परमाणु विद्युत संयंत्र पर नहीं बनी सहमति, ग्रामीणों ने मिट्टी जांच से किया इनकार
कटहराटांड़ गांव में प्रस्तावित परमाणु विद्युत संयंत्र को लेकर ग्रामीणों के साथ वार्ता करते प्रशासनिक अधिकारी.
Nuclear Power Plant Protest Banka: बेलहर के कटहराटांड़ में प्रस्तावित परमाणु विद्युत संयंत्र को लेकर प्रशासन और ग्रामीणों की वार्ता बेनतीजा रही. मिट्टी जांच का भी विरोध हुआ.
बेलहर (बांका) से अभय कुमार ‘सोनू’ की रिपोर्ट:
Nuclear Power Plant Protest Banka: प्रखंड क्षेत्र की रघुनाथपुर पंचायत में प्रस्तावित परमाणु विद्युत संयंत्र निर्माण को लेकर जिला प्रशासन और ग्रामीणों के बीच शनिवार को हुई वार्ता बेनतीजा रही. कटहराटांड़ गांव में आयोजित बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से मिट्टी जांच कार्य में सहयोग की अपील की, लेकिन ग्रामीणों ने एक स्वर में इसका विरोध करते हुए किसी भी प्रकार की जांच नहीं होने देने की बात कही.
प्रशासनिक अधिकारियों ने की ग्रामीणों से सीधी बातचीत
प्रस्तावित परमाणु विद्युत संयंत्र को लेकर लगातार चल रहे विरोध के बीच जिला प्रशासन ग्रामीणों से संवाद स्थापित करने के लिए कटहराटांड़ गांव पहुंचा. बैठक में डीसी उपेंद्र सिंह, एसडीओ राजकुमार, एसडीपीओ रविंद्र मोहन प्रसाद, एनटीपीसी के एडीएम, सीओ शशिकांत शुक्ला, बीडीओ कुमार सौरव, थानाध्यक्ष राजू कुमार ठाकुर समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे.
वहीं ग्रामीण जीवन बचाओ, जमीन बचाओ संघर्ष समिति रघुनाथपुर पंचायत के बैनर तले सैकड़ों की संख्या में महिला, पुरुष, युवा, छात्र-छात्राएं और बुजुर्ग पहले से ही एकत्रित थे.
मिट्टी जांच के लिए सहयोग की अपील
अधिकारियों ने ग्रामीणों को बताया कि परमाणु विद्युत संयंत्र की स्थापना से पहले विभिन्न चरणों में मिट्टी और पर्यावरणीय मानकों की जांच की जाती है. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया लगभग दो से ढाई वर्ष तक चल सकती है और सभी मौसमों में अलग-अलग परीक्षण किए जाएंगे.
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रारंभिक चरण में केवल सरकारी भूमि पर मिट्टी जांच का कार्य प्रस्तावित है और जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी.
ग्रामीणों ने जताई आशंकाएं
अधिकारियों की बात सुनने के बाद ग्रामीणों ने विरोध जताते हुए कहा कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी प्रकार की मिट्टी जांच नहीं होने देंगे. ग्रामीणों का कहना था कि यदि यहां परमाणु विद्युत संयंत्र स्थापित हुआ तो बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का सामना करना पड़ेगा.
ग्रामीणों ने आशंका व्यक्त की कि परियोजना के कारण उनकी जमीन, घर और आजीविका प्रभावित होगी. साथ ही उन्हें रोजगार के पर्याप्त अवसर भी नहीं मिल पाएंगे.

घंटों चली बातचीत, नहीं बनी सहमति
बैठक के दौरान अधिकारियों ने ग्रामीणों को समझाने का काफी प्रयास किया, लेकिन विरोध कर रहे लोग अपने रुख पर कायम रहे. इसके बाद प्रशासन ने चिन्हित गांवों के प्रतिनिधियों के साथ अलग से वार्ता करने का प्रस्ताव रखा.
प्रतिनिधि टीम से होगी अगली बैठक
एसडीओ राजकुमार ने बताया कि ग्रामीणों के साथ सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत हुई है. प्रशासन ने उनकी चिंताओं को सुना है और उन्हें परियोजना से जुड़ी जानकारी देने का प्रयास किया है.
उन्होंने कहा कि जल्द ही प्रभावित एवं चिन्हित गांवों के प्रतिनिधियों की एक टीम के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि आपसी संवाद के माध्यम से समाधान का रास्ता निकाला जा सके और मिट्टी जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके.

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