इनकम टैक्स भर के बेफिक्र न हों, इन 6 वजहों से फंस सकती है आपकी फाइल

Edited by Soumya Shahdeo
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Income Tax Scrutiny: क्या आपने ITR फाइल कर दिया है? सावधान रहें, क्योंकि आयकर विभाग ने स्क्रूटनी के लिए 6 नए नियम जारी किए हैं. जानें कहीं आपका केस तो लिस्ट में नहीं है?

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Income Tax Scrutiny: समय पर इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल कर देना ही काफी नहीं है. आयकर विभाग (CBDT) ने फाइनेंशियल ईयर 2026-27 के लिए नए नियम जारी किए हैं. इसके तहत कुछ खास मामलों में ‘कम्पलसरी स्क्रूटनी’ (अनिवार्य जांच) होगी. अगर आप इन 6 कैटेगरी में आते हैं, तो आपकी फाइल की गहराई से जांच हो सकती है.

किन लोगों की फाइलों की होगी बारीकी से जांच?

आयकर विभाग ने 6 ‘सिनारियो कोड’ (CS01 से CS06) तय किए हैं, जिनके तहत इन मामलों की ऑटोमैटिक जांच होगी:

  1. सर्वे वाले केस: अगर 1 अप्रैल 2024 के बाद आपकी प्रॉपर्टी या ऑफिस में विभाग ने सर्वे (धारा 133A) किया है, तो आपको स्क्रूटनी का सामना करना पड़ सकता है. (नोट: केवल TDS वेरिफिकेशन वाले सर्वे इसमें शामिल नहीं हैं).
  2. सर्च और सीजर: अगर 1 अप्रैल 2024 के बाद आपके खिलाफ सर्च ऑपरेशन हुआ है या बेहिसाब संपत्ति मिलने का मामला है, तो आपकी फाइल ऑटोमैटिकली ही जांच के दायरे में आ जाएगी.
  3. पुराने केस दोबारा खुलना: जिन लोगों को धारा 148 के तहत नोटिस मिला है (यानी विभाग को लगता है कि आपने अपनी आय सही से नहीं दिखाई), उनके केस की पूरी जांच होगी.
  4. ट्रस्ट और संस्थाएं: अगर किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन (जैसे 12A, 12AB, 10(23C)) कैंसिल हो गया है, फिर भी वे ITR-7 में छूट का दावा कर रहे हैं, तो विभाग ऐसे मामलों को सीधे टारगेट करेगा.
  5. बार-बार होने वाले विवाद: अगर पिछले सालों में टैक्स विवादों में आपकी तरफ से बड़ी राशि (मेट्रो शहरों में 50 लाख रुपये और अन्य शहरों में 20 लाख रुपये से ज्यादा) का मामला विभाग के हक में रहा है, तो अब आपकी फाइल फिर से जांची जाएगी.
  6. टैक्स चोरी की पुख्ता जानकारी: अगर किसी सरकारी एजेंसी के पास आपके खिलाफ टैक्स चोरी की कोई ठोस जानकारी है, तो आपकी क्लीन फाइल होने के बावजूद स्क्रूटनी हो सकती है.

अब कैसे बचें परेशानियों से?

आजकल इनकम टैक्स विभाग डेटा एनालिटिक्स और टेक्नोलॉजी का भरपूर इस्तेमाल कर रहा है. विभाग के पास हर छोटी-बड़ी वित्तीय जानकारी मौजूद है. इसलिए, अपनी टैक्स फाइलिंग को ‘बस एक फॉर्मैलिटीज’ न समझें. अपने सभी सोर्सेज ऑफ इनकम की सही जानकारी दें और जो भी छूट या डिडक्शन ले रहे हैं, उनके पुख्ता सबूत संभाल कर रखें. अपनी बैंक स्टेटमेंट, बड़े इनवेस्टमेंट और रिटर्न में दी गई जानकारी को आपस में मैच करना न भूलें. 

क्या स्क्रूटनी का मतलब गलती होना है?

बिल्कुल नहीं. स्क्रूटनी का मतलब यह नहीं है कि आपने कुछ गलत ही किया है, लेकिन यह एक लंबी प्रक्रिया हो सकती है. इसमें विभाग के साथ लंबे समय तक कागजी कार्यवाही और जवाब-सवाल का दौर चलता है. इसलिए, स्मार्ट तरीका यही है कि आप ट्रांसपेरेंसी बरतें और अपने रिकॉर्ड्स को हमेशा अपडेट रखें ताकि विभाग का ध्यान आपकी फाइल पर न जाए.

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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