प्राथमिक शिक्षकों के तबादले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने लगायी रोक, जानें नयी एसओपी पर कब होगी सुनवाई

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कलकत्ता हाईकोर्ट.

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों व शिक्षाकर्मियों के सरप्लस तबादले पर अंतरिम रोक लगा दी है. राज्य सरकार नयी एसओपी के तहत प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है, लेकिन तबादले के आदेश जारी नहीं होंगे. अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी.

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पश्चिम बंगाल के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों व शिक्षाकर्मियों के ‘सरप्लस’ तबादले पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम रोक लगा दी है. बुधवार को न्यायमूर्ति विभाष पटनायक ने निर्देश दिया कि राज्य सरकार अगली सुनवाई तक किसी भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी का सरप्लस के आधार पर तबादला नहीं करेगी. हालांकि, सरकार नयी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत आंतरिक प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रख सकती है. इच्छुक शिक्षकों से आवेदन भी ले सकती है. मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह बुधवार (12 अगस्त) को होगी.

नयी एसओपी को दी गयी चुनौती

राज्य सरकार ने हाल ही में सरप्लस तबादले के लिए 15 जुलाई और 24 जुलाई को 2 नयी एसओपी जारी की थी. इसके तहत पहले स्वेच्छा से स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों से आवेदन मांगे गये थे. सरकार ने यह भी संकेत दिया था कि आवश्यकता पड़ने पर बाद में अन्य शिक्षकों के तबादले पर भी निर्णय लिया जायेगा. इन दोनों एसओपी को चुनौती देते हुए कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

याचिकाकर्ताओं की दलील

  • सरप्लस तबादले में प्राथमिकता तय करने के मानदंड स्पष्ट नहीं हैं.
  • यह नहीं बताया गया है कि प्राथमिकता अधिक आयु वाले शिक्षकों को मिलेगी या अधिक सेवा अवधि वाले शिक्षकों को. इसलिए पूरी प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति है.

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प्रशासनिक प्रक्रिया जारी रहेगी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसओपी के आधार पर फिलहाल किसी भी शिक्षक या शिक्षाकर्मी का तबादला नहीं किया जायेगा. हालांकि, सरकार आवश्यक सूचनाएं एकत्र करने और अन्य प्रशासनिक तैयारियां जारी रख सकती है. यानी आवेदन लेने और प्रक्रिया संबंधी कार्यों पर रोक नहीं होगी, लेकिन तबादले के आदेश जारी नहीं किये जा सकेंगे.

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सरकार क्यों लायी सरप्लस ट्रांसफर पॉलिसी?

वर्ष 2009 के शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुसार प्रत्येक 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक का अनुपात आदर्श माना गया है. राज्य के कई प्राथमिक विद्यालयों में यह संतुलन नहीं है. कुछ स्कूलों में विद्यार्थियों की तुलना में शिक्षकों की संख्या अधिक है, जबकि कई विद्यालयों में छात्रों की संख्या अधिक होने के बावजूद शिक्षकों की कमी है. इसी असंतुलन को दूर करने के लिए राज्य सरकार ने सरप्लस तबादला नीति लागू करने का निर्णय लिया था.

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मिथिलेश झा

लेखक के बारे में

By मिथिलेश झा

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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