बिहार की धरती पर उतरता है बैकुंठ, मलमास में राजगीर बन जाता है 33 कोटि देवी-देवताओं का निवास स्थान

मलमास मेला की मनोरम तस्वीर
Malmas Mela 2026 : नालंदा जिले का राजगीर सिर्फ एक ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी नहीं, बल्कि सनातन आस्था का ऐसा केंद्र है. जहां पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र माह में 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं. जिसके कारण यह स्थल धरती का बैकुंठ कहलाता है.
(नालंदा से रामविलास की रिपोर्ट)
Malmas Mela 2026 : नालंदा जिले का राजगीर सिर्फ एक ऐतिहासिक और पर्यटन नगरी नहीं, बल्कि सनातन आस्था का ऐसा केंद्र है. जहां पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) के दौरान आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस पवित्र माह में 33 कोटि देवी-देवता राजगीर में निवास करते हैं. जिसके कारण यह स्थल धरती का बैकुंठ कहलाता है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु यहां पहुंचकर स्नान, पूजा, तप और दान के माध्यम से धर्म लाभ प्राप्त करते हैं.
पुरुषोत्तम मास में राजगीर बन जाता है देवलोक
धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार प्रत्येक तीन वर्ष पर आने वाला पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इस अवधि में राजगीर का आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है. मान्यता है कि एक माह तक 33 कोटि देवी-देवताओं का यहां प्रवास रहता है, जिससे पूरा क्षेत्र दिव्य वातावरण से भर उठता है.
देश-दुनिया से उमड़ता है आस्था का सैलाब
पुरुषोत्तम मास मेले के दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र समेत देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु राजगीर पहुंचते हैं. इसके अलावा नेपाल, मॉरीशस और अन्य देशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आकर पूजा-अर्चना और कल्पवास करते हैं. यही वजह है कि यह मेला अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर चुका है.
ब्रह्मकुंड और सप्तधारा में स्नान का विशेष महत्व
मेला अवधि में श्रद्धालु ब्रह्मकुंड, सप्तधारा और अन्य पवित्र जलस्रोतों में स्नान कर धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान और स्नान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. प्रतिदिन हवन, यज्ञ, भागवत कथा, रामकथा, भजन-कीर्तन और सत्संग का आयोजन होता है.
पिंडदान और तर्पण के लिए भी खास है राजगीर
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पुरुषोत्तम मास में राजगीर में पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को विशेष तृप्ति प्राप्त होती है. वैतरणी तट पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध कर्म और पिंडदान कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं.
राष्ट्रीय मेले का दर्जा मिलने की उठ रही मांग
इतनी विशाल धार्मिक और अंतरराष्ट्रीय पहचान के बावजूद राजगीर का पुरुषोत्तम मास मेला अभी राजकीय मेले के रूप में ही आयोजित होता है. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि इसे राष्ट्रीय मेले का दर्जा मिलना चाहिए, जिससे इसकी वैश्विक पहचान और सुविधाओं का विस्तार हो सके.
आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का जीवंत उत्सव
राजगीर का पुरुषोत्तम मास मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक विरासत, संस्कृति और सनातन परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह आयोजन श्रद्धालुओं को आत्मशुद्धि, ईश्वर भक्ति और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ते हुए राजगीर को विश्व आध्यात्मिक मानचित्र पर एक विशेष पहचान प्रदान करता है.
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By विवेक सिंह
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