रूसी सरकार का ऐलान– काम से ब्रेक लीजिए और डेट पर जाइए; 2050 के बाद भारत में भी बन सकती है ये स्थिति

व्लादिमीर पुतिन
Vladimir Putin : काम से ब्रेक लीजिए और डेट पर जाइए, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के इस बयान के बाद अब रूसी सरकार यह विचार कर रही है कि जोड़ों को साथ समय बिताने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए उनके होटल में रुकने का खर्च सरकार उठाए. साथ ही गर्भधारण की स्थिति में जोड़ों को इंसेंटिव भी उपलब्ध कराई जाए.
Vladimir Putin : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जब नागरिकों को काम से छुट्टी लेकर साथ समय बिताने और बच्चा पैदा करने की सलाह दी थी, तो उनके बयान से यह स्पष्ट हो गया था कि रूसी सरकार किस कदर देश की घटती जनसंख्या से चिंतित है. अब रूसी सरकार एक ऐसा मंत्रालय बनाने पर विचार कर रही है, जो लोगों को आकर्षक पैकेज देकर उन्हें साथ समय बिताने के लिए मजबूर करे, ताकि देश के घटते जन्म दर को रोका जा सके.
जन्मदर को बढ़ाने के लिए विशेष मंत्रालय
रूस में पिछले 25 वर्षों में सबसे कम जन्म दर की स्थिति बन गई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय सांख्यिकी एजेंसी, Rosstat ने बताया है कि 2024 की पहली छमाही में रूस में सिर्फ 599,600 बच्चे पैदा हुए, जो 1999 के बाद से सबसे कम है. इस रिपोर्ट के बाद रूसी सरकार बहुत ही चिंता में है और देश के भविष्य को खराब होने से बचाने के लिए सरकार विशेष मंत्रालय बनाने पर विचार कर रही है. जनसंख्या में गिरावट को रोकने के लिए कई तरह के विचार आने के बाद रूसी सरकार मंत्रालय बनाने के विचार पर सहमत नजर आ रही है. रूस का यह प्रस्ताव सुनने में विचित्र लग सकता हो लेकिन इसका पूरा फोकस जन्म दर बढ़ाने पर होगा. व्लादिमीर पुतिन की कट्टर समर्थक और रूसी संसद की पारिवारिक सुरक्षा समिति की अध्यक्ष नीना ओस्तानिना का कहना है कि जिस तरह सैन्य अभियान बिना रूके चलता है उसी तरह देश को विशेष जनसंख्या अभियान की जरूरत है. चीन और जापान जैसे देशों ने भी अपने देश में जनसंख्या बढ़ाने के लिए कई सकारात्मक प्रयास किए हैं और कई ऑफर भी दिए हैं.
रूस में आखिर क्यों बनी यह विचित्र स्थिति

द मिरर का दावा है कि रूसी अधिकारी देश की घटती जनसंख्या को रोकने और उसमें वृद्धि के लिए कई तरह के प्रस्ताव दे रहे हैं. जिसमें रात के दस बजे से सुबह दो बजे तक इंटरनेट बंद करने और रात को लाइट बंद करने की सलाह भी दे रही है. उनका अनुमान है कि ऐसा करने से जोड़ों के बीच करीबी बढ़ेगी और वे ज्यादा रोमांटिक हो पाएंगे. वहीं एक प्रस्ताव यह भी है कि सरकार पहली डेट पर जाने वाले कपल को 5,000 रूबल यानी 4,302 रुपये तक दे. सरकार ने अपनी तरफ से कई प्रयास भी शुरू कर दिए हैं जिसके तहत महिलाओं से बेहद निजी सवाल जैसे उनके पीरियड्स के डेट, गर्भनिरोधक के तरीकों पर सवाल पूछे जा रहे हैं. इसका उद्देश्य महज यह है कि किसी भी तरह महिलाओं को मां बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और देश को घटते जन्म दर के प्रभाव से बचाया जाए. जो लोग इस बारे में विचार नहीं करेंगे सरकार उनपर जुर्माना लगाने की तैयारी में भी नजर आ रही है.
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घटते जन्मदर से विश्व परेशान
विश्व के अधिकांश देश लगातार घटते जन्मदर से परेशान नजर आ रहे हैं, जिसमें रूस, चीन, जापान और कनाडा सबसे ऊपर है. इसके अलावा कुछ अन्य देश भी हैं, जो आने वाले वर्षों में घटते जन्मदर और बढ़ते बूढ़ों की संख्या से घबरा सकते हैं. इसमें भारत का नाम सबसे ऊपर होगा, क्योंकि अभी भारत में युवाओं की संख्या विश्व में सबसे अधिक है और जन्म दर प्रति महिला लगभग 2 है, जो आने वाले वर्षों में घटकर 1.75 तक जा सकता है. भारत में 356 मिलियन यानी 35 करोड़ 60 लाख के करीब युवा हैं, जो अभी विश्व में सबसे अधिक है. लेकिन 2050 तक भारत में बुजुर्गों की संख्या दोगुनी हो जाएगी और लगभग 35 करोड़ बुजुर्ग भारत में होंगे, यानी विश्व में जितने भी बुजुर्ग होंगे उसका 17 प्रतिशत भारत में होगा. जन्मदर में गिरावट और मृत्युदर में कमी होने की वजह से यह स्थिति बन रही है..
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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