आखिर UPSC इतना डरा क्यों रहा है? पटना वाले Eduteria का Exclusive Interview

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हमने पटना के मशहूर इंस्टिट्यूट Eduteria के साथ UPSC परीक्षा के बदलते स्वरूप के बारे में खास बातचीत की

हमने पटना के मशहूर इंस्टिट्यूट Eduteria के साथ UPSC परीक्षा के बदलते स्वरूप के बारे में खास बातचीत की

हमने UPSC के बदलते ट्रेंड्स के बारे में पटना के मशहूर इंस्टिट्यूट 'Eduteria' के COO अमृत उपाध्याय से बात की. एडुटेरिया की स्थापना जाने-माने एजुकेटर प्रवीण सर ने की थी.

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जोहार. आज 16 जुलाई है. UPSC मेन्स परीक्षा में अब सिर्फ एक महीना बचा है. फिर बहुत से लोग हार मान लेंगे... जबकि कुछ लोग नई हिम्मत जुटाकर फिर से कोशिश करेंगे. UPSC हर किसी के बस की बात नहीं है, बॉस...

'यार... ये सवाल तो कभी देखा ही नहीं!'

अक्सर UPSC Prelims के बाद हर साल Telegram Groups, WhatsApp Chats और X (Twitter) पर एक ही discussion शुरू हो जाता है.

‘इतने Unknown Questions.’
‘ये syllabus के बाहर था…’
‘इतना पढ़ने के बाद भी Paper कैसे बिगड़ गया?’

अगर आपने कभी UPSC की तैयारी की है, तो ये बातें जरूर सुनी होंगी.

लेकिन क्या सच में UPSC हर साल Surprise देता है? या फिर हम अभी भी पुराने तरीके से तैयारी कर रहे हैं?

इन्हीं सवालों को लेकर प्रभात खबर ने बात की Eduteria के COO अमृत उपाध्याय से. एडुटेरिया की स्थापना जाने-माने एजुकेटर प्रवीण सर ने की थी.

वर्षों से UPSC Aspirants के साथ काम कर रहे अमृत मानते हैं कि सबसे बड़ा बदलाव सिलेबस में नहीं, UPSC की सोच में आया है.

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UPSC आपको फंसाता नहीं... आपकी Thinking को Test करता है

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

UPSC की परीक्षा भारत की सबसे अनिश्चित परीक्षाओं में से एक मानी जाती है क्योंकि इसमें लगातार बदलाव हुए हैं. पहले यह सिर्फ तथ्यों की जानकारी परखती थी.

लेकिन अब यह कॉन्सेप्ट की समझ, एनालिटिकल सोच और नई स्थितियों में जानकारी का इस्तेमाल करने की क्षमता को परखती है.

उन परीक्षाओं के उलट जिनका पैटर्न तय होता है, UPSC जानबूझकर हर साल सवालों का तरीका बदलती है ताकि रटने और कोचिंग-आधारित तैयारी को हतोत्साहित किया जा सके.

नतीजतन, उम्मीदवारों को अक्सर ऐसे मुश्किल या अप्रत्याशित सवाल मिलते हैं जो पहली नजर में तो अनजान लगते हैं, लेकिन लॉजिकल सोच और कॉन्सेप्ट की मजबूत समझ से उनका जवाब दिया जा सकता है.
यह अनिश्चितता अचानक या बिना सोचे-समझे नहीं होती, बल्कि यह ऐसे उम्मीदवारों को पहचानने की एक सोची-समझी कोशिश है जो क्रिटिकली सोच सकें, अलग-अलग विषयों के विचारों को जोड़ सकें और अनिश्चितता के माहौल में सही फैसले ले सकें, ये सभी गुण एक अच्छे सिविल सर्वेंट के लिए जरूरी हैं.
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रटने का दौर खत्म... अब Concept का दौर है.

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

UPSC परीक्षा के पैटर्न में सबसे बड़े बदलावों में से एक है सीधे, तथ्यों पर आधारित सवालों की जगह कॉन्सेप्ट पर आधारित सवालों का आना. पहले, उम्मीदवार स्टैंडर्ड किताबों से तथ्यों को रटकर काम चला लेते थे, लेकिन आज के सवालों के लिए बुनियादी सिद्धांतों की गहरी समझ जरूरी है.

