अपनी मौलिक पहचान के लिए कैथी जानना जरूरी : डॉ शिव कुमार मिश्रा

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अपनी मौलिक पहचान के लिए कैथी जानना जरूरी : डॉ शिव कुमार मिश्रा

डॉ मिश्र के अनुसार बिहार में विगत एक हजार वर्षों से कैथी लिपि का प्रयोग किया जाता रहा है.

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पटना/बिहारशरीफ. इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इन्टैक) नवादा चैप्टर द्वारा ब्राइट माइंड्स स्कूल, मंगला स्थान पथ, बिहार शरीफ में आयोजित त्रिदिवसीय कैथी लिपि प्रशिक्षण सह कार्यशाला को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए इन्टैक बिहार स्टेट चैप्टर के को कन्वेनर डॉ शिव कुमार मिश्र ने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपनी मौलिक पहचान जानने के लिए कैथी लिपि जानना आवश्यक है. डॉ मिश्र के अनुसार बिहार में विगत एक हजार वर्षों से कैथी लिपि का प्रयोग किया जाता रहा है. मधुबनी जिले के अंधराठाढ़ी, मधेपुरा जिले के श्रीनगर व कैमूर जिले के बैजनाथ मंदिर में एक हजार वर्ष पुरानी कैथी के शिलालेख मिले हैं, तो शेरशाह सूरी के समय से जमीन संबंधी कागजातों के लिए कैथी का प्रयोग होने लगा. दरभंगा महाराज के अलावा बेतिया राज, डुमरांव राज, बाबू वीर कुंवर सिंह की जमींदारी आदि से संबंधित सभी कागजात कैथी लिपि में लिखी गयी हैं. वर्तमान समय में जमीन के सर्वे के लिए कैथी जानना अत्यंत आवश्यक है. इस लिपि से रोजगार सृजन में भी वृद्धि होती है. निफ्ट पटना के प्रो जयंत कुमार ने लिपि के उद्भव एवं विकास के विषय में विस्तार से जानकारी प्रदान करते हुए कहा कि सम्राट अशोक के स्तंभों पर ब्राह्मी लिपि में सूचना उत्कीर्ण है, जो बिहार की सबसे पुरानी लिपि है तथा इसी से अन्य लिपियों की उत्पत्ति हुई है. मौके पर इन्टैक नवादा चैप्टर के कन्वेनर डाॅ बच्चन कुमार पाण्डेय ने कैथी लिपि के महत्व को रेखांकित करते हुए आगत अतिथियों का अभिनंदन किया.

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By Amlesh Prasad

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