कोलकाता मेट्रो की 16 ट्रेनें होंगी चालक रहित, इस्ट-वेस्ट कॉरिडोर पर यात्रियों की 5 से 7 मिनट तक की होगी बचत

कलकत्ता मेट्रो
कोलकाता की ईस्ट-वेस्ट मेट्रो (ग्रीन लाइन) जल्द ही चालक रहित (ड्राइवरलेस) होने वाली है. कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद, 16 मेट्रो रैक में ऑटोमैटिक ट्रेन ऑपरेशन (एटीओ) सिस्टम सक्रिय किया जाएगा. यह आधुनिक तकनीक न केवल सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि यात्रा के समय में भी 5-7 मिनट की बचत करेगी.
कोलकाता से श्रीकांत शर्मा की रिपोर्ट
इस्ट-वेस्ट मेट्रो रेलवे एक बार फिर नया कीर्तिमान बनाने की ओर अग्रसर है. कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही इस्ट-वेस्ट मेट्रो (ग्रीन लाइन) कॉरिडोर में बिना पायलट (ड्राइवर) के मेट्रो रवाना होगी. अनुमति मिलने के साथ ही मेट्रो रेलवे ने इस दिशा में अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं. मिली जानकारी के अनुसार, मेट्रो अपने 16 मेट्रो रैक में ऑटोमैटिक ट्रेन ऑपरेशन (एटीओ) सिस्टम को सक्रिय करने जा रहा है. इसके साथ ही इस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के सभी 12 स्टेशनों में अत्याधुनिक कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी - संचार आधारित ट्रेन नियंत्रण) सिग्नल सिस्टम को इंस्टॉल करने का काम पूरा कर लिया गया है.
सेंट्रल पार्क कंट्रोल रूम से होगा संचालन
मेट्रो से मिली जानकारी के अनुसार, शुरुआत में इस आधुनिक सिस्टम के लिए कोलकाता मेट्रो की ग्रीन लाइन पर चलने वाली सभी 16 ट्रेनों को ‘चालक रहित’ तकनीक से अपग्रेड किया जा रहा है. सीआरएस द्वारा सफल सुरक्षा निरीक्षण और हरी झंडी मिलने के बाद अब ट्रेनों को एटीओ मोड पर चलाने की अंतिम प्रक्रिया जारी है. अब इन ट्रेनों का नियंत्रण सीधे सॉल्टलेक सेंट्रल पार्क स्थित ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) में बैठे रेल अधिकारियों द्वारा रिमोट के जरिये किया जायेगा. हालांकि, यात्रियों की सुरक्षा और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए शुरुआत में मेट्रो के केबिन में पायलट मौजूद रहेंगे, लेकिन ट्रेन का पूरा संचालन ओसीसी से ही होगा.
ट्रायल रहे पूरी तरह सफल
कोलकाता मेट्रो रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी एसएस कन्नान ने बताया कि चालक रहित मेट्रो ट्रेन का ट्रायल इस्ट-वेस्ट कॉरिडोर में कई बार सफलतापूर्वक किया जा चुका है. पिछले रविवार को ही कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी ने खुद चालक रहित मेट्रो में यात्रा कर सुरक्षा मानकों का जायजा लिया था. गहन तकनीकी मंथन के बाद उन्होंने हावड़ा मैदान से साल्टलेक सेक्टर-5 तक हुगली नदी के नीचे से गुजरने वाले इस पूरे 16.6 किलोमीटर के रूट पर ड्राइवरलेस संचालन की अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है. वर्तमान में इस ग्रीन लाइन रूट पर कुल 16 रैक चलते हैं, जो रोजाना 228 ट्रिप्स लगाते हैं. पीक आवर्स में ये ट्रेनें पांच-पांच मिनट के अंतराल पर चलती हैं.
दिल्ली और बेंगलुरु के बाद कोलकाता में शुरू होगी सेवा
मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि इस तकनीक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें मानवीय भूल के कारण होने वाली दुर्घटनाओं की संभावना शून्य के बराबर हो जाती है. ऑटोमैटिक मोड पर चलने से समय की काफी बचत होगी और ट्रेनों की गति नियंत्रित रहेगी. इस तकनीक से हावड़ा मैदान से सॉल्टलेक सेक्टर-5 के बीच की दूरी तय करने में सामान्य चालक युक्त मेट्रो के मुकाबले करीब 5 से 7 मिनट कम समय लगेगा. वर्तमान में देश के भीतर केवल दिल्ली मेट्रो की मजेंटा व पिंक लाइन और बेंगलुरु की येलो लाइन पर ही ड्राइवरलेस मेट्रो सेवाएं संचालित हो रही हैं.
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जानिये क्या है सीबीटीसी तकनीक और कैसे करती है काम
कम्युनिकेशन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल (सीबीटीसी) एक बेहद आधुनिक रेलवे सिग्नलिंग प्रणाली है, जो स्वचालित ट्रेन संचालन (एटीओ) को संभव बनाती है. यह रेडियो संचार तकनीक के माध्यम से चलती हुई ट्रेनों और ट्रैक उपकरणों के बीच सटीक और रियल टाइम डेटा का आदान-प्रदान करती है. इस प्रणाली में सुरक्षा के उच्चतम स्तर का उपयोग किया जाता है, जिससे न्यूनतम दूरी पर भी दो ट्रेनें बिना किसी खतरे के ट्रैक पर सुरक्षित दौड़ सकती हैं. इससे न केवल मेट्रो के फेरे बढ़ाये जा सकेंगे, बल्कि संचालन दक्षता में भी बड़ा सुधार होगा.
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लेखक के बारे में
By आशीष झा
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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