सीधे तथ्यों वाले सवाल पूछने के बजाय, UPSC अब ऐसी स्थितियां देता है जिनमें उम्मीदवारों को कॉन्सेप्ट को समझना, इंटर-सब्जेक्ट्स रिलेशनशिप का विश्लेषण करना और नई स्थितियों में अपने ज्ञान का इस्तेमाल करना होता है. इस बदलाव से यह पक्का होता है कि सफलता याददाश्त के बजाय समझ पर ज्यादा निर्भर करती है.
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Real Life में Geography अलग नहीं, Economy अलग नहीं...

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

आधुनिक UPSC परीक्षा की एक और खास बात इसका 'इंटरडिसिप्लिनरी' (कई विषयों को आपस में जोड़ने वाला) स्वरूप है. इसमें पूछे जाने वाले सवाल अक्सर भूगोल, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था, विज्ञान और तकनीक, राजनीति, अंतरराष्ट्रीय संबंध और इतिहास जैसे कई विषयों की अवधारणाओं को मिलाकर बनाए जाते हैं.

UPSC यह नहीं चाहता कि उम्मीदवार इन विषयों को अलग-अलग खानों की तरह देखें, बल्कि वह चाहता है कि वे समझें कि असल दुनिया के शासन-प्रशासन में ये विषय आपस में कैसे जुड़े हुए हैं.
यह मिला-जुला नजरिया लोक प्रशासन की जटिलता को दिखाता है, जहां नीतिगत समस्याओं को हल करने के लिए अक्सर एक ही समय में कई क्षेत्रों के ज्ञान की जरूरत पड़ती है.
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'अभिनंदन सम्मान समारोह📍Bapu Sabhagar, Patna  4 July will always remain a memorable day for EDU TERIA. It was a matter of great pride for us to celebrate the historic achievement of 1000+ selected officers from the 70th BPSC together with all of you.  – Team EDU TERIA' Courtesy- LinkedIn
'अभिनंदन सम्मान समारोह📍Bapu Sabhagar, Patna 4 July will always remain a memorable day for EDU TERIA. It was a matter of great pride for us to celebrate the historic achievement of 1000+ selected officers from the 70th BPSC together with all of you. – Team EDU TERIA' Courtesy- LinkedIn

Current Affairs रटने से Selection नहीं होगा...

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

परीक्षा में करंट अफेयर्स की भूमिका में भी काफी बदलाव आया है. हाल की घटनाओं के बारे में सीधे सवाल पूछने के बजाय, UPSC स्थिर कॉन्सेप्ट्स (static concepts) को परखने के लिए समकालीन घटनाओं का इस्तेमाल करता है.

उदाहरण के लिए, किसी अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन पर आधारित सवाल असल में उस घटना के बजाय उम्मीदवार की जलवायु वित्त, जैव-विविधता संरक्षण, कार्बन बाजार या पर्यावरण गवर्नेंस की समझ को परख सकता है.

इसलिए, उम्मीदवारों को सिर्फ समाचारों की हेडलाइंस रटने के बजाय करंट अफेयर्स को बुनियादी कॉन्सेप्ट्स से जोड़ने की क्षमता विकसित करनी चाहिए.

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‘Statement Based Questions का Game समझिए’

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

परीक्षा अब काफी हद तक एनालिटिकल रीजनिंग (विश्लेषणात्मक तर्क) और एलिमिनेशन तकनीकों पर निर्भर हो गई है. पेपर में स्टेटमेंट-बेस्ड (कथन-आधारित) सवाल ज्यादा होते हैं. इनमें अक्सर कई ऐसे कथन होते हैं जो सही लग सकते हैं, लेकिन उनमें बारीक अंतर होता है.

"केवल" (only), "सभी" (all), "जरूरी तौर पर" (necessarily) या "मुख्य रूप से" (primarily) जैसे छोटे शब्द जवाब के सही होने का फैसला कर सकते हैं. कई मामलों में, उम्मीदवार इसलिए सफल होते हैं क्योंकि वे कॉन्सेप्ट की स्पष्टता और लॉजिकल रीजनिंग के जरिए गलत विकल्पों को हटा सकते हैं. इससे सतही जानकारी के बजाय बातों को गहराई से समझने की क्षमता ज्यादा अहम हो जाती है.
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Unknown Questions से डरना क्यों नहीं चाहिए?

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

अनिश्चितता को और बढ़ाने वाली बात यह है कि UPSC हर साल ऐसे विषयों से सवाल पूछता है जो अनजान या कम चर्चित होते हैं. परीक्षा में अक्सर कम जानी-पहचानी प्रजातियों, नई तकनीकों, खास अंतरराष्ट्रीय संगठनों या इतिहास की कम चर्चित घटनाओं जैसे विषय आते हैं.

