जदयू नेता श्रवण कुमार आठवीं बार बने मंत्री

जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले श्रवण कुमार गुरुवार को आठवीं बार मंत्री पद की शपथ लेकर राजनीति में अपनी मजबूती का परिचय दिया.
बिहारशरीफ. जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाने वाले श्रवण कुमार गुरुवार को आठवीं बार मंत्री पद की शपथ लेकर राजनीति में अपनी मजबूती का परिचय दिया. वे पटना के गांधी मैदान में आयोजित समारोह में मंत्री पद की शपथ ली. मंत्री श्रवण कुमार लगातार 1995 से नालंदा विधानसभा के विधायक हैं और अब तक कुल आठ बार मंत्री बने हैं. छात्र नेता से अपनी राजनीति की शुरूआत करने वाले श्रवण कुमार वैचारिक दृढ़ता और नेतृत्व के प्रति अटूट निष्ठा के लिए जाने जाते हैं. जेपी आंदोलन की तपिश में खुद को तपाने के बाद उन्होंने जननायक कर्पूरी ठाकुर के सानिध्य में लोकदल से अपने राजनीतिक जीवन की विधिवत शुरुआत की. शुरुआती चुनावी डगर उनके लिए आसान नहीं रही, उन्हें लोकदल के टिकट पर नालंदा विधानसभा के उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन हार के बाद भी उन्होंने हौसला बनाए रखा. श्रवण कुमार की संगठन क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे युवा जनता दल और फिर जनता दल के बिहार प्रदेश महासचिव पद की जिम्मेदारी संभालते हुए संगठन की धुरी बने रहे. 1994 में जब नीतीश कुमार और जॉर्ज फर्नांडीस ने जनता दल से अलग होकर नई पार्टी बनाई, तब श्रवण कुमार ने जनता दल बिहार के महासचिव पद से इस्तीफा देकर नीतीश के नेतृत्व में आस्था व्यक्त की. 1995 के विधानसभा चुनाव में श्रवण कुमार ने नालंदा विधानसभा से 44 हजार मतों से जीत दर्ज की और तब से वे नीतीश कुमार के विश्वसनीय साथी बने हुए हैं. 2005 से नीतीश के मुख्यमंत्री बनने के बाद श्रवण कुमार जदयू के मुख्य सचेतक रहे. जनता दल के विभाजन और समता पार्टी (अब जदयू) के गठन के बाद से वे नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शामिल रहे. 1995 के बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और नालंदा विधानसभा क्षेत्र से लगातार जीत का परचम लहराते आ रहे हैं.
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