घर ले जाने में 800 रुपये प्रति क्विंटल मजदूरी चुकाना पर रहा है. हालांकि प्रख्ंाड क्षेत्र में कहीं कम व कहीं ज्यादा मजदूरी भी देना पर रहा है: प्रखंड क्षेत्र केअधिकांश किसानों को अभीतक डीजल अनुदान की राशि नहीं मिल पायी है. उन्हे अगर ससमय यह राशि उपलब्ध हो गयी रहती तो किसान भाई को महाजन के कर्ज तले दबना नहीं पड़ता. वैसे विभागीय पदाधिकारी अधिकांश किसानों को डीजल अनुदान की राशि भुगतान करने का दावा कर रहें है. कहते हैं किसान: वासुदेवपुर के किसान राजकिशोर यादव ने अपने पांच बीघा भूमि में धान का फसल लगाये थे. उन्हें अभीतक किसी सरकारी लाभ नहीं मिल पाया है. वे कहते है कि किसानों की बदहाली का सरकार ही जिम्मेवार है. किसानो को मजदूरी चुकाने में जेब ढीला करना पड़ता है. उनका कहना है कि सरकार अगर जनवितरण प्रणाली को बंद कर दे तो किसान की हालत खुद सुधर जायेगा.बलहा के उदित यादव अपने ढाई बीघा खेत में धान का फसल लगाया था. उन्हें करीब 25 से 30 हजार रुपये पूंजी लगाना पड़ा. लेकिन उपज नहीं होने के कारण महाजन के कर्ज तले डूब चुके हैं. इसी तरह कितने ऐसे किसान हैं जो अभीतक सरकारी ला:किसान को भले ही फसल कम हुई हो लेकिन वे अपने धान को बाजार में औने पौने दामों पर बेचने को मजबूर हैं. सरकारी की तरफ से अभीतक धान का समर्थन मूल्य एवं बिक्री केंद्र खोलने का भी ऐलान नहीं किया गयाहै. किसान अपना किसानी छोड़ने पर मजबूर हैं: क्षेत्र के किसान अपना पुश्तैनी किसानी छोड़ने पर मजबूर हैं. उनका कहना है कि बारिश नहीं होने से सरकारी लाभ से वंचित रहने एवं कर्ज में डूब जाने को लेकर यह परेशानी सामने आ गयी है. अब वे लोग खेती से विमुख होते जा रहे हैं. उनका कहना है कि मेहनत और लागत लगाने के बावजूद अच्छी फसल प्राप्त नहीं हो पाने से विमुखता बढी है.कहते हैं अधिकारी प्रखंड कृषि पदाधिकारी विमिलेश मिश्र ने बताया कि चुनाव से पहले 11 लाख 75 हजार रुपये डीजल अनुदान की राशि बांटी जा चुकी है. इसमें सामान्य वर्ग के किसानों के बीच 10 लाख एवं अतिपिछड़ा के लिए 1 लाख 75 हजार रुपये दी गयी है. वर्त्तमान में 13 लाख का आवंटन आ चुका है. जांचकर लंबित आवेदकों के बीच राशि वितरित की जायेगी.

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