इन सवालों का मकसद अनजान तथ्यों को रटने की क्षमता को परखना नहीं, बल्कि उम्मीदवार की जानकारी का दायरा और बुनियादी सिद्धांतों का इस्तेमाल करके अनजान जानकारी के बारे में तर्क करने की क्षमता को परखना होता है. जब उम्मीदवार ऐसे विषयों का सामना करते हैं जिन्हें उन्होंने सीधे तौर पर कभी नहीं पढ़ा होता, तब भी उनकी मजबूत वैचारिक समझ उन्हें सही जवाब तक पहुंचने में मदद करती है.

ट्रेंड में बदलाव का एक साफ संकेत रटकर सीखने की घटती अहमियत है. हर साल, हजारों उम्मीदवार कोचिंग के कई राउंड के नोट्स पूरे करते हैं, फैक्ट शीट्स याद करते हैं और पिछले सालों के सैकड़ों सवाल हल करते हैं.

फिर भी, कई उम्मीदवार परीक्षा हॉल में मुश्किल में पड़ जाते हैं क्योंकि अब पेपर में रटने के बजाय समझ को ज्यादा महत्व दिया जाता है. UPSC अब यह नहीं पूछता कि उम्मीदवार ने कोई खास फैक्ट पहले देखा है या नहीं, बल्कि यह देखता है कि क्या उम्मीदवार बुनियादी कॉन्सेप्ट्स का इस्तेमाल करके किसी अनजान स्थिति में सही तर्क दे सकता है.

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Courtesy: LinkedIn
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AI, Climate Change और Geopolitics अब Optional Topic नहीं हैं!

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

एप्लीकेशन-बेस्ड और एनालिटिकल सवालों के आने से यह ट्रेंड और मजबूत हुआ है. चाहे टॉपिक क्लाइमेट चेंज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बायोटेक्नोलॉजी, जियोपॉलिटिक्स, संवैधानिक शासन या इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स से जुड़ा हो, परीक्षा अब सिर्फ जानकारी को दोहराने के बजाय घटनाओं या बदलावों को समझने और उनकी व्याख्या करने की क्षमता को परखती है.

उम्मीदवारों से यह उम्मीद की जाती है कि वे समझें कि कोई मुद्दा क्यों अहम है, अलग-अलग कारक एक-दूसरे से कैसे जुड़े हैं, और शासन और समाज पर इसके क्या असर होते हैं.

यह बदलता हुआ पैटर्न भारत के भविष्य के सिविल सेवकों से बढ़ती उम्मीदों को भी दिखाता है.
आज के एडमिनिस्ट्रेटर ऐसे माहौल में काम करते हैं जो टेक्नोलॉजी में बड़े बदलाव, जलवायु से जुड़े जोखिम, ग्लोबल सप्लाई चेन, डिजिटल गवर्नेंस, साइबर सिक्योरिटी, आबादी में बदलाव और जटिल सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से बना है.
सही फैसले लेने के लिए बौद्धिक लचीलेपन, आलोचनात्मक सोच और लगातार सीखने की क्षमता की जरूरत होती है. जो परीक्षा सिर्फ रटने की क्षमता को परखती है, वह ऐसे गुणों की पहचान नहीं कर पाएगी.
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Coaching का Role भी बदल गया है?

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

कोचिंग सिस्टम के सामने भी एक बड़ी चुनौती है. पारंपरिक तरीके, जो बहुत ज्यादा नोट्स बनाने और 'संभावित सवालों' का अंदाजा लगाने पर केंद्रित थे, अब तेजी से नाकाफी साबित हो रहे हैं.

हालांकि कोचिंग संस्थान ढांचा और मार्गदर्शन देने में अहम भूमिका निभाते रहेंगे, लेकिन उनकी कामयाबी अब इस बात पर कम निर्भर करती है कि वे कितना कंटेंट देते हैं, बल्कि इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि वे कॉन्सेप्ट की समझ, जिज्ञासा और विश्लेषणात्मक सोच को कितना बेहतर बना पाते हैं.
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‘इतना पढ़ने के बाद भी Selection क्यों नहीं होता?’

