अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में मचाया आतंक, 2 भारतीय जहाजों को किया पार
होर्मुज स्ट्रेट में अफरातफरी
Hormuz : युद्ध के 13वें दिन ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ा दिया है. वह कई जहाजों पर हमले कर रहा है, ताकि इस समुद्री मार्ग से तेल की ढुलाई बंद हो जाये और विश्व को व्यापक ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ जाये और अमेरिका पर युद्ध रोकने का दबाव बने.
Hormuz : अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बमबारी शुरू कर दी है . न्यूज एजेंसियों के अनुसार अबतक 16 जहाजों को निशाना बनाया गया है. होर्मुज इलाके में बढ़ते तनाव को देखते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के सामने अपनी चिंता को रखा और शिपिंग सुरक्षा के मसले को उठाया. यह जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से दी गई है.
भारत के दो जहाज ने पार किया होर्मुज स्ट्रेट
ईरान युद्ध के बाद से होर्मुज स्ट्रेट बाधित है, जिसकी वजह से तेल की सप्लाई सुचारू रूप से नहीं हो पा रही है. एस जयशंकर ने जब ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से कई बार बात किया तो होर्मुज स्ट्रेट से दो भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकलने दिया गया है. विदेश मंत्री की बातचीत जहाजों के सुरक्षित आवाजाही और तेल की सप्लाई को स्थिर बनाये रखने पर केंद्रित था. ईरान ने पिछले दिनों कई जहाजों को टारगेट किया है, जिसकी वजह से इलाके में अफरा–तफरी मच गई है.
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में क्यों मचाया आतंक?
ईरान पर लगातार हमला करके अमेरिका उसे सरेंडर करने के लिए मजबूर करना चाहता है. युद्ध के 13वें दिन भी डोनाल्ड ट्रंप का रुख धमकी भरा ही है और शांति की कोई पहल नहीं दिख रही है. इस स्थिति में ईरान ने भी अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज स्ट्रेज पर आतंक मचाना शुरू कर दिया है, ताकि पूरे विश्व में तेल और गैस की कमी हो जाये. होर्मुज स्ट्रेट से अगर तेल वाहक जहाज शांतिपूर्वक गुजर नहीं पायेंगे तो पूरे विश्व में तेल और गैस की सप्लाई पर असर पड़ेगा, जिसकी वजह से अमेरिका पर युद्ध रोकने का दबाव बनेगा और यही ईरान की रणनीति है.
क्यों खास है होर्मुज स्ट्रेट?
होर्मुज स्ट्रेट, फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है. यह विश्व के सबसे प्रमुख तेल मार्गों में शामिल है, जहां से विश्व का 20% तेल गुजरता है लेकिन युद्ध की वजह से इस मार्ग में बाधा आ रही है. कई जहाजों के फंसे होने की बात कही जा रही है. अगर इस मार्ग से तेलवाहक जहाजों का आवागमन बंद हुआ तो वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई घट जाएगी जिसकी वजह से तेल की कीमत बढ़ेगी. साथ ही सभी देशों का आयात खर्च भी बढ़ेगा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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