अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीति ने अगर H-1B वीजा को किया समाप्त तो, हजारों भारतीयों पर गिर सकती है गाज

Edited by Rajneesh Anand
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

US President Donald Trump : डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका के 47वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ले ली है और उन्होंने अपने संबोधन में यह साफ कहा है कि उन्हें अमेरिका का राष्ट्रपति दोबारा बनने का अवसर इसलिए मिला है कि ताकि अमेरिका को एक बार फिर महान बनाया जाए. डोनाल्ड ट्रंप ने जो संकेत दिए हैं, उससे यह साफ जाहिर है कि अमेरिका फर्स्ट की नीति उनकी प्राथमिकता है. अमेरिका फर्स्ट नीति को कारगर बनाने के लिए ट्रंप प्रशासन कड़े कदम उठा रही है, ऐसे में सवाल यह है कि क्या ट्रंप प्रशासन H-1B वीजा को समाप्त कर देगा? अगर ऐसा हुआ तो हजारों भारतीयों की नौकरी जाएगी और उन्हें अमेरिका छोड़ना पड़ सकता है.

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US President Donald Trump : अमेरिका के नव निर्वार्चित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पद की शपथ ले ली है और अब  समय आ गया है कि चुनाव के वक्त जो वायदे किए गए थे उन्हें पूरा किया जाए. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बार-बार यह दोहराया है कि उनकी नीतियां अमेरिका फर्स्ट की होगी, जिसमें देश में अब जो निर्णय लिए जाएंगे उसमें अमेरिकियों का हित सर्वोपरि होगा. किसी भी फैसले से अमेरिकियों को होने वाले नुकसान के बारे में सोचकर ही कोई फैसला किया जाएगा. चुनाव प्रचार के दौरान डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी विवेक रामास्वामी ने भी यह स्पष्ट कहा था कि अमेरिकियों के हित में वे H-1B वीजा को समाप्त कर देंगे. हालांकि अब रामास्वामी ट्रंप प्रशासन का हिस्सा नहीं हैं.

क्या है अमेरिका फर्स्ट नीति

अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं. इस आदेश में अमेरिकी विदेश विभाग को यह निर्देश दिया गया है कि वे विदेश नीति अमेरिकी हितों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए बनाएं. ट्रंप की सरकार प्राथमिकता तय करने में अमेरिका और उसके नागरिकों को हर चीज से ऊपर रखेगी. डोनाल्ड ट्रंप ने यह आदेश अमेरिकी सीनेट द्वारा मार्को रुबियो को विदेश मंत्री के रूप में स्वीकार कर लिए जाने के बाद आया है. चुनावी भाषणों के दौरान ही ट्रंप ने यह स्पष्ट कर दिया था कि अगर वे सत्ता में होते तो रूस-यूक्रेन युद्ध नहीं होता. डोनाल्ड ट्रंप जिस अमेरिका फर्स्ट नीति का समर्थन कर रहे हैं वो ये कहता है कि पहले अपने नागरिकों का हित सोचो. इस लिहाज से ट्रंप और उनकी सरकार रूस और यूक्रेन युद्ध में यूक्रेन पर पैसे खर्च करना रोक सकती है और उन पैसों का इस्तेमाल मैक्सिको की सीमा पर अवैध प्रवासियों को रोकने के लिए कर सकती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन से किनारा करने का ट्रंप का फैसला भी अमेरिका फर्स्ट पाॅलिसी को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम प्रतीत होता है. नागरिकता को लेकर भी ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी फर्स्ट के सिद्धांत को ही सामने रखा है. ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि अब किसी भी प्रवासी को अमेरिका की नागरिकता नहीं मिलेगी. अब जन्म के आधार पर प्रवासियों के बच्चों को जो नागरिकता मिल जाती है, वह अब संभव नहीं होगा.

भारत और अमेरिका के संबंधों पर क्या होगा असर?

Mukesh and Nita Ambani with Donald Trump
मुकेश और नीता अंबानी डोनाल्ड ट्रंप के साथ

अबतक डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह की बयानबाजी की है, उससे यह तो प्रतीत हो रहा है कि भारत-अमेरिका संबंध में कुछ खास सकारात्मक नहीं होने वाला है. अगर डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका फर्स्ट की नीतियों को ज्यादा सख्ती से लागू करेंगे तो भारतीयों को नुकसान हो सकता है. साथ ही टैरिफ बढ़ाने से व्यापार पर भी असर होगा. लेकिन चीन के साथ व्यापार कम करने के अमेरिकी फैसले से भारत को फायदा ही होगा, क्योंकि अगर वे चीन के साथ संबंध नहीं रखेंगे तो भारते के साथ व्यापार करेंगे. ट्रंप को यह पता है कि भारत जैसी बढ़ती अर्थव्यवस्था को वो इग्नोर करके अपना ही नुकसान करेंगे, इसलिए उन्होंने भारत के प्रतिनिधि विदेश मंत्री एस जयशंकर को अपने शपथग्रहण समारोह में पहली पंक्ति में जगह दी और अपने इरादे को स्पष्ट कर दिया है कि भारत के साथ अमेरिका के संबंध कैसे हो सकते हैं. हालांकि अगर एच 1 बी वीजा को ट्रंप प्रशासन ने समाप्त किया, तो भारत से अमेरिका जाकर काम करने वालों पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है, जिसकी घोषणा ट्रंप ने चुनावों के दौरान की थी. H-1B वीजा लेकर भी अमेरिका सरकार कड़े निर्णय ले सकती है.

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ट्रंप के अन्य महत्वपूर्ण फैसले जिनकी हो रही है चर्चा

अमेरिका के नए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई ऐसे फैसले लिए हैं जिनकी चर्चा हो रही है. इसमें सर्वप्रमुख है अमेरिका की आव्रजन नीति( immigration policy of us). डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका की नौकरियों पर पहला हक अमेरिकियों का है, लेकिन प्रवासी उसमें भी दखलंदाजी करते हैं. उन्हें एक बार वीजा मिल जाने से वे वहां की नागरिकता प्राप्त करने के अधिकारी बन जाते हैं, जिसे रोकना ट्रंप सरकार का उद्देश्य है. वे अमेरिका-मेक्सिकों की सीमा पर दीवार को पूरा कराने की बात कर रहे हैं, ताकि उधर से अवैध रूप से प्रवासी अमेरिका में प्रवेश ना करें.प्रवासियों के कानूनी प्रवेश को रोकने के लिए बनाए गए एप को भी समाप्त कर दिया गया है.राष्ट्रीय सुरक्षा का ध्यान रखते हुए ट्रंप ने यह घोषणा भी की है कि वे पनामा नहर को वापस अपने अधिकार में लेंगे क्योंकि पनामा नहर को बनाने में हजारों अमेरिकन मारे गए थे.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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