जाम से कराह रही है सड़क, बेचैन हैं जिंदगियां

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बांका : शहर के बीचोंबीच सड़क पर बेखौफ ओवरलोड गाड़ियां फर्राटें भर रही हैं. समय चाहे दोपहर का हो या शाम का. हर वक्त चौक-चौराहे पर जहां देखो जाम ही जाम नजर आता है. छोटे-बड़े वाहनों के हॉर्न का शोर लोगों को परेशान कर रहा है. सबको जल्दी पड़ी है, गंतव्य स्थान पर पहुंचना है. […]

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बांका : शहर के बीचोंबीच सड़क पर बेखौफ ओवरलोड गाड़ियां फर्राटें भर रही हैं. समय चाहे दोपहर का हो या शाम का. हर वक्त चौक-चौराहे पर जहां देखो जाम ही जाम नजर आता है. छोटे-बड़े वाहनों के हॉर्न का शोर लोगों को परेशान कर रहा है. सबको जल्दी पड़ी है, गंतव्य स्थान पर पहुंचना है.

दायें बायें से कोई फर्क नहीं पड़ता. जिधर थोड़ी बहुत जगह मिले, पतली गली पाकर आगे बढ़ते जाना है. ट्रैफिक व्यवस्था लगभग मूकदर्शक बना रहता है. बांका शहर सहित आसपास के बाजारों में भी कमोबेश स्थिति यही है. जाम की समस्या से लोग रोज दो चार हो रहे हैं. आखिर आम अवाम को इस जाम से कब निदान मिलेगा? इस सवाल का जवाब शायद आलाधिकारी के पास ठीक ठीक नहीं है. इस विकट समस्या का समाधान आखिरकार कब तक होगा? कौन है इसका जिम्मेवार, प्रशासन या पब्लिक?

बस स्टैंड पर है बदइंतजामी

बांका-भागलपुर रोड स्थित पुराने बस स्टैंड, जिसे लोग सरकारी बस पड़ाव के नाम से भी जाना जाता है, पर कुव्यवस्था का आलम है. शौचालय परिसर में स्थानीय लोग निजी वाहन की पार्किग करते हैं. शौचालय के प्रवेश द्वार की ग्रील गेट कुछ खास लोगों की मर्जी से खुलता व बंद होता है. ऐसे में आम जनों को शौचालय का लाभ नहीं मिल रहा है. पेयजल के नाम पर एकमात्र चापानल से यात्राियों की प्यास कुछ माह पहले तक बुझती थी. इस चापानल के खराब होने से करीब सात माह बीत चुके हैं, पर इसकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है. यात्राी शेड दिखावा है. यहां बरसात या धूप से बचना मुश्किल है. शेड की दीवारें तो हैं पर इसकी छत निर्माण काल से अब तक कभी ढलाई नहीं हो पायी है. ऐसे में शहर के सरकारी बस पड़ाव के यात्राी शेड में लोगों को खुले आसमान के नीचे गाड़ी का इंतजार करना पड़ता है. उधर, बांका कटोरिया रोड स्थित विजयनगर चौक के करीब प्राइवेट बस स्टैंड यहां से भागलपुर, देवघर, जसीडीह, कटोरिया, बेलहर, जमुई, सिमुलतुल्ला, झाझा सहित अन्य मुख्य स्थानों की गाड़ियां खुलती हैं.

इस बस पड़ाव में यात्राी सुविधा के नाम पर एक मात्र चापानल जिसके चारों ओर कूड़े का अंबार पसरा हुआ है. शाम होते ही अंधेरा छा जाता है यहां कोई भी रोशनी की व्यवस्था नहीं है. शौचालय यात्राियों के लिए बस दिखावा मात्र है. इस परिसर का उपयोग प्रबंधक अपने काम के लिए ही करते हैं.

ट्रैफिक व्यवस्था है दिखावा

शहर के गांधी व शिवाजी चौक पर ट्रैफिक कं ट्रोल के लिए पुलिस बल की व्यवस्था की गयी है. दोनों चौक पर एक दो की संख्या में पुलिस जवान तैनात भी रहते हैं. इसके बावजूद बड़ी वाहनों को भी मर्जी के अनुसार ग्रीन सिगAल दे दिया जात है. इससे सड़क जाम की स्थिति बनी रहती है. इस दौरान कभी कभी एंबुलेंस भी जाम में फस जाता है, जिससे रेफर मरीज की जान पर बन आती है.

वहीं ओवरलोड गाड़ियों के परिचालन से आम राहगीरों के अलावे स्कूली बच्चे भी परेशान हो जाते हैं. हालांकि, सड़क जाम से निबटने की दिशा में स्थानीय प्रशासन द्वारा करीब छह माह पूर्व शहर को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था. कु छ दिनों तक जाम से आंशिक तौर पर लोगों को राहत मिली पर कुछ ही दिनों के बाद सिमटी दुकानों ने सड़क किनारे फिर से पांव पसार दिया. ऐसे में स्थिति जस की तस फिर से बनी हुई है.

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