भारत को भी गौरवान्वित करती अनिल मेनन की उपलब्धि

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अनिल मेनन

अनिल मेनन

नासा के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचना भारत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है. यह मिशन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारतीय प्रतिभा की वैश्विक पहचान और देश की बढ़ती अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का प्रमाण है.

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चौदह जुलाई को मानव अंतरिक्ष अन्वेषण के इतिहास में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया. नासा के भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री अनिल मेनन कजाखस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से सोयुज अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आइएसएस) पहुंच गये. वे लगभग आठ महीने वहां रहेंगे. इस तरह के सभी मिशन विज्ञान और मानव ज्ञान को आगे बढ़ाते है, पर अनिल मेनन की यह यात्रा भारत के लिए एक विशेष भावनात्मक और प्रेरणादायक महत्व रखती है. वह भले ही नासा के अंतरिक्ष यात्री हैं, लेकिन उनकी भारतीय जड़ें करोड़ों भारतीयों को गर्व का अनुभव कराती हैं.

उनका यह मिशन केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि भारतीय प्रतिभा आज पूरी दुनिया में विज्ञान और तकनीक के सर्वोच्च स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है. अंतरिक्ष की यात्रा मानव जिज्ञासा, साहस, ज्ञान और नयी सीमाओं को पार करने की अदम्य इच्छा की कहानी है. हर अंतरिक्ष मिशन हमें ब्रह्मांड के बारे में कुछ नया सिखाता है, नयी तकनीकों को जन्म देता है और अन्य देशों को मिलकर काम करने का अवसर देता है. यह मिशन भी इसी महान परंपरा का हिस्सा है. अनिल केवल एक अंतरिक्ष यात्री ही नहीं हैं, वह एक बहुआयामी व्यक्तित्व हैं, जिन्हे विभिन्न विषयों का ज्ञान है. आइएसएस मानव इतिहास की बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धियों में से एक है.

यह अंतरिक्ष में बना एक बड़ा वैज्ञानिक केंद्र है, जहां अलग तरह के वैज्ञानिक प्रयोग किये जाते हैं. यह अंतरिक्ष से पृथ्वी और ब्रह्मांड का अध्ययन करने के लिए एक अहम जगह है. यह पृथ्वी से लगभग 450 किलोमीटर ऊपर स्थित है और लगभग 28 हजार किलोमीटर प्रति घंटे की गति से पृथ्वी की परिक्रमा करता है. वर्ष 2000 से इसमें लगातार विभिन्न देशों के अंतरिक्ष यात्री रह रहे हैं. यहां गुरुत्वाकर्षण लगभग न के बराबर होता है. इसी कारण यहां ऐसे वैज्ञानिक शोध किये जा सकते हैं जो पृथ्वी पर संभव नहीं हैं. इसका संचालन अमेरिका, रूस, यूरोप, जापान और कनाडा की अंतरिक्ष एजेंसियां मिलकर करती हैं. अंतरिक्ष में सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण के कारण पानी, मानव शरीर, पौधों, भौतिक तथा रासायनिक प्रक्रियाएं पृथ्वी से भिन्न होती हैं. वैज्ञानिक इन परिस्थितियों का अध्ययन करके नयी दवाइयां विकसित करते हैं,

बेहतर सामग्री तैयार करते हैं, भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की योजना बनाते हैं और मानव स्वास्थ्य के बारे में नयी जानकारियां प्राप्त करते हैं. अनिल का यह मिशन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम नयी ऊंचाइयों को छू रहा है. इसरो ने पिछले कुछ वर्षों में चंद्रयान, आदित्ययान, मंगलयान तथा अनेक संचार और पृथ्वी अवलोकन उपग्रहों के माध्यम से पूरी दुनिया में अपनी क्षमता का परिचय दिया है. अब भारत ‘गगनयान’ मिशन की तैयारी कर रहा है. गगनयान भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करेगा जो स्वयं के अंतरिक्ष यान से अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने और सुरक्षित वापस लाने की क्षमता रखते हैं.

आइएसएस पर होने वाला प्रत्येक शोध इसरो और भारत के वैज्ञानिक को भी अध्ययन करने और उनसे नयी तकनीकों तथा योजनाओं के विकास में सहायता करेगा. विज्ञान की यही खूबी है कि यह देशों को सीमाओं में नहीं बांटता, बल्कि यह पूरी मानवता की साझा धरोहर है और मानव कल्याण के लिए प्रोत्साहित करता है. भारत हमेशा अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग का समर्थक रहा है. इसरो ने कम लागत में विश्वस्तरीय तकनीक विकसित करके पूरी दुनिया में सम्मान प्राप्त किया है. आने वाले वर्षों में भारत तथा अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच सहयोग और भी मजबूत होगा. भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी तेजी से विकसित हो रहा है और निजी अंतरिक्ष उद्योग आने वाले वर्षों में लाखों नये रोजगार पैदा करेंगे. ऐसे समय में भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों की सफलता भारत के लिए गर्व की बात है.

सामान्य नागरिक की दृष्टि से देखें, तो यह मिशन केवल वैज्ञानिकों तक सीमित नहीं है. आज मौसम की सटीक जानकारी, मोबाइल संचार, इंटरनेट, जीपीएस, ऑनलाइन बैंकिंग, आपदा प्रबंधन, कृषि सलाह, समुद्री मत्स्य पालन, पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन की निगरानी जैसे अनेक कार्य अंतरिक्ष तकनीक पर निर्भर हैं. अंतरिक्ष अनुसंधान में होने वाली प्रगति और अनिल मेनन का सीमाओं से परे यह कदम अंततः मनुष्य के जीवन को बेहतर बनाने में योगदान देगा. लेकिन शायद इस मिशन का सबसे बड़ा महत्व प्रेरणा में छिपा है. मानव सभ्यता को आगे बढ़ाने के लिए कुछ लोगों ने अज्ञात को जानने का साहस किया. जब कोई बच्चा रॉकेट को उड़ते हुए देखता है, तो उसके मन में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा पैदा होती है.

यही जिज्ञासा आगे चलकर किसी वैज्ञानिक, डॉक्टर, इंजीनियर या अंतरिक्ष यात्री को जन्म देती है. इसलिए, इस तरह के अंतरिक्ष अभियान केवल वैज्ञानिक प्रयोग नहीं हैं, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों के सपनों को आकार देते हैं. भारत दुनिया की सबसे युवा जनसंख्या वाले देशों में से एक है. यदि इस युवा शक्ति को विज्ञान, तकनीक और नवाचार की दिशा में प्रेरित किया जाये, तो भारत आने वाले समय में विश्व का अग्रणी वैज्ञानिक राष्ट्र बन सकता है. इस तरह के मिशन और अनिल मेनन का जीवन बताता है कि सफलता प्रतिभा के साथ-साथ अनुशासन, कठिन परिश्रम, निरंतर अध्ययन और धैर्य से मिलती है. (ये लेखक के निजी विचार हैं.)


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पीके जोशी

लेखक के बारे में

By पीके जोशी

सेंटर फॉर स्पेस साइंस एंड टेक्नोलोजी एजूकेशन इन एशिया एंड पैसिफिक से संबद्ध रहे हैं.

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