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

तैयारी करने वालों के लिए, बदलते हालात एक जरूरी सीख देते हैं. तैयारी का तरीका ऐसा होना चाहिए जिसमें सिर्फ स्टडी मटीरियल को पढ़ा न जाए, बल्कि विचारों पर सक्रिय रूप से काम किया जाए.

स्टैंडर्ड टेक्स्टबुक पढ़ने के साथ-साथ अखबार, सरकारी रिपोर्ट, वैज्ञानिक विकास, अंतरराष्ट्रीय मामले, आर्थिक ट्रेंड और पब्लिक पॉलिसी पर जानकारीपूर्ण चर्चाओं को भी शामिल करना चाहिए। यह पूछने के बजाय कि 'क्या यह टॉपिक मेरे नोट्स में शामिल है?'

उम्मीदवारों को यह पूछना चाहिए कि 'क्या मैं इस कॉन्सेप्ट को इतनी अच्छी तरह समझता हूं कि इसे किसी नए संदर्भ में लागू कर सकूं'?
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‘आज का Aspirant क्या अलग करे?’

अमृत उपाध्याय (COO, Eduteria):

UPSC की परीक्षा हमेशा से सिर्फ याददाश्त की परीक्षा से कहीं ज्यादा रही है. आज यह बात और भी साफ होती जा रही है.

कॉन्सेप्ट की गहरी समझ, अलग-अलग विषयों को जोड़कर सोचने की क्षमता और असल दुनिया की जानकारी पर बढ़ता जोर, काबिलियत के एक व्यापक नजरिए को दिखाता है- एक ऐसा नजरिया जो बहुत सारी जानकारी रटने के बजाय बौद्धिक रूप से लचीले होने और समझदारी को ज्यादा अहमियत देता है.

ऐसे दौर में जब जानकारी तो तुरंत मिल जाती है लेकिन सही समझ या परख की कमी है, UPSC ऐसे उम्मीदवार की तलाश में नहीं दिखता जो सबसे ज्यादा बातें याद रखता हो, बल्कि ऐसे उम्मीदवार की तलाश में है जो चीजों को सबसे बेहतर ढंग से समझता हो.
इस बदलाव से हो सकता है कि परीक्षा का अंदाज़ा लगाना मुश्किल हो जाए, लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि यह इसे और ज्यादा सार्थक बनाता है.
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अचल प्रियदर्शी

लेखक के बारे में

By अचल प्रियदर्शी

अचल प्रियदर्शी (Achal Priyadarshy) अंतरराष्ट्रीय संबंधों, इंडिक एवं इंडीजीनस अध्ययन के जानकार, शिक्षाविद् और 32 पुस्तकों के लेखक हैं.

उन्होंने केंद्रीय मंत्री के राजनीतिक सहायक के तौर पर काम किया है, तथा ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट (TRI)- रांची और झारखंड सरकार के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (DoFECC) के साथ भी कार्य किया है.

उन्होंने सैकड़ों UPSC अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन किया है, और अंतरराष्ट्रीय संबंधों व समसामयिक विषयों पर उनके विश्लेषणात्मक लेख नियमित रूप से UPSC-केंद्रित पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं.

साहित्य और जनजातीय इतिहास में उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें वर्ष 2025 में आयोजित जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल के उद्घाटन संस्करण में उनकी पुस्तक Tribal Bravehearts के लिए शब्द-शिल्पी सम्मान से सम्मानित किया गया. शैक्षणिक रूप से, उन्होंने हार्वर्ड डिविनिटी स्कूल से Religion, Peace and Conflict विषय में अध्ययन किया है.

ये उनकी कुछ लोकप्रिय किताबें हैं;

  1. Pakistan State, Armed Influenconomy (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  2. बिहार जनादेश 2025 (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  3. International Relations: UPSC & State Civil Services Examinations (Oakbridge Publishing) (2026)

  4. ब्रांड हेमंत (स्वतंत्र प्रकाशन) (2025)

  5. झारखण्ड की जनजाति समाज और समय का संकट (प्रकाशन संसथान) (2026)

  6. जनजातीय शूरवीर (प्रभात प्रकाशन) (2026)

  7. Know Your State: Jharkhand (अरिहंत प्रकाशन) (2025)

  8. उत्तर प्रदेश सामान्य ज्ञान (क्राउन पुब्लिकेशन्स) (2024)

  9. बिहार सामान्य ज्ञान (उपकार प्रकाशन) (2024)

  10. International Relations for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

  11. Internal Security & Disaster Management for UPSC Mains (Pratiyogita Darpan) (2024